एजेंसी, वाशिंगटन। Trump vs Iran : अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष को रोकने की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान द्वारा भेजे गए शांति प्रस्ताव को ‘पूरी तरह से अस्वीकार्य’ बताते हुए खारिज कर दिया है। रविवार को मिले इस प्रस्ताव से उम्मीद जताई जा रही थी कि 28 फरवरी से जारी युद्ध समाप्त हो सकता है, लेकिन ट्रंप के कड़े रुख ने तनाव को फिर से बढ़ा दिया है। इस संघर्ष के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति का मुख्य समुद्री रास्ता बंद है, जिससे दुनिया भर में ईंधन का संकट पैदा हो गया है।
“I have just read the response from Iran’s so-called ‘Representatives.’ I don’t like it — TOTALLY UNACCEPTABLE! Thank you for your attention to this matter.” -President DONALD J. TRUMP pic.twitter.com/MIQDS9Ujjy
— The White House (@WhiteHouse) May 10, 2026
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जताई नाराजगी
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर लिखा कि उन्होंने ईरान के प्रतिनिधियों का जवाब पढ़ा है और उन्हें यह बिल्कुल पसंद नहीं आया। उन्होंने इसे पूरी तरह नामंजूर कर दिया है। ट्रंप ने ईरान पर पिछले 50 वर्षों से अमेरिका के साथ छल करने का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी कि अब उनकी यह खुशी ज्यादा दिनों तक नहीं टिकेगी। हालांकि, उन्होंने इस बारे में विस्तार से जानकारी नहीं दी कि ईरान के पत्र में आखिर क्या लिखा था।
सैन्य कार्रवाई की बढ़ती मांग
ईरान के रुख को देखते हुए अमेरिका में अब सैन्य कार्रवाई की मांग भी तेज होने लगी है। रिपब्लिकन सांसद लिंडसे ग्राहम ने कहा कि अब कूटनीति के बजाय दिशा बदलने का समय आ गया है। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप को सुझाव दिया कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग पर हमलों और अमेरिका के प्रस्ताव को ठुकराने के बाद अब सैन्य विकल्प पर विचार करना चाहिए। ग्राहम ने ईरानी शासन को आतंकवादी बताते हुए ट्रंप के अब तक के कूटनीतिक प्रयासों की सराहना भी की।
इजराइल के साथ चर्चा और आगामी रणनीति
इस बीच, ट्रंप ने इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से भी फोन पर विस्तार से चर्चा की है। उन्होंने इस बातचीत को बेहद सफल बताया और कहा कि इजराइल के साथ उनके संबंध बहुत मजबूत हैं। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि ईरान के साथ बातचीत का मामला पूरी तरह से उनका अपना मुद्दा है। गौरतलब है कि अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ मोर्चा खोला था, जिसके बाद 8 अप्रैल को युद्धविराम पर सहमति बनी थी, लेकिन स्थाई शांति अब भी कोसों दूर नजर आ रही है।
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