गन्ना नियंत्रण कानून

गन्ना नियंत्रण कानून में ऐतिहासिक बदलाव की तैयारी : एथनॉल अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए केंद्र सरकार का नया मसौदा

देश/प्रदेश नई दिल्ली राष्ट्रीय

एजेंसी, दिल्ली। Sugar Cane Law : केंद्र सरकार ने छह दशक पुराने ‘गन्ना नियंत्रण आदेश 1966’ को समाप्त कर एक आधुनिक नियामक ढांचा लागू करने का प्रस्ताव रखा है। इस नए कदम का मुख्य उद्देश्य एथनॉल उत्पादन को बढ़ावा देना और चीनी मिलों की कार्यप्रणाली को डिजिटल युग के अनुरूप बनाना है। सरकार ने इस नए मसौदे पर आम जनता और हितधारकों से 20 मई तक अपनी राय और सुझाव साझा करने का आग्रह किया है। खाद्य मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए ‘गन्ना (नियंत्रण) आदेश 2026’ में पुराने नियमों की मजबूती को कायम रखते हुए भविष्य की जरूरतों को जोड़ा गया है।

किसानों के भुगतान और हितों की सुरक्षा का भरोसा

नए मसौदे में किसानों के हितों को प्राथमिकता दी गई है। इसमें गन्ने के उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) के नियमों को पहले की तरह सख्त रखा गया है। गन्ने की आपूर्ति के 14 दिनों के भीतर किसानों को भुगतान करना अनिवार्य होगा और यदि भुगतान में देरी होती है, तो मिलों को 15 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज देना होगा। इसके अलावा, गन्ने के परिवहन और आवाजाही पर नियंत्रण के पुराने प्रावधानों को भी इस नए ढांचे में शामिल किया गया है, ताकि आपूर्ति श्रृंखला सुचारू बनी रहे।

एथनॉल उत्पादन को मिला नया कानूनी दर्जा

इस बदलाव का सबसे बड़ा आकर्षण एथनॉल को मुख्य गन्ना ढांचे में शामिल करना है। अब ‘चीनी कारखाने’ की परिभाषा को बढ़ा दिया गया है, जिसमें गन्ने के रस, सिरप और मोलासेस से एथनॉल बनाने वाली इकाइयां भी शामिल होंगी। सरकार ने एक विशेष मानक तय किया है जिसके अनुसार 600 लीटर एथनॉल के उत्पादन को एक टन चीनी के बराबर माना जाएगा। जो इकाइयां सीधे गन्ने की पेराई नहीं करतीं और केवल एथनॉल बनाती हैं, उन्हें बैंक गारंटी की शर्तों में कुछ राहत दी गई है, ताकि इस क्षेत्र में निवेश बढ़ सके।

नए कारखानों के लिए कड़े नियम और डिजिटल प्रक्रिया

प्रस्तावित कानून की धारा 6ए से 6जी में कई नए प्रावधान जोड़े गए हैं। अब नए कारखाने खोलने के लिए ऑनलाइन मंजूरी प्रक्रिया (आईईएम) को अनिवार्य बनाया गया है। दो चीनी मिलों के बीच की न्यूनतम दूरी के नियमों को स्पष्ट किया गया है और मिल मालिकों के लिए बैंक गारंटी की राशि बढ़ाकर दो करोड़ रुपये कर दी गई है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि चूंकि पुराना कानून एथनॉल युग से बहुत पहले का था, इसलिए वर्तमान समय की एथनॉल अर्थव्यवस्था को देखते हुए यह सुधार अनिवार्य थे। साथ ही, अब खांडसारी इकाइयों की निगरानी भी पहले से अधिक सख्त की जाएगी।

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