एजेंसी, कोलकाता। TMC Leader Attacked : पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में स्थित सोनारपुर दक्षिण क्षेत्र में शनिवार की शाम को राजनीतिक सरगर्मी उस समय बेहद हिंसक हो गई, जब तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी पर भीड़ द्वारा जानलेवा हमला कर दिया गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी यहां विधानसभा चुनाव के बाद भड़की राजनीतिक हिंसा से प्रभावित अपने पार्टी कार्यकर्ताओं और उनके पीड़ित परिवारों से सांत्वना मुलाकात करने पहुंचे थे।
आरोप है कि जैसे ही उनका काफिला क्षेत्र में दाखिल हुआ, वहां पहले से मौजूद भारतीय जनता पार्टी के समर्थकों और स्थानीय लोगों की उग्र भीड़ ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया। भीड़ ने उनके खिलाफ बेहद आक्रामक रूप से नारेबाजी शुरू कर दी और देखते ही देखते यह विरोध हिंसक झड़प में बदल गया। उग्र लोगों ने टीएमसी सांसद पर पत्थरों, जूतों और अंडों से हमला कर दिया। इस अफरा-तफरी के बीच प्रदर्शनकारियों ने उनके साथ जमकर मारपीट की और उनकी शर्ट तक फाड़ डाली। स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि अभिषेक बनर्जी को गंभीर चोटों से बचाने के लिए उनके सुरक्षाकर्मियों को आनन-फानन में उन्हें सुरक्षा हेलमेट पहनाना पड़ा और वे किसी तरह उन्हें सुरक्षित बाहर निकालने में कामयाब रहे।
RULERS BECAME KILLERS- shame on you BJP https://t.co/DHNsnDAc9a
— Mamata Banerjee (@MamataOfficial) May 30, 2026
हमले के बाद अभिषेक बनर्जी का तीखा बयान और न्याय की मांग
इस भीषण हमले के बाद मीडियाकर्मियों से बातचीत करते हुए पीड़ित सांसद अभिषेक बनर्जी ने अपने शरीर और कपड़ों की स्थिति दिखाते हुए कहा कि विरोधियों ने उनके साथ जो बर्ताव किया है, वह सबके सामने है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि उन्हें नुकसान पहुंचाने के लिए पहले से ही एक सोची-समझी साजिश रची गई थी। उन्होंने प्रशासन पर सवाल उठाते हुए कहा कि इतने संवेदनशील क्षेत्र में सुरक्षा के लिए कोई भी पुलिस बल तैनात नहीं था और हमलावर उन्हें जान से मारना चाहते थे। उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ हेलमेट पहने होने की वजह से आज उनके सिर की रक्षा हो सकी है, अन्यथा कोई भी बड़ी अनहोनी हो सकती थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे इस प्रकार के कायराना हमलों से बिल्कुल भी डरने वाले नहीं हैं और यह पूरी वारदात वहां मौजूद कैमरों में कैद हो चुकी है।
इस हिंसक घटना के बावजूद अभिषेक बनर्जी ने अपना दौरा रद्द नहीं किया और वे चुनाव के बाद हुई हिंसा में जान गंवाने वाले टीएमसी कार्यकर्ता के शोकाकुल परिवार से मिलने उनके घर पहुंचे। वहां उन्होंने पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया और कहा कि वे इस पूरी बर्बरता के खिलाफ देश की सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटायेंगे। इसके साथ ही वे देश की संसद में इस सुरक्षा चूक को लेकर विशेषाधिकार हनन का औपचारिक नोटिस भी दाखिल करेंगे। सांसद ने यह भी घोषणा की कि जब तक स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंचकर पीड़ित परिवार को पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं देती, तब तक वे उस घर से नहीं जाएंगे, क्योंकि उनके जाने के बाद उग्र लोग उस परिवार पर दोबारा हमला कर सकते हैं।
सोनारपुर क्षेत्र का राजनीतिक इतिहास और मई में भड़की हिंसा
भौगोलिक दृष्टि से दक्षिण 24 परगना जिले के अंतर्गत आने वाला सोनारपुर इलाका राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील और अशांत क्षेत्र माना जाता रहा है। इस क्षेत्र में लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के बीच सत्ता को लेकर बेहद कड़ा और सीधा मुकाबला देखने को मिलता है, जिसके कारण यहां अक्सर चुनावी और चुनाव के बाद की हिंसक घटनाएं सामने आती रहती हैं। हाल ही में संपन्न हुए वर्ष २०२६ के विधानसभा चुनावों के परिणाम आने के बाद भी इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हिंसा भड़की थी।
