एजेंसी, दिल्ली। Vikasit Bharat Law : केंद्र सरकार ने ‘विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी ‘विकसित भारत-जी राम जी’ अधिनियम को सोमवार को अधिसूचित कर दिया है। यह नया कानून 1 जुलाई से देशभर के ग्रामीण इलाकों में प्रभावी होगा। ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, यह कदम ग्रामीण विकास और रोजगार को एक नई दिशा देने के उद्देश्य से उठाया गया है।
विकसित भारत – जी राम जी अधिनियम की अधिसूचना जारी कर दी गई है। अब VB – G RAM G के अंतर्गत 1 जुलाई से हमारे मजदूर भाई-बहनों को 125 दिन का रोजगार दिया जाएगा। pic.twitter.com/CUSJmUOV7p
— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) May 11, 2026
मनरेगा की जगह लेगा नया अधिनियम
विकसित भारत-जी राम जी कानून के लागू होते ही वर्ष 2005 से चले आ रहे महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को उसी तारीख से निरस्त कर दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि यह बदलाव ग्रामीण भारत के ढांचे में एक ऐतिहासिक परिवर्तन लाएगा, जो ‘विकसित भारत-2047’ के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उत्पादकता और भविष्य की जरूरतों पर आधारित है।
125 दिन के रोजगार की गारंटी
नई व्यवस्था के तहत अब प्रत्येक ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के मजदूरी आधारित रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी। यह सुविधा उन परिवारों के वयस्क सदस्यों के लिए होगी जो अकुशल शारीरिक श्रम करने के इच्छुक हैं। इस बढ़ी हुई गारंटी का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाना और गांवों में स्थाई विकास को बढ़ावा देना है।
समय पर भुगतान और बेरोजगारी भत्ता
नियमों के मुताबिक, श्रमिकों द्वारा काम की मांग किए जाने पर तय समय के भीतर उन्हें रोजगार उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। यदि सरकार काम देने में विफल रहती है, तो श्रमिक बेरोजगारी भत्ता पाने के हकदार होंगे। मजदूरी का भुगतान पूरी तरह पारदर्शी होगा और सीधे बैंक या डाकघर खातों में ‘डीबीटी’ (प्रत्यक्ष लाभ अंतरण) के जरिए भेजा जाएगा। भुगतान साप्ताहिक आधार पर या मस्टर रोल बंद होने के 15 दिनों के भीतर करना होगा, वरना श्रमिकों को देरी के लिए मुआवजा दिया जाएगा।
बजट में भारी आवंटन
इस योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सरकार ने भारी बजट का प्रावधान किया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 95,692.31 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो अब तक का सबसे बड़ा आवंटन है। राज्यों के हिस्से को मिलाकर इस कार्यक्रम का कुल खर्च 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है। सरकार को उम्मीद है कि इस कदम से ग्राम पंचायतें ग्रामीण बदलाव का मुख्य केंद्र बनेंगी और गांवों में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी।
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