एजेंसी, जबलपुर। RDVV Convocation : देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू रविवार को मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक शहर जबलपुर में स्थित प्रसिद्ध रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के 36वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। इस बेहद गरिमामय और विशेष शैक्षणिक उत्सव के दौरान महामहिम राष्ट्रपति ने अपने कर-कमलों से विभिन्न शैक्षणिक संकायों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले और एक से ज्यादा गोल्ड मेडल जीतने वाले 20 सबसे मेधावी छात्र-छात्राओं को मंच पर बुलाकर स्वर्ण पदक और डिग्रियां प्रदान कीं। इस भव्य समारोह के दौरान कुल मिलाकर 141 प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को अलग-अलग विषयों में 240 स्वर्ण पदकों का वितरण किया गया। इसके साथ ही उच्च शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट शोध कार्य पूरा करने वाले 182 शोधार्थियों को भी उनकी पीएचडी सहित अन्य उच्च उपाधियां आधिकारिक तौर पर सौंपी गईं। इस ऐतिहासिक दीक्षांत समारोह के मंच पर मध्य प्रदेश के महामहिम राज्यपाल मंगू भाई पटेल, प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, उच्च शिक्षा विभाग के मंत्री इंदर सिंह परमार सहित सूबे के कई अन्य वरिष्ठ मंत्री और विधायक गण पूरे समय आदरपूर्वक उपस्थित रहे।
LIVE: राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी के मुख्य आतिथ्य में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय, जबलपुर में आयोजित 36वां दीक्षांत समारोह https://t.co/WDMK5lFn9I
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) June 21, 2026
शिक्षित युवाओं से वंचित और जनजातीय समाज के कल्याण में योगदान की अपील
इस ऐतिहासिक दीक्षांत समारोह के मुख्य सत्र को संबोधित करते हुए देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने देश के युवा वर्ग और नए डिग्री धारकों के सामने एक बहुत ही महत्वपूर्ण विचार रखा। उन्होंने कहा कि आज के आधुनिक युग में देश के शिक्षित युवाओं की यह सबसे बड़ी जिम्मेदारी है कि वे अपने आस-पास रहने वाले गरीब, वंचित, ग्रामीण और विशेष रूप से जनजातीय समुदायों की बुनियादी व्यावहारिक समस्याओं को गहराई से समझने की कोशिश करें। युवाओं को इन पिछड़े क्षेत्रों के नागरिकों की जरूरतों के हिसाब से नए और सस्ते तकनीकी समाधान तैयार करने चाहिए ताकि इन वर्गों को भी देश के तेज आधुनिक विकास की मुख्यधारा के साथ मजबूती से जोड़ा जा सके। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि जनजातीय समाज की अपनी एक विशिष्ट पहचान, अनूठी लोक संस्कृति, प्राचीन परंपराएं और सामाजिक अस्मिता है, जिसे हर हाल में सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है। इसके बिना हमारा आधुनिक विकास अधूरा माना जाएगा।
पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक शोध के अनूठे संगम पर दिया जोर
राष्ट्रपति ने अपने व्याख्यान में आगे विस्तार से समझाते हुए कहा कि देश के जनजातीय समाजों के पास जो भी अद्भुत हुनर, सदियों पुराना पारंपरिक ज्ञान और कलात्मक शिल्प मौजूद है, उसे आज की आधुनिक शिक्षा प्रणाली, नए वैज्ञानिक नवाचारों और उच्च स्तरीय शोध कार्यों के साथ जोड़ने की बहुत ज्यादा जरूरत है। इस बड़े और महत्वपूर्ण काम को अमलीजामा पहनाने की दिशा में देश के बड़े-बड़े विश्वविद्यालयों और अन्य अग्रणी शिक्षण संस्थानों को काफी आगे आकर विशेष रचनात्मक प्रयास करने होंगे। इन संस्थानों को मिलकर जनजातीय ज्ञान परंपरा का एक पूरी तरह से व्यवस्थित और वैज्ञानिक अध्ययन शुरू करना चाहिए ताकि उनकी इस प्राचीन बुद्धिमत्ता का सीधा लाभ हमारे पूरे आधुनिक समाज और देश के अंतिम व्यक्ति तक बहुत ही आसानी से पहुंचाया जा सके।
विश्वविद्यालय के नवाचारों और बेटियों की शानदार कामयाबी की जमकर तारीफ
समारोह के मुख्य मंचीय कार्यक्रम की शुरुआत करने से पहले महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने पूरी श्रद्धा के साथ विश्वविद्यालय के मुख्य परिसर में स्थापित महान वीरांगना रानी दुर्गावती की भव्य प्रतिमा के समक्ष जाकर उन्हें अपने श्रद्धासुमन और पुष्पांजलि अर्पित की। इसके बाद उन्होंने अपने मुख्य भाषण में विश्वविद्यालय प्रबंधन द्वारा अपनी शिक्षा व्यवस्था में भारतीय ज्ञान परंपरा को विभिन्न पाठ्यक्रमों का हिस्सा बनाने, नए छात्रों में नवाचार यानी इनोवेशन को बढ़ावा देने और परिसर में बने विशेष डिजाइन इनोवेशन सेंटर के जरिए कई महत्वपूर्ण शोधों का सरकारी पेटेंट हासिल करने जैसे शानदार प्रयासों की खुलकर सराहना की। राष्ट्रपति ने समारोह के अंत में विशेष रूप से खुशी जाहिर करते हुए कहा कि आज इस दीक्षांत समारोह में स्वर्ण पदक हासिल करने वाले विद्यार्थियों की सूची में हमारी देश की बेटियों की संख्या बेटों के मुकाबले काफी ज्यादा है। यह सुखद तस्वीर देश में तेजी से बढ़ रहे महिला सशक्तिकरण और बदलते हुए एक बेहद आधुनिक एवं सकारात्मक भारत की असली पहचान को पूरी दुनिया के सामने गर्व से प्रस्तुत करती है।
ताज़ा अपडेट और ब्रेकिंग न्यूज़ के लिए हमारे फेसबुक पेज से जुड़ें और STPV.live के साथ अपडेट रहें


