एजेंसी, नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र की एक ताजा रिपोर्ट में भारत के लिए बहुत बड़ी और सुखद खबर सामने आई है। इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत में बच्चों की मृत्यु दर में बहुत बड़े स्तर पर कमी दर्ज की गई है, जिसकी संयुक्त राष्ट्र ने भी खुले दिल से प्रशंसा की है। इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि देश में मासूमों की जान बचाने की दिशा में हुई इस प्रगति की दुनिया भर में सराहना हो रही है।
UN report lauds India for sharp dip in child deathshttps://t.co/vuLT3Bbwo9
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— PMO India (@PMOIndia) March 19, 2026
संयुक्त राष्ट्र की बाल मृत्यु दर अनुमान से जुड़ी साल 2025 की ताजा रिपोर्ट बताती है कि बच्चों को जीवनदान देने के वैश्विक प्रयासों में भारत एक मुख्य शक्ति बनकर उभरा है। रिपोर्ट में खास तौर पर नवजात शिशुओं और पांच साल से कम उम्र के बच्चों की सेहत सुधारने के लिए भारत द्वारा किए गए निरंतर और व्यापक प्रयासों को रेखांकित किया गया है। इन नतीजों से यह साफ हो गया है कि केंद्र और राज्यों के तालमेल से चलने वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली जमीन पर बेहद असरदार साबित हुई है। आंकड़ों की बात करें तो भारत ने नवजात शिशुओं की मौत के मामले में 70 प्रतिशत की कमी हासिल की है। साल 1990 में जहां प्रति एक हजार जन्म पर 57 शिशुओं की मृत्यु हो जाती थी, वहीं 2024 में यह आंकड़ा घटकर केवल 17 रह गया है।
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इसी तरह पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में भी 79 फीसदी की बड़ी गिरावट आई है, जो 1990 के 127 के मुकाबले अब मात्र 27 पर आ गई है। पिछले दो दशकों में दक्षिण एशिया के पूरे क्षेत्र में बच्चों की जान बचाने में भारत की भूमिका सबसे अहम रही है। यह बड़ी सफलता मुख्य रूप से अस्पतालों में सुरक्षित प्रसव की व्यवस्था, टीकाकरण के दायरे में बढ़ोतरी और स्वास्थ्य सेवाओं को हर गांव तक पहुंचाने की वजह से मिली है। भारत के विशेष प्रयासों ने निमोनिया, डायरिया और मलेरिया जैसी बीमारियों से होने वाली मौतों को रोकने में बड़ी मदद की है। रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि भारत में नवजात शिशुओं की देखभाल के लिए बनाए गए विशेष केंद्रों और बीमारियों के बेहतर प्रबंधन ने इस मृत्यु दर को कम करने में जादुई असर दिखाया है। हालांकि दक्षिण एशिया में अब भी वैश्विक स्तर पर बच्चों की मौतों का एक बड़ा हिस्सा है, लेकिन इस क्षेत्र ने दुनिया में सबसे तेजी से सुधार किया है और इसमें भारत का योगदान सबसे बड़ा है।