इसी साल मई 2026 के महीने में सोनारपुर के अंतर्गत आने वाले कामराबाद नस्करपाड़ा इलाके में एक भाजपा कार्यकर्ता सौमेन दास के रिहायशी मकान को आग के हवाले कर दिया गया था। उस समय पीड़ित भाजपा कार्यकर्ता ने स्थानीय टीएमसी कार्यकर्ताओं पर आरोप लगाया था कि चुनाव परिणाम आने के बाद से ही उन्हें लगातार धमकियां मिल रही थीं और अंततः उनके घर को जला दिया गया। वर्तमान राजनीतिक स्थिति की बात करें तो सोनारपुर दक्षिण विधानसभा सीट से इस समय भाजपा की वरिष्ठ नेता रूपा गांगुली विधायक हैं। उन्होंने वर्ष 2026 के इसी विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की महिला उम्मीदवार अरुंधति मैत्रा, जिन्हें लवली मैत्रा के नाम से भी जाना जाता है, को एक कड़े मुकाबले में पराजित किया था।
राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक नेताओं की तीखी प्रतिक्रियाएं
इस हाई-प्रोफाइल हमले के बाद देश के राजनीतिक गलियारों में बयानों का दौर शुरू हो गया है और विपक्षी नेताओं ने इसकी कड़े शब्दों में निंदा की है। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस घटना पर गहरा दुख और आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य में सत्ता पर काबिज लोग अब हत्यारे बन चुके हैं और इस शर्मनाक कृत्य के लिए भाजपा को देश के सामने शर्मिंदा होना चाहिए। वहीं दूसरी ओर, कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी इस घटना को लेकर केंद्र और राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि देश के एक इतने बड़े विपक्षी नेता को पर्याप्त पुलिस सुरक्षा मुहैया न कराना पूरी तरह से भाजपा की बदले की राजनीति को प्रदर्शित करता है। उन्होंने मांग की कि पश्चिम बंगाल प्रशासन और केंद्र सरकार को तुरंत सभी विपक्षी दलों के नेताओं की सुरक्षा पुख्ता करनी चाहिए और ऐसे हिंसक तत्वों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करनी चाहिए, क्योंकि लोकतंत्र में वैचारिक मतभेद कभी भी शारीरिक हिंसा का रूप नहीं ले सकते।
इसके साथ ही समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस घटना की तीव्र आलोचना करते हुए इसे एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश करार दिया। उन्होंने अपने बयान में कहा कि अभिषेक बनर्जी पर कराया गया यह जानलेवा हमला यह साबित करता है कि बंगाल की वर्तमान अराजक सरकार सिर्फ नफरत और हिंसा की राजनीति करना जानती है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतने संवेदनशील माहौल की जानकारी होने के बाद भी वहां पुलिस बल का मौजूद न होना प्रशासन की मिलीभगत की ओर इशारा करता है, जो कि पूरी तरह से निंदनीय है।
फर्जी हस्ताक्षर मामले में समन और गृह मंत्री पर दिए गए बयान का विवाद
एक तरफ जहां अभिषेक बनर्जी इस हमले से जूझ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनके खिलाफ कानूनी मोर्चे पर भी शिकंजा कसता जा रहा है। शनिवार की सुबह ही पश्चिम बंगाल की अपराध जांच एजेंसी यानी सीआईडी ने एक कथित फर्जी हस्ताक्षर से जुड़े मामले में अभिषेक बनर्जी को आधिकारिक तौर पर समन जारी किया है। जांच एजेंसी ने उन्हें आगामी सोमवार को दोपहर १२ बजे कोलकाता स्थित सीआईडी के मुख्य कार्यालय, भवानी भवन में पूछताछ के लिए व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया है। राष्ट्रीय समाचार एजेंसी के अनुसार, सीआईडी के वरिष्ठ अधिकारियों की एक टीम ने शनिवार को ही उनके कालीघाट स्थित निजी आवास पर जाकर यह कानूनी नोटिस उन्हें तामील कराया है।
