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खाड़ी क्षेत्र में महायुद्ध का खतरा : ईरान के हमलों से कुवैत की रिफाइनरियों में लगी आग, कतर ने ईरानी राजनयिकों को निकाला और ट्रंप ने दी ‘विनाश’ की धमकी

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एजेंसी, दुबई। खाड़ी क्षेत्र में तनाव अब एक खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। कुवैत ने जानकारी दी है कि बृहस्पतिवार को ईरान के ड्रोन हमलों के कारण उसकी दो प्रमुख तेल रिफाइनरियों, मीना अब्दुल्ला और मीना अल-अहमदी में भीषण आग लग गई। ये हमले उस समय हुए जब पूरे क्षेत्र की ऊर्जा संपदा को निशाना बनाया जा रहा है। कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के अनुसार, आग पर काबू पाने के लिए सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है, हालांकि इस घटना ने वैश्विक तेल बाजार में हलचल पैदा कर दी है।

इस बीच, कतर ने भी अपने रास लाफान औद्योगिक शहर पर हुए मिसाइल हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की है। कतर के विदेश मंत्रालय ने इसे अपनी संप्रभुता का सीधा उल्लंघन बताते हुए चेतावनी दी है कि वह जवाबी कार्रवाई का अधिकार रखता है। रास लाफान दुनिया का सबसे बड़ा गैस निर्यात केंद्र है, जहां हमलों से भारी नुकसान की खबर है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कतर ने अपने देश में तैनात ईरानी सैन्य अधिकारियों और दूतावास के कर्मचारियों को ‘अवांछित’ घोषित कर दिया है और उन्हें 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का सख्त आदेश दिया है।

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इधर, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस पूरे विवाद पर बेहद कड़ा रुख अपनाया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक संदेश जारी कर ईरान को खुली चेतावनी दी है कि यदि उसने कतर के गैस केंद्रों पर दोबारा हमला किया, तो अमेरिका जवाबी कार्रवाई में ईरान के पूरे ऊर्जा क्षेत्र को ‘मिटा’ देगा। ट्रंप ने कहा कि हालांकि वह इतने बड़े पैमाने पर विनाश नहीं चाहते, लेकिन कतर जैसे ‘निर्दोष’ देश पर हमला बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इजराइल द्वारा ईरान के ‘साउथ पार्स’ गैस क्षेत्र पर किए गए हमले में अमेरिका की कोई भूमिका नहीं थी।

ईरान का दावा है कि उसने ये हमले इजराइल द्वारा अपने गैस क्षेत्रों को निशाना बनाए जाने के विरोध में किए हैं। इजरायली हमलों में ईरान के खुफिया मंत्री की मौत के बाद तेहरान ने खाड़ी के पड़ोसी देशों- सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर के ऊर्जा प्रतिष्ठानों को ‘वैध लक्ष्य’ घोषित कर दिया है। संयुक्त अरब अमीरात ने भी अपने गैस संयंत्रों पर हुए हमलों को युद्ध भड़काने वाला कदम बताया है। फिलहाल पूरे क्षेत्र में युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति ठप होने का डर सता रहा है।

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