एजेंसी, नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को मशहूर गायक हनी सिंह और बादशाह के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए उनके करीब दो दशक पुराने विवादित गाने ‘माफिया मुंडीर’ वॉल्यूम 1 को इंटरनेट के सभी प्लेटफॉर्म से तुरंत हटाने का आदेश दिया है। अदालत ने इस गाने के बोल को ‘बेहद अश्लील’ और महिलाओं के प्रति पूरी तरह अपमानजनक करार दिया है।
Delhi High Court directed to take down the URLs of a song by Yo Yo Honey Singh from all social media platforms and sharing platforms.
The song was released in 2006-7 by Honey Singh and Badshah. The High Court said that the song is obscene, vulgar and derogatory towards women.…
— ANI (@ANI) April 2, 2026
जस्टिस पुरुशेंद्र कौरव की पीठ ने हनी सिंह और बादशाह को नोटिस जारी करते हुए कड़े निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने टिप्पणी की कि इस गाने का शीर्षक और इसके बोल इतने ज्यादा आपत्तिजनक हैं कि उन्हें अदालती आदेश में लिखना भी मुमकिन नहीं है। अदालत ने गूगल, यूट्यूब और स्पॉटिफाई जैसे तमाम म्यूजिक और वीडियो शेयरिंग प्लेटफॉर्म को निर्देश दिया है कि इस गाने के मूल वर्जन, रीमिक्स और उससे जुड़े सभी यूआरएल को तुरंत ब्लॉक किया जाए।
जस्टिस कौरव ने अपने चैंबर में इस गाने को सुनने और इसके बोलों को पढ़ने के बाद बेहद तल्ख टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यह उन चुनिंदा मामलों में से एक है जिसने अदालत की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया है। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि गाने के बोल महिलाओं का अपमान करते हैं और उन्हें केवल मजाक का पात्र बनाते हैं। कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि इस गाने में कोई भी कलात्मक या सामाजिक मूल्य नहीं है और कलात्मक अभिव्यक्ति की आड़ में ऐसी अश्लीलता को बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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यह पूरी कार्रवाई हिंदू शक्ति दल द्वारा दायर की गई एक याचिका पर हुई है। याचिका में दलील दी गई थी कि यह विवादित गाना डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आसानी से उपलब्ध है, जिसका युवाओं और बच्चों के मन पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को यह भी बताया कि हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान हनी सिंह ने इस गाने की कुछ पंक्तियां गाई थीं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह गाना उन्हीं का है। इसके बाद अदालत ने केंद्र सरकार को भी इससे जुड़े सभी विवादित लिंक ब्लॉक करने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने इस बात पर भी जोर दिया कि सार्वजनिक प्लेटफॉर्म पर ऐसी सामग्री फैलाना, जो नाबालिगों के लिए भी उपलब्ध हो, समाज के लिए कतई ठीक नहीं है। जस्टिस कौरव ने कहा कि समाज में शालीनता के पैमानों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून से चलने वाला कोई भी सभ्य समाज ऐसी सामग्री को पैसे कमाने का जरिया बनाने की अनुमति नहीं दे सकता। इस मामले में अब अगली सुनवाई 7 मई को होनी तय की गई है।