यह कानूनी कार्रवाई उस मामले से अलग है जो उनके खिलाफ पिछले दिनों दर्ज किया गया था। बीते 15 मई को उत्तर 24 परगना जिले के बिधाननगर साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में अभिषेक बनर्जी के खिलाफ एक मुख्य प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इस मामले में उन पर आरोप है कि उन्होंने बंगाल विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान एक जनसभा को संबोधित करते हुए बेहद भड़काऊ और अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल किया था। इसके साथ ही उन पर देश के केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ सार्वजनिक मंच से धमकी भरा बयान देने का भी गंभीर आरोप है। शिकायत में कहा गया है कि उन्होंने विभिन्न रैलियों में विपक्षी दल के कार्यकर्ताओं और नेताओं के खिलाफ खुलेआम आक्रामक और डराने वाली भाषा का प्रयोग किया था, जिससे क्षेत्र का माहौल खराब हुआ।
सुरक्षा हटाए जाने पर टीएमसी का केंद्र सरकार पर तीखा पलटवार
अभिषेक बनर्जी पर हुए इस हमले के तुरंत बाद तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने दिल्ली में बैठी केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी के राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ नेता डेरेक ओ’ब्रायन ने केंद्रीय गृह मंत्रालय की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए पूछा कि आखिर किस कानून के तहत और क्यों अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा को अचानक कम या हटा दिया गया, जबकि यह सर्वविदित था कि उनकी जान को लगातार खतरा बना हुआ है।
उन्होंने अपने संदेश में लिखा कि बंगाल में इस समय पूरी तरह से तानाशाही का माहौल है, जहां देश की दूसरी सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के लोकसभा नेता पर सरेआम सत्ताधारी दल के गुंडों द्वारा हमला किया जाता है। उन्होंने सवाल किया कि मतगणना के ठीक बाद के दिनों में उनकी सुरक्षा व्यवस्था को क्यों ढीला किया गया? गृह मंत्री को देश के सामने इस बड़ी लापरवाही का जवाब देना होगा। गौरतलब है कि हालिया चुनावों में तृणमूल कांग्रेस को पराजय का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद राज्य में राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं। टीएमसी नेताओं का कहना है कि वे इस पूरे मामले को लेकर देश के राज्यपाल और माननीय उच्च न्यायालय के समक्ष भी जाएंगे ताकि उनके नेताओं को उचित सुरक्षा मिल सके।
शांति बनाए रखने की अपील के साथ भाजपा का आधिकारिक रुख
सोनारपुर में हुए इस पूरे घटनाक्रम और टीएमसी द्वारा लगाए जा रहे गंभीर आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व ने भी अपनी आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने इस घटना पर बोलते हुए कहा कि वे किसी भी प्रकार की हिंसा का समर्थन नहीं करते हैं और वे इस हमले की कड़े शब्दों में निंदा करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने क्षेत्र की जनता और अपने कार्यकर्ताओं से एक विशेष अपील करते हुए कहा कि किसी को भी कानून-व्यवस्था को अपने हाथ में लेने का प्रयास नहीं करना चाहिए।
उन्होंने टीएमसी पर पलटवार करते हुए कहा कि आज बंगाल की आम जनता के भीतर तृणमूल कांग्रेस और विशेषकर अभिषेक बनर्जी के पिछले कार्यों को लेकर बहुत ज्यादा गुस्सा भरा हुआ है, जो इस रूप में बाहर आ रहा है। परंतु, भाजपा का मुख्य लक्ष्य बंगाल की राजनीति को पूरी तरह से रक्तपात और हिंसा से मुक्त बनाना है और राज्य को विकास के पथ पर आगे ले जाना है। उन्होंने स्थानीय नागरिकों से शांति बनाए रखने और राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था व कानून पर पूरा भरोसा रखने का आग्रह किया ताकि स्थिति को नियंत्रण में रखा जा सके।
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