एजेंसी, परभणी। Maharashtra Accident : महाराष्ट्र के परभणी जनपद से एक अत्यंत हृदयविदारक समाचार सामने आया है, जहां शनिवार की दोपहर को एक धार्मिक स्थल पर चल रहा निर्माण कार्य अचानक काल बन गया। क्षेत्र के प्रसिद्ध यशवाड़ी देवस्थान में स्थित हनुमान मंदिर परिसर में निर्माणाधीन सभा मंडप का ऊपरी हिस्सा अचानक भरभराकर नीचे गिर गया। इस दर्दनाक हादसे के वक्त मंदिर परिसर में भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे जो मलबे के नीचे दब गए। इस भीषण दुर्घटना में अब तक सात लोगों की असमय मृत्यु हो गई है, जबकि पच्चीस अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। सभी घायलों को उपचार के लिए तुरंत नजदीकी चिकित्सालयों में भर्ती कराया गया है, जहां कुछ की स्थिति अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है।
𝐔𝐧𝐝𝐞𝐫-𝐂𝐨𝐧𝐬𝐭𝐫𝐮𝐜𝐭𝐢𝐨𝐧 𝐓𝐞𝐦𝐩𝐥𝐞 𝐌𝐢𝐬𝐡𝐚𝐩 𝐂𝐥𝐚𝐢𝐦𝐬 𝐅𝐢𝐯𝐞 𝐋𝐢𝐯𝐞𝐬 𝐢𝐧 #𝐌𝐚𝐡𝐚𝐫𝐚𝐬𝐡𝐭𝐫𝐚‘𝐬 𝐏𝐚𝐫𝐛𝐡𝐚𝐧𝐢; 𝐒𝐞𝐯𝐞𝐫𝐚𝐥 𝐈𝐧𝐣𝐮𝐫𝐞𝐝
At least five devotees died and around sixteen others were critically injured in an accident at a temple… pic.twitter.com/1Y1LTCT511
— All India Radio News (@airnewsalerts) June 20, 2026
शनिवार के चलते लगी थी लंबी कतार, प्रसाद वितरण के दौरान हुआ भयावह हादसा
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना दोपहर लगभग तीन बजे के आसपास घटित हुई। शनिवार का पावन दिन होने के कारण मारुति नंदन के दर्शन के लिए सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ था। दