एजेंसी, जबलपुर। Jabalpur Yoga Day : योग दर्शन के महान प्रणेता महर्षि पतंजलि की पावन कर्मभूमि और पुण्यसलिला मां नर्मदा के पावन तट पर बसी संस्कारधानी जबलपुर रविवार को 12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के एक बेहद भव्य और ऐतिहासिक आयोजन का मुख्य केंद्र बनी। शहर के सदर इलाके में स्थित सेना के विशाल गैरिसन ग्राउंड में राज्य स्तरीय मुख्य समारोह का आयोजन अत्यंत गरिमामय तरीके से संपन्न हुआ। इस गौरवशाली और बड़े उत्सव में देश की प्रथम नागरिक राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, मध्य प्रदेश के महामहिम राज्यपाल मंगूभाई पटेल और सूबे के यशस्वी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक साथ शिरकत की। इन सभी शीर्ष नेताओं ने वहां उपस्थित हजारों आम नागरिकों, छात्र-छात्राओं और योग साधकों के साथ बैठकर सामूहिक रूप से विभिन्न आसनों का अभ्यास किया और पूरी मानव जाति को एक स्वस्थ, निरोगी तथा अनुशासित जीवन जीने का एक बेहद मजबूत संदेश दिया।
योग के रूप में भारत ने विश्व को मानवता के कल्याण का अमूल्य उपहार प्रदान किया है…
12वें अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आज आदरणीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु जी के मुख्य आतिथ्य एवं माननीय राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल जी की गरिमामयी उपस्थिति में जबलपुर में आयोजित राज्य… pic.twitter.com/kxq09hnNro
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) June 21, 2026
गरिमामय समारोह में जुटे प्रदेश के कई बड़े राजनेता और विदेशी मेहमान
इस भव्य और ऐतिहासिक योग महोत्सव में राज्य सरकार के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, उच्च शिक्षा विभाग के मंत्री इंदर सिंह परमार, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रह्लाद पटेल और लोक निर्माण विभाग के मंत्री राकेश सिंह सहित समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े अनेक जनप्रितिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी और सैन्य अधिकारी पूरे समय उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम की सबसे खूबसूरत और खास बात यह देखने को मिली कि इसमें बहुत बड़ी संख्या में स्कूली छात्र-छात्राएं, युवा वर्ग, घरेलू महिलाएं, बुजुर्ग नागरिक और योग के प्रति अगाध प्रेम रखने वाले आम लोग सुबह-सुबह ही मैदान में जमा हो गए थे। केवल देश के नागरिक ही नहीं, बल्कि सात समंदर पार से आए कई विदेशी सैलानी और मेहमान भी इस ऐतिहासिक भारतीय उत्सव के साक्षी बने और उन्होंने भारत की इस प्राचीन विधा की जमकर सराहना की। जैसे ही राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का आगमन कार्यक्रम स्थल पर हुआ, वहां पहले से मौजूद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने फूलों के गुलदस्ते देकर उनका आत्मीय स्वागत किया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने आदरपूर्वक राष्ट्रपति और राज्यपाल को पारंपरिक शॉल ओढ़ाकर और स्मृति चिन्ह भेंट कर उन्हें सम्मानित किया। इसके तुरंत बाद राष्ट्रगान की मधुर धुन गूंजी और पूरे सम्मान के साथ सामूहिक योगाभ्यास के मुख्य सत्र की शुरुआत की गई।
पूरी मानवता को आपस में जोड़ने और एक सूत्र में पिरोने का माध्यम है योग
