किसान समृद्धि

किसान समृद्धि से चमका मप्र कृषि कल्याण की सुनिश्चितता

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किसान समृद्धि से चमका मप्र कृषि कल्याण की सुनिश्चितता

​मध्यप्रदेश की पावन धरा हमेशा से ही देश के कृषि परिदृश्य में एक अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है, लेकिन वर्तमान समय में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कुशल नेतृत्व में प्रदेश ने कृषि क्षेत्र में जो अभूतपूर्व सफलता अर्जित की है, वह न केवल ऐतिहासिक है बल्कि पूरे देश के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण बन चुकी है। किसी भी राज्य की प्रगति का सबसे सच्चा और मजबूत पैमाना वहां के अन्नदाताओं की खुशहाली और उनके चेहरों की मुस्कान होती है। इस कसौटी पर मध्यप्रदेश सरकार पूरी तरह खरी उतरी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के किसानों के प्रति समर्पण, दूरदर्शिता और दृढ़ इच्छाशक्ति का ही परिणाम है कि आज प्रदेश ने पूरे देश में सर्वाधिक किसानों से गेहूं खरीदकर एक नया और अटूट रिकॉर्ड स्थापित किया है। यह सफलता केवल कागजी आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जमीन पर रचे गए एक नए इतिहास की गवाही दे रही है, जिसने मध्यप्रदेश को कृषि और किसान कल्याण के मामले में देश का नंबर-1 राज्य बना दिया है।

