Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव सूची के पुनरीक्षण पर दिया ऐतिहासिक निर्णय, स्वतंत्र और निष्पक्ष मतदान के लिए बताया आवश्यक

देश/प्रदेश नई दिल्ली राष्ट्रीय

एजेंसी, दिल्ली। Supreme Court voter list : उच्चतम न्यायालय ने भारत के निर्वाचन आयोग के उस विशेष अधिकार को पूरी तरह से सही ठहराया है जिसके अंतर्गत आयोग मतदाता सूचियों का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) करता है। अदालत ने साफ शब्दों में कहा है कि देश में निष्पक्ष और स्वतंत्र तरीके से चुनाव संपन्न कराने की संवैधानिक जिम्मेदारी को पूरा करने के लिए यह प्रक्रिया बेहद जरूरी है। देश की सबसे बड़ी अदालत ने स्पष्ट किया कि हमारे देश के संविधान के ढांचे और जनता के प्रतिनिधित्व से जुड़े कानून के तहत चुनाव आयोग को मतदाता सूची को पूरी तरह से जांचने और उसमें सुधार करने की पूरी शक्ति प्राप्त है। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली विशेष पीठ ने इस मामले में अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि यह बिल्कुल नहीं माना जा सकता कि चुनाव आयोग ने इस विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया का इस्तेमाल करके अपने तय कानूनी अधिकारों की सीमा को पार किया है या अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल किया है।

अदालत की महत्वपूर्ण टिप्पणियां

मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत की पीठ ने अपने फैसले में विस्तार से बात रखी। पीठ का कहना था कि वह किसी भी तरह से इस नतीजे पर नहीं पहुंच सकती कि यह पूरी कवायद सिर्फ प्रशासनिक कामकाज को आसान बनाने के लिए की गई थी। इसके उलट, अदालत यह मानती है कि चुनाव से पहले मतदाता सूचियों का इस तरह का विशेष गहन पुनरीक्षण देश के लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत करता है और स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव की संवैधानिक जरूरत को और ज्यादा बढ़ावा देता है। इस पूरी प्रक्रिया को अदालत में कुछ याचिकाओं के जरिए चुनौती दी गई थी। इन याचिकाओं में मुख्य रूप से यह दावा किया गया था कि देश के संविधान के अनुच्छेद 326, साल 1950 के जनप्रतिनिधित्व अधिनियम और उससे जुड़े बाकी नियमों के दायरे में चुनाव आयोग के पास इतने बड़े और व्यापक स्तर पर जाकर मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण करने की कोई कानूनी शक्ति या अधिकार नहीं है।

फैसला सुरक्षित रखने के बाद आया निर्णय

शीर्ष अदालत ने इस बेहद महत्वपूर्ण कानूनी और लोकतांत्रिक मामले की पूरी सुनवाई करने के बाद इस साल 29 जनवरी को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। चुनाव आयोग की इस कार्रवाई को चुनौती देने वाले याचिकाकर्ताओं की सूची में लोकतांत्रिक सुधारों के लिए काम करने वाली एक जानी-मानी गैर-सरकारी संस्था ‘एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स’ (एडीआर) भी मुख्य रूप से शामिल थी। उल्लेखनीय है कि इस विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के पहले चरण की शुरुआत बिहार राज्य से की गई थी। इस मामले पर पिछले साल 12 अगस्त को देश की सर्वोच्च अदालत ने अंतिम दौर की बहस की शुरुआत की थी। उस समय भी न्यायालय ने अंतरिम टिप्पणी करते हुए साफ कर दिया था कि देश की मतदाता सूची में किसी भी नागरिक का नाम जोड़ना, उसे शामिल करना या किसी वजह से नाम को सूची से बाहर करना पूरी तरह से चुनाव आयोग के संवैधानिक अधिकार क्षेत्र का हिस्सा है और इसमें किसी प्रकार का संदेह नहीं होना चाहिए।

पहचान पत्रों को लेकर भी स्थिति साफ की गई

चुनाव आयोग ने इस विशेष अभियान के तहत तैयार की गई प्रारंभिक मतदाता सूची के मसौदे से लगभग 65 लाख लोगों के नाम हटाए थे, जिसकी पूरी जानकारी बाद में सार्वजनिक की गई थी। इस विशेष पुनरीक्षण की अधिसूचना में यह नियम बनाया गया था कि जिन भी मतदाताओं के नाम साल 2002 या साल 2003 की सरकारी मतदाता सूची में दर्ज नहीं थे, उन्हें उस पुरानी सूची में शामिल किसी व्यक्ति के साथ अपना पारिवारिक या पैतृक संबंध साबित करना अनिवार्य था। अपनी इस कड़ी प्रक्रिया का अदालत में बचाव करते हुए चुनाव आयोग ने एक बेहद महत्वपूर्ण दलील दी थी। आयोग ने कहा था कि किसी भी व्यक्ति के पास मौजूद आधार कार्ड या साधारण मतदाता पहचान पत्र को उसकी नागरिकता का अंतिम और पक्का सबूत नहीं माना जा सकता है। दूसरी तरफ, इसका विरोध करने वाले याचिकाकर्ताओं ने आयोग पर गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि मतदाता सूची को सुधारने के नाम पर चलाई जा रही यह प्रक्रिया असल में ‘राष्ट्रीय नागरिक पंजी’ (एनआरसी) जैसी ही एक कवायद है। याचिकाकर्ताओं के मुताबिक इस प्रक्रिया के जरिए चुनाव आयोग असल में लोगों की नागरिकता की जांच करने की कोशिश कर रहा है, जबकि देश के कानून के अनुसार नागरिकता की जांच करने का यह विशेष अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास सुरक्षित है, न कि चुनाव आयोग के पास। सर्वोच्च अदालत ने अब इन सभी दलीलों को खारिज करते हुए आयोग के फैसले को सही माना है।

ये भी पढ़े : धार भोजशाला मामले में नया मोड़ : हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ मुस्लिम पक्ष पहुंचा सुप्रीम कोर्ट

ताज़ा अपडेट और ब्रेकिंग न्यूज़ के लिए हमारे फेसबुक पेज से जुड़ें और STPV.live के साथ अपडेट रहें

Leave a Reply