एजेंसी, उज्जैन। Ujjain Simhastha 2028 : वर्ष 2028 में धार्मिक नगरी उज्जैन में आयोजित होने वाले विश्व प्रसिद्ध सिंहस्थ महाकुंभ को लेकर मध्य प्रदेश सरकार ने अपनी रणनीतिक तैयारियां काफी तेज कर दी हैं। इस बार के महाकुंभ में देश और दुनिया भर से लगभग 35 से 40 करोड़ श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आने का एक बड़ा अनुमान लगाया गया है। इतनी विशाल संख्या में जुटने वाली भीड़ के सुरक्षित और सुगम प्रबंधन के लिए मोहन सरकार जहाँ 18 हजार करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बुनियादी ढांचे (अधोसंरचना) के विकास कार्यों को अमलीजामा पहना रही है, वहीं सिंहस्थ के बेहतर संचालन के लिए एक बिल्कुल नया मेला कानून लाने की भी बड़ी तैयारी कर चुकी है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा ‘सिंहस्थ मेला अधिनियम-2026’ का एक विशेष प्रारूप (ड्राफ्ट) पूरी तरह तैयार कर लिया गया है। इस नए विधेयक को विधानसभा के आगामी मानसून सत्र में मंजूरी के लिए पेश किए जाने की पूरी संभावना है। इस प्रस्तावित नए कानून के लागू होते ही एक शक्तिशाली ‘सिंहस्थ मेला प्राधिकरण’ का गठन किया जाएगा, जो मेले से जुड़े सभी नीतिगत फैसलों और जमीनी व्यवस्थाओं की सीधी निगरानी करेगा।
प्रयागराज महाकुंभ के मॉडल पर तैयार हुआ ढांचा, 1955 के पुराने कानून की लेगा जगह
प्रशासनिक अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस नए कानून का मसौदा तैयार करने से पहले मध्य प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश के प्रयागराज महाकुंभ की आधुनिक व्यवस्थाओं का बेहद बारीकी से और गहन अध्ययन कराया था। मध्य प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारियों की टीमों ने प्रयागराज जाकर वहाँ के भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा चक्र, यातायात प्रबंधन, स्वच्छता मॉडल्स, स्वास्थ्य सेवाओं और उन्नत डिजिटल तकनीक के सफल उपयोग का प्रत्यक्ष अवलोकन किया था। इसी जमीनी अनुभव के आधार पर सरकार ने यह तय किया कि वर्ष 1955 के बेहद पुराने और पारंपरिक कानून की जगह वर्तमान समय की तकनीकी और सुरक्षा आवश्यकताओं के अनुरूप नए कड़े प्रावधानों वाला कानून लाया जाए। प्रस्तावित नए अधिनियम के तहत बनने वाले सिंहस्थ मेला प्राधिकरण में प्रशासन, पुलिस, नगर निगम, स्वास्थ्य, जल संसाधन, बिजली और परिवहन समेत सभी संबंधित विभागों के शीर्ष अधिकारियों को शामिल किया जाएगा। त्वरित और प्रभावी निर्णय लेने के लिए स्वयं मुख्यमंत्री को इस प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाए जाने का प्रस्ताव रखा गया है।
मेला क्षेत्रों में राजस्व अधिकारियों की तैनाती, कलेक्टर के पास होंगे असीमित अधिकार
नए प्रशासनिक प्रबंधन ढांचे के अनुसार, पूरे विशाल मेला क्षेत्र को अलग-अलग छोटे और बड़े सेक्टरों में विभाजित किया जाएगा। इन सभी सेक्टर्स में कानून व्यवस्था और प्रबंधन को चुस्त-दुरुस्त रखने के लिए राजस्व विभाग के अधिकारियों की तैनाती की जाएगी। मौके पर ही कानून व्यवस्था से जुड़े त्वरित फैसले लेने के लिए इन तैनात अधिकारियों को कार्यपालक मजिस्ट्रेट (एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट) की विशेष कानूनी शक्तियां प्रदान की जाएंगी। मेले के दौरान अलग-अलग विभागों के बीच आपसी तालमेल बिठाने और सभी प्रकार की व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने की संपूर्ण जिम्मेदारी सीधे जिला कलेक्टर के हाथों में होगी। प्रस्तावित नई व्यवस्था के तहत कलेक्टर को कानून व्यवस्था और आपातकालीन स्थितियों में तत्काल निर्णय लेने के विशेष अधिकार सौंपे गए हैं, ताकि उन्हें हर छोटे-बड़े फैसले के लिए बार-बार राज्य शासन या मंत्रालय से अनुमति लेने में समय न गंवाना पड़े।