​इस गौरवमयी उपलब्धि पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा प्रदेश की जनता और विशेष रूप से रात-दिन खेतों में पसीना बहाने वाले किसानों को दी गई बधाई उनके संवेदनशील और किसान-हितैषी व्यक्तित्व को रेखांकित करती है। जब एक राज्य का मुखिया अपनी सफलता का श्रेय सीधे तौर पर अपने प्रदेश के मेहनतकश अन्नदाताओं को देता है, तो इससे न केवल शासन और जनता के बीच का विश्वास मजबूत होता है, बल्कि किसानों के भीतर भी गौरव और सुरक्षा की भावना जागृत होती है। मुख्यमंत्री का यह संदेश स्पष्ट करता है कि उनकी सरकार केवल वादों पर नहीं, बल्कि धरातल पर ठोस और परिणामोन्मुखी काम करने में विश्वास रखती है। मध्यप्रदेश सरकार ने अपने ही पुराने तमाम रिकॉर्ड ध्वस्त करते हुए इस सीजन में रिकॉर्ड 1 करोड़ 4 लाख 31 हजार मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की है। यह आंकड़ा यह दर्शाने के लिए पर्याप्त है कि राज्य की उपार्जन व्यवस्था कितनी सुदृढ़, पारदर्शी और किसानों के अनुकूल रही है।
​इस पूरी खरीद प्रक्रिया की सबसे अनूठी और सराहनीय विशेषता यह रही कि गेहूं की इस विशाल मात्रा को बेचने वाले किसानों की संख्या पूरे देश में सबसे अधिक रही है। इसका सीधा और साफ मतलब यह है कि सरकारी खरीद का लाभ किसी एक वर्ग या बड़े किसानों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका फायदा राज्य के कोने-कोने में बैठे छोटे से छोटे और सीमांत किसान तक पहुंचा है। मध्यप्रदेश सरकार ने इस बार एक अत्यंत संवेदनशील और क्रांतिकारी निर्णय लेते हुए लघु और मध्यम श्रेणी के किसानों के गेहूं को प्राथमिकता के आधार पर खरीदने की व्यवस्था की। इसके तहत छोटे किसानों से लगभग 32.72 लाख मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की गई, जो अपने आप में सामाजिक और आर्थिक न्याय का एक बेहतरीन उदाहरण है। लगभग पौने चौदह लाख किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदा जाना इस बात का जीवंत प्रमाण है कि सरकार की नीतियां हर एक किसान को संबल देने के लिए बनाई गई हैं। जिन किसानों ने पंजीयन कराया था, उनके अनाज का एक-एक दाना सुरक्षित तरीके से सरकारी गोदामों तक पहुंच चुका है, जो प्रशासनिक दक्षता का एक बेजोड़ नमूना है।
​इतना ही नहीं, मध्यप्रदेश ने एक और ऐसा कीर्तिमान स्थापित किया है जिसकी सराहना की जानी चाहिए। वह है सर्वाधिक लंबे समय तक गेहूं खरीदी की व्यवस्था को जारी रखना। अक्सर देखा जाता है कि समय सीमा समाप्त होने के बाद किसान अपने अनाज को औने-पौने दामों पर बिचौलियों को बेचने के लिए मजबूर हो जाते हैं। लेकिन डॉ. मोहन यादव की सरकार ने किसानों के इस दर्द को समझा और उपार्जन की अवधि को तब तक विस्तारित रखा जब तक कि आखिरी किसान का गेहूं भी सम्मानजनक तरीके से नहीं खरीद लिया गया। जब हम कुल गेहूं उपार्जन के मामले में देश के परिदृश्य को देखते हैं, तो मात्रा के हिसाब से भी पंजाब के बाद मध्यप्रदेश पूरे देश में दूसरे स्थान पर मजबूती से खड़ा है। यह स्थिति तब है जब राज्य के पास गेहूं का इतना विपुल और विशाल उत्पादन हुआ, जिसे संभालना और सुचारू रूप से खरीदना किसी भी प्रशासनिक तंत्र के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती होती है। मगर मध्यप्रदेश के प्रशासनिक अमले ने मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में इस चुनौती को एक स्वर्णिम अवसर में बदल दिया।
​यह सफलता इसलिए भी और अधिक विशेष तथा मूल्यवान हो जाती है क्योंकि इसे बेहद कठिन वैश्विक परिस्थितियों के बीच हासिल किया गया है। वर्तमान में मध्य एशिया और पश्चिम एशिया में उत्पन्न विषम भू-राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों के कारण वैश्विक बाजार और व्यवस्थाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। इन अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों और अनिश्चितताओं के बावजूद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सशक्त नेतृत्व और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की रणनीतिक सूझबूझ से देश और राज्य में किसानों के हितों को सर्वोपरि रखा गया। संकट के इस दौर में भी सरकार ने किसानों के संरक्षण कवच को कमजोर नहीं होने दिया। इसे ही ‘किसान कल्याण वर्ष’ के वास्तविक और सच्चे परिणाम के रूप में देखा जाना चाहिए। सरकार ने केवल गेहूं खरीदा ही नहीं, बल्कि किसानों के खातों में 24 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की विशाल धनराशि सीधे प्रेषित की है। इतनी बड़ी राशि का ग्रामीण अर्थव्यवस्था में आना निश्चित रूप से गांवों में समृद्धि लाएगा, व्यापार को गति देगा और किसानों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाएगा।
​इस वर्ष सरकार ने किसानों से गेहूं की खरीदी 2585 रुपये प्रति क्विंटल के समर्थन मूल्य पर की और साथ ही अपनी प्रतिबद्धता को निभाते हुए 40 रुपये प्रति क्विंटल का विशेष बोनस भी दिया, जिससे किसानों को कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल का बेहतरीन दाम मिला। यह बोनस राशि किसानों के प्रति सरकार के आदर और उनकी मेहनत के सही मूल्यांकन को दर्शाती है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का यह आश्वासन कि आने वाले समय में न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में और बढ़ोतरी की जाएगी तथा किसान कल्याण के कार्यों को और अधिक तेज गति दी जाएगी, प्रदेश के कृषि भविष्य को लेकर एक बेहद सकारात्मक और उज्ज्वल तस्वीर पेश करता है। गेहूं का ऐसा बंपर और रिकॉर्ड तोड़ उत्पादन होना निश्चित रूप से मध्यप्रदेश के लिए सौभाग्य की बात है, लेकिन इस उत्पादन को सही मूल्य और सही बाजार दिलाना सरकार का उत्तरदायित्व था, जिसे मोहन यादव सरकार ने पूरी निष्ठा के साथ निभाया है।
​संक्षेप में कहा जाए तो, मध्यप्रदेश में कृषि क्षेत्र की यह ऐतिहासिक उपलब्धि केवल एक सरकारी प्रक्रिया की पूर्णता नहीं है, बल्कि यह इस बात का उद्घोष है कि यदि नेतृत्व में इच्छाशक्ति हो, नीतियां स्पष्ट हों और इरादे नेक हों, तो हर बाधा को पार करके सफलता के नए शिखर छुए जा सकते हैं। डॉ. मोहन यादव की सरकार ने यह साबित कर दिया है कि उनकी सरकार की प्राथमिकताओं के केंद्र में हमेशा गांव, गरीब और किसान ही रहेंगे। यह कीर्तिमान आने वाले वर्षों में मध्यप्रदेश को देश के कृषि इतिहास में एक मार्गदर्शक के रूप में स्थापित करेगा और अन्नदाता की यह समृद्धि पूरे प्रदेश की प्रगति का मुख्य आधार बनेगी।

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