एजेंसी, नई दिल्ली। Indian Navy Ships : भारतीय नौसेना ने देश की रक्षा प्रणाली को पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में रविवार को एक बेहद ऐतिहासिक और बड़ा मील का पत्थर पार कर लिया है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति में पश्चिम बंगाल के कोलकाता शहर में आयोजित एक भव्य और विशेष सैन्य समारोह के दौरान तीन अत्याधुनिक स्वदेशी युद्धपोतों—आईएनएस दूनागिरी, आईएनएस संशोधक, और आईएनएस अग्रय को औपचारिक रूप से भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल यानी कमीशन कर दिया गया। पूरी तरह से ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत देश में ही निर्मित किए गए ये तीनों शक्तिशाली समुद्री प्लेटफॉर्म न केवल समंदर में भारत की सैन्य ताकत को कई गुना ज्यादा बढ़ा देते हैं, बल्कि रक्षा क्षेत्र में देश की लगातार बढ़ती तकनीकी आत्मनिर्भरता का भी एक अटूट प्रमाण पेश करते हैं।
Today in Kolkata, INS Dunagiri, INS Sanshodhak and INS Agray were commissioned. They reflect India’s growing maritime capabilities, our commitment to safeguarding national interests across the seas and the remarkable strides being made towards self-reliance in defence… pic.twitter.com/hWyD7ePH2W
— Narendra Modi (@narendramodi) June 21, 2026
आईएनएस दूनागिरी: नौसेना का नया ‘ब्रह्मास्त्र’ और अचूक स्टेल्थ तकनीक
परियोजना-17ए के तहत बहुत ही सूझबूझ से तैयार किया गया आईएनएस दूनागिरी एक बेहद घातक और आधुनिक स्टेल्थ गाइडेड मिसाइल फ्रिगेट है। इस महाविनाशक युद्धपोत का नाम हिमालय की पर्वत श्रृंखलाओं में स्थित पवित्र द्रोणागिरी पर्वत के नाम पर रखा गया है, जिसे भारतीय संस्कृति में हनुमान जी की अपार शक्ति, दृढ़ता और अदम्य साहस का प्रतीक माना जाता है। लगभग 6700 टन के भारी-भरकम वजन वाला यह युद्धपोत दुनिया की सबसे खतरनाक ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल, बराक-8 मिसाइल और पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से निर्मित वरुणास्त्र टॉरपीडो जैसी घातक प्रणालियों से पूरी तरह लैस है। इस युद्धपोत की सबसे अनूठी और बड़ी विशेषता इसकी आधुनिक स्टेल्थ बनावट है, जिसकी वजह से इसका रडार क्रॉस-सेक्शन बेहद कम हो जाता है। यह खूबी इसे दुश्मन देश के रडारों की नजरों से पूरी तरह ओझल रखकर समंदर में बेहद सटीक और गुप्त हमला करने की अद्भुत क्षमता प्रदान करती है।
आईएनएस संशोधक: समंदर की असीम गहराइयों का आधुनिक अनुसंधानकर्ता
सर्वे वेसल लार्ज यानी बड़े सर्वेक्षण जहाजों की विशेष श्रेणी में निर्मित यह चौथा शक्तिशाली जहाज, आईएनएस संशोधक, समंदर के भीतर एक चलती-फिरती आधुनिक प्रयोगशाला की तरह काम करेगा। इस विशेष जहाज का मुख्य और प्राथमिक उद्देश्य समंदर के भीतर के रास्तों की सटीक मैपिंग करना, हाइड्रोग्राफिक सर्वेक्षणों को अंजाम देना और नौसेना के लिए जरूरी समुद्री डेटा को एकत्रित करना है। तकनीकी रूप से बेहद सक्षम यह जहाज बिना रुके लगातार 12000 किलोमीटर तक की लंबी समुद्री यात्रा करने की क्षमता रखता है। यह जहाज न केवल भारतीय नौसेना को समंदर के भीतर की रणनीतिक जानकारियां देगा, बल्कि इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापारिक मार्गों को पूरी तरह सुरक्षित रखने और किसी भी प्राकृतिक आपदा के समय राहत कार्यों के प्रबंधन में एक बेहद महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा।
आईएनएस अग्रय: दुश्मन की पनडुब्बियों को तबाह करने वाला घातक ‘गांडीव’
आईएनएस अग्रय एक अत्यंत आक्रामक और घातक एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट है, जिसे उथले पानी में दुश्मन का शिकार करने के लिए बनाया गया है। इस जहाज का आधिकारिक प्रतीक चिन्ह महाभारत काल में वीर अर्जुन के पास रहने वाले पौराणिक ‘गांडीव’ धनुष से पूरी तरह प्रेरित है, जो अपनी अचूक मारक क्षमता के लिए इतिहास में जाना जाता है। इस छोटे मगर बेहद खतरनाक युद्धपोत में अत्याधुनिक सोनार पहचान प्रणालियां, हल्के वजन वाले उन्नत टॉरपीडो और भारी रॉकेट लॉन्चर लगाए गए हैं, जो तटीय इलाकों के आस-पास छिपकर बैठी दुश्मन देश की पनडुब्बियों का तुरंत पता लगाकर उन्हें पानी के भीतर ही नष्ट करने में सक्षम हैं। लगभग 25 नॉट की तेज रफ्तार से समंदर की लहरों को चीरने वाला यह जहाज भारत की तटीय सुरक्षा के लिए एक अभेद्य और मजबूत कवच साबित होने वाला है।
भारत की भविष्य की समुद्री रणनीति और हिंद महासागर में बढ़ता दबदबा
वर्तमान समय की बात की जाए तो भारतीय नौसेना के पास लगभग 140 से 145 सक्रिय और पूरी तरह तैयार युद्धपोत मौजूद हैं, और रक्षा मंत्रालय ने साल 2030 तक इस बेड़े की कुल संख्या को बढ़ाकर 160 के पार ले जाने का एक बेहद बड़ा और महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। भारत के लिए अपनी समुद्री सीमाओं की सुरक्षा करना बेहद अनिवार्य है, क्योंकि भारत के कुल वैश्विक व्यापार का लगभग 90 प्रतिशत से भी ज्यादा का बड़ा हिस्सा केवल और केवल समुद्री मार्गों के जरिए ही पूरा किया जाता है। ऐसे में इन तीन नए स्वदेशी जहाजों के नौसेना में शामिल होने से पूरे हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक स्थिति और धाक पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा सुदृढ़ और मजबूत हो जाएगी।
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