इस पावन अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बेहद गौरव के साथ कहा कि इस साल के अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की मुख्य विषय वस्तु यानी थीम ‘योग फॉर वन अर्थ, वन हेल्थ’ रखी गई है। यह अनूठी थीम पूरी दुनिया के देशों को आपसी समन्वय, उत्तम स्वास्थ्य, मानसिक शांति और वैश्विक कल्याण का एक बहुत बड़ा संदेश दे रही है। उन्होंने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अथक और दूरदर्शी प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उनके प्रयासों की बदौलत ही भारत की इस प्राचीन पद्धति को आज पूरे विश्व में एक नई और मजबूत पहचान हासिल हुई है। यही वजह है कि आज दुनिया के 200 से भी अधिक देशों में करोड़ों लोग योग को अपनाकर अपने जीवन को संवार रहे हैं। मुख्यमंत्री ने आगे विस्तार से समझाते हुए कहा कि योग केवल शरीर को मोड़ने या कुछ शारीरिक अभ्यासों तक सीमित कोई क्रिया नहीं है, बल्कि यह महान भारतीय संस्कृति की एक ऐसी प्राचीन और समृद्ध परंपरा है जो पूरी मानवता को बिना किसी भेदभाव के आपस में जोड़ने का महान कार्य करती है। उन्होंने योग के आदि गुरु भगवान शिव, महर्षि पतंजलि और भारत की महान ऋषि परंपरा का पूरे आदर के साथ स्मरण करते हुए मध्य प्रदेश की पावन धरती को योग, अध्यात्म और कठिन आध्यात्मिक साधना का एक ऐतिहासिक केंद्र बताया।
मानसिक संतुलन और आत्मिक उन्नति के लिए योग को दिनचर्या में अपनाएं
कार्यक्रम के दौरान मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई पटेल ने भी वहां उपस्थित लोगों को संबोधित किया। उन्होंने अपने प्रेरणादायक वक्तव्य में कहा कि योग केवल शरीर को तंदुरुस्त रखने का साधन नहीं है, बल्कि यह एक स्वस्थ शरीर के निर्माण, मानसिक संतुलन को बनाए रखने और मनुष्य की आत्मिक उन्नति का सबसे सटीक और प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कार्यक्रम में आए सभी नागरिकों और देश की जनता से एक विशेष अपील करते हुए कहा कि हमें योग को केवल साल में एक दिन मनाए जाने वाले किसी औपचारिक उत्सव या आयोजन तक ही सीमित नहीं रख देना चाहिए। इसके बजाय हम सभी को यह दृढ़ संकल्प लेना चाहिए कि हम योग की इन कल्याणकारी क्रियाओं और प्राणायाम को अपने रोजमर्रा के जीवन की दिनचर्या का एक अनिवार्य हिस्सा बनाएंगे ताकि एक स्वस्थ समाज का निर्माण हो सके।
वर्तमान दौर की जटिल चुनौतियों और मानसिक तनाव का एकमात्र समाधान है योग
समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अत्यंत प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मां नर्मदा की इस अत्यंत पवित्र और ऐतिहासिक धरती पर आकर उन्हें एक असीम मानसिक शांति और विशेष आनंद की अनुभूति हो रही है। उन्होंने भारत के गौरवशाली इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि योग हमारी भारत भूमि की हजारों साल पुरानी एक ऐसी अनमोल और महान धरोहर है, जो आज के इस आधुनिक युग में भी पूरी दुनिया के इंसानों को एक पूरी तरह से स्वस्थ, संतुलित, तनावमुक्त और सार्थक जीवन जीने का सच्चा रास्ता दिखा रही है। वर्तमान समय में जब पूरी दुनिया तमाम तरह की जटिल शारीरिक बीमारियों, मानसिक तनावों और विभिन्न प्रकार की भावनात्मक चुनौतियों का सामना कर रही है, ऐसे कठिन दौर में योग मनुष्य को न केवल शारीरिक रूप से मजबूत बनाता है बल्कि उसे आंतरिक मानसिक शांति और गहरा भावनात्मक संतुलन प्रदान करके पूरी मानवता के कल्याण का मार्ग साफ कर रहा है। राष्ट्रपति ने योग के महत्व को रेखांकित करते हुए आगे कहा कि नियमित योगाभ्यास हर एक व्यक्ति को उसकी बढ़ती उम्र के पड़ाव में भी पूरी तरह से सक्रिय, आत्मनिर्भर, फुर्तीला और सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर बनाए रखने में बहुत बड़ी मदद करता है। इस भव्य कार्यक्रम के अंतिम चरण में राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने सभी आम और खास योग साधकों के साथ जमीन पर बैठकर काफी देर तक विभिन्न प्राणायाम और योगासनों का पूरे नियम के साथ अभ्यास किया। गैरिसन ग्राउंड के इस पूरे परिसर में हजारों लोगों ने एक सुर और एक लय में योग करके पूरी दुनिया को अच्छे स्वास्थ्य, शारीरिक फिटनेस और एक सकारात्मक जीवन शैली अपनाने का एक बेहद प्रभावशाली संदेश दिया।
ताज़ा अपडेट और ब्रेकिंग न्यूज़ के लिए हमारे फेसबुक पेज से जुड़ें और STPV.live के साथ अपडेट रहें


