एजेंसी, दिल्ली। Sonia Gandhi House Congress Meeting : संसद के आगामी मानसून सेशन को लेकर देश की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ बेहद आक्रामक रुख अपनाने की पूरी तैयारी कर ली है। इसी सिलसिले में कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी के आधिकारिक निवास 10 जनपथ पर एक बेहद महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय स्ट्रेटेजिक मीटिंग बुलाई गई। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी संसद सत्र के दौरान सरकार को जनहित से जुड़े विभिन्न ज्वलंत मुद्दों पर चौतरफा घेरने के लिए एक मजबूत रोडमैप तैयार करना था। इस बैठक में विपक्षी दलों के साथ बेहतर तालमेल बिठाने और संसद के दोनों सदनों में सरकार को जवाबदेह बनाने के लिए कड़ा रुख अपनाने पर विस्तार से चर्चा की गई ताकि विपक्षी एकता की ताकत को मजबूती से प्रदर्शित किया जा सके।
Chanda Chori – Astha se Dhoka, Paper leaks and the systemic corrossion of education system, institutional capture, breaking of political parties, multiple scams and charges of corruption, backbreaking price rise, foreign policy failures and strategic blunders, the imposition of… pic.twitter.com/JxKiCTxyPj
— Mallikarjun Kharge (@kharge) July 16, 2026
सोनिया गांधी के आवास 10 जनपथ पर जुटे कांग्रेस के शीर्ष दिग्गज नेता
इस अत्यंत महत्वपूर्ण बैठक में कांग्रेस पार्टी के तमाम शीर्ष स्तर के दिग्गज नेता और रणनीतिकार शामिल हुए। बैठक की अध्यक्षता स्वयं कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने की। इस अहम चर्चा में उनके साथ कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, पार्टी के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल और राज्यसभा में कांग्रेस के मुख्य सचेतक जयराम रमेश विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक के दौरान इस बात पर गहन मंथन हुआ कि संसद के मानसून सेशन में किस तरह से विपक्षी गठबंधन इंडिया के अन्य सहयोगी दलों के साथ मिलकर सदन के भीतर और बाहर सरकार पर दबाव बनाया जाए। नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि जनता से जुड़े मुद्दों को बिना किसी समझौते के बेहद प्रखरता के साथ संसद के पटल पर रखा जाना चाहिए।
पेपर लीक और राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी जैसे बड़े मुद्दों पर आर-पार की जंग
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस रणनीतिक बैठक के संपन्न होने के बाद सोशल मीडिया के माध्यम से पार्टी के प्रमुख एजेंडे को सार्वजनिक किया। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि कांग्रेस इस बार देश की जनता से जुड़े संवेदनशील मुद्दों पर सरकार को कोई ढील देने के मूड में नहीं है। पार्टी द्वारा तैयार किए गए मुद्दों की सूची में अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए चढ़ावे की कथित चोरी का मामला सबसे ऊपर रखा गया है। इसके अलावा देश के करोड़ों युवाओं और छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले विभिन्न सरकारी परीक्षाओं के पेपर लीक मामले तथा देश की जर्जर होती शिक्षा व्यवस्था की वर्तमान स्थिति पर भी सरकार से तीखे सवाल पूछे जाएंगे। कांग्रेस का आरोप है कि देश के महत्वपूर्ण स्वायत्त संस्थानों की स्वतंत्रता को लगातार कमजोर किया जा रहा है और पार्टी इस मुद्दे को संसद में बहुत ही आक्रामक तरीके से उठाएगी।
एथनॉल मिश्रण नीति और देश के वंचित वर्गों के अधिकारों की रक्षा का उठेगा मुद्दा
इसके साथ ही कांग्रेस पार्टी ने देश की आर्थिक और पर्यावरणीय नीतियों को लेकर भी सरकार को कटघरे में खड़ा करने की रणनीति बनाई है। बैठक में यह तय किया गया कि सरकार की वर्तमान एथनॉल ब्लेंडिंग नीति में बरती जा रही कथित अनियमितताओं और जंगलों की अंधाधुंध कटाई से पर्यावरण को हो रहे नुकसान के खिलाफ आवाज उठाई जाएगी। इसके अलावा देश में लगातार बढ़ती बेकाबू महंगाई, बेरोजगारी, वर्तमान विदेश नीति की विफलताएं और अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग तथा अल्पसंख्यक समुदायों के अधिकारों और कल्याण से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर भी सरकार को संसद के भीतर घेरा जाएगा। कांग्रेस इन सभी गंभीर राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार से संसद के पटल पर जवाबदेही और स्पष्टीकरण की मांग करेगी।
20 जुलाई से शुरू होने जा रहा है संसद का गर्मागर्म मानसून सत्र
देश की संसद का यह बहुप्रतीक्षित मानसून सत्र आगामी 20 जुलाई 2026 से प्रारंभ होने की पूरी संभावना है, जो 13 अगस्त 2026 तक निरंतर रूप से चल सकता है। इस महत्वपूर्ण सत्र के शुरू होने से पहले विपक्षी दलों के गठबंधन इंडिया की भी एक साझा बैठक आयोजित होने की उम्मीद है, जिसमें सरकार के खिलाफ एकजुट होकर साझा रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा। दूसरी ओर, सरकार ने भी संसद के इस मानसून सत्र को सुचारू रूप से चलाने और विभिन्न महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने के उद्देश्य से रविवार को एक सर्वदलीय बैठक आमंत्रित की है। ऐसे में यह साफ दिखाई दे रहा है कि आगामी मानसून सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और एकजुट विपक्ष के बीच देश के नीतिगत मुद्दों पर बेहद तीखी और ऐतिहासिक बहस देखने को मिल सकती है।
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