एजेंसी, नई दिल्ली। NSA Imposed In Delhi : देश की राजधानी दिल्ली में कानून और व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने तथा सुरक्षा व्यवस्था को चाक चौबंद रखने के उद्देश्य से प्रशासन ने एक बेहद सख्त और बड़ा कदम उठाया है। दिल्ली सरकार के गृह विभाग ने नेशनल सिक्योरिटी एक्ट यानी राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत एक विशेष अधिसूचना जारी की है। इस आदेश के लागू होने के बाद राजधानी में सुरक्षा का परिदृश्य पूरी तरह से बदल जाएगा। उपराज्यपाल के सख्त निर्देशों के बाद जारी किए गए इस विशेष आदेश के अंतर्गत दिल्ली के पुलिस कमिश्नर को असीमित और बेहद कड़े अधिकार सौंप दिए गए हैं। अब पुलिस प्रशासन किसी भी ऐसे संदिग्ध व्यक्ति या असामाजिक तत्व को तुरंत हिरासत में ले सकेगा, जिससे समाज की शांति या राज्य की सुरक्षा को किसी भी प्रकार का खतरा महसूस हो। यह कड़ा फैसला राजधानी की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पुलिस के पास पर्याप्त कानूनी शक्तियां मौजूद रहें।
A routine quarterly renewal of powers under the National Security Act (NSA) has been falsely linked to the ongoing CJP protests.
The renewal predates the protests and is part of the standard administrative process.
Citizens are advised to rely only on official information and… pic.twitter.com/t50ABgZBh0
— Delhi Police (@DelhiPolice) July 23, 2026
राजपत्र में अधिसूचना जारी और समय सीमा
राजधानी के प्रशासनिक कामकाज का आधिकारिक लेखा जोखा रखने वाले दिल्ली गजट एक्स्ट्राऑर्डिनरी में इस महत्वपूर्ण फैसले को 15 जुलाई 2026 को प्रकाशित कर दिया गया है। जारी किए गए सरकारी आदेश के अनुसार, पुलिस कमिश्नर को दी गई यह विशेष डिटेनिंग अथॉरिटी अगले 3 महीनों की अवधि के लिए पूरी तरह से प्रभावी रहेगी। प्रशासन ने इसके लिए समय सीमा भी स्पष्ट कर दी है, जिसके तहत यह कड़ा कानून 19 जुलाई 2026 से लेकर 18 अक्टूबर 2026 तक राजधानी में लागू रहेगा। इन 3 महीनों के दौरान पुलिस प्रशासन पूरी मुस्तैदी के साथ काम करेगा और किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत और सख्त कानूनी कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगा। इस अवधि को राजधानी की सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पुलिस कमिश्नर की शक्तियां और गिरफ्तारी के नियम
इस नए आदेश के प्रभावी होने के बाद दिल्ली के पुलिस कमिश्नर के अधिकारों में भारी इजाफा हो गया है। राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के प्रावधानों के अनुसार, अगर पुलिस कमिश्नर को यह पक्का अंदेशा हो जाता है कि कोई विशेष व्यक्ति या समूह राज्य की सुरक्षा व्यवस्था के लिए खतरा बन सकता है, या फिर पब्लिक ऑर्डर यानी सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ने की कोशिश कर सकता है, तो उसे तुरंत गिरफ्तार किया जा सकता है। इसके अलावा, अगर कोई व्यक्ति आम जनता के लिए जरूरी आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति में बाधा डालने का प्रयास करता है, तो पुलिस उसे बिना किसी औपचारिक चार्जशीट या आरोप पत्र के सीधे हिरासत में ले सकती है। यह प्रावधान पुलिस को असामाजिक तत्वों पर त्वरित प्रहार करने की अद्भुत शक्ति प्रदान करता है।
कानूनी प्रावधान और गृह विभाग के निर्देश
यह पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया साल 1980 में बने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के कठोर नियमों के आधार पर संचालित की जा रही है। उपराज्यपाल ने इस विशेष कानून की धारा 3 की उपधारा 3 तथा धारा 2 के खंड ई के तहत मिली अपनी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए धारा 3 के अंतर्गत निरुद्ध करने यानी डिटेन करने का यह विशेष अधिकार सीधे पुलिस कमिश्नर को सौंप दिया है। दिल्ली सरकार के गृह विभाग के उप सचिव रमेश कुमार के हस्ताक्षर से जारी इस राजपत्र आदेश को उपराज्यपाल के नाम से तत्काल प्रभाव से लागू करने के कड़े निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का स्पष्ट मानना है कि इस सख्त कानून के लागू होने से राजधानी में अपराध और असामाजिक गतिविधियों पर पूरी तरह से लगाम कसी जा सकेगी और आम नागरिक खुद को अधिक सुरक्षित महसूस कर सकेंगे।
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