नियम तोड़ने और लापरवाही बरतने पर होगी 3 साल तक की जेल और भारी जुर्माना
नए अधिनियम को बेहद सख्त और प्रभावी बनाया जा रहा है ताकि मेले की व्यवस्थाओं में कोई खलल न पड़े। वर्तमान व्यवस्था में नियमों का उल्लंघन करने पर केवल मामूली आर्थिक दंड (जुर्माना) लगाने का प्रावधान है, जिससे लोग नियमों को गंभीरता से नहीं लेते थे। इस ढिलाई को खत्म करने के लिए नए कानून में आर्थिक जुर्माने की राशि को बढ़ाने के साथ-साथ नियमों का उल्लंघन करने वाले दोषियों के लिए अधिकतम 3 वर्ष तक के सश्रम कारावास (जेल) का बेहद सख्त प्रावधान शामिल किया जा रहा है। इससे अतिक्रमणकारियों और मेले में अव्यवस्था फैलाने वाले तत्वों पर सीधे नकेल कसी जा सकेगी।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, 60 हजार पुलिसकर्मी और ड्रोन कैमरों से सजेगा सुरक्षा चक्र
सिंहस्थ-2028 को तकनीकी रूप से पूरी दुनिया के सामने एक अत्याधुनिक और डिजिटल रूप में पेश करने पर विशेष फोकस किया जा रहा है। महाकुंभ के दौरान भीड़ प्रबंधन (क्राउड मैनेजमेंट), ट्रैफिक कंट्रोल, आपदा प्रबंधन और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के लिए ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (एआई) पर आधारित एक बेहद हाईटेक सिस्टम विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस डिजिटल सिस्टम को तैयार करने के संबंध में गूगल क्लाउड इंडिया के शीर्ष अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक भी पूरी कर चुके हैं। इस योजना के तहत एआई तकनीक की मदद से रियल टाइम भीड़ विश्लेषण, ऑटोमैटिक ट्रैफिक डायवर्जन, इमरजेंसी अलर्ट और सुरक्षा प्रणालियों को पूरी तरह कंप्यूटरीकृत किया जाएगा। इसके साथ ही सुरक्षा व्यवस्था को अभेद्य बनाने के लिए पूरे मेला क्षेत्र में चौबीसों घंटे ड्रोन कैमरों से हवाई निगरानी रखी जाएगी। सिंहस्थ की सुरक्षा के लिए जमीन पर 60 हजार से अधिक चुनिंदा पुलिसकर्मियों और जवानों की तैनाती का एक बड़ा खाका तैयार किया गया है। इस पूरे सुरक्षा तंत्र की कमान पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) स्तर के बेहद अनुभवी आईपीएस अधिकारी संभालेंगे।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह खुद करेंगे उज्जैन पहुंचकर तैयारियों की समीक्षा
सिंहस्थ महाकुंभ-2028 की विशालता को देखते हुए केंद्र सरकार भी इस पर सीधी नजर बनाए हुए है। सिंहस्थ की तमाम व्यवस्थाओं और सुरक्षा तैयारियों की उच्च स्तरीय समीक्षा करने के लिए अगले वर्ष केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का उज्जैन का एक विशेष दौरा प्रस्तावित है। रणनीति के अनुसार, गृह मंत्री के इस दौरे के दौरान ही उज्जैन में ‘मध्य क्षेत्रीय परिषद’ की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक भी आयोजित करने की योजना बनाई जा रही है। इस बैठक में मेले की सुरक्षा, केंद्रीय बलों की तैनाती और अंतर-राज्यीय परिवहन व्यवस्थाओं की व्यापक समीक्षा की जाएगी। सरकार का अंतिम लक्ष्य इस सिंहस्थ को महज एक पारंपरिक धार्मिक आयोजन तक सीमित रखना नहीं है, बल्कि इसे आधुनिकतम तकनीक, बेहतरीन प्रशासनिक प्रबंधन और विश्वस्तरीय नागरिक सुविधाओं के एक बेजोड़ संगम के रूप में आयोजित करना है, ताकि यहाँ आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को एक सुरक्षित, पवित्र और सुगम अनुभव प्राप्त हो सके।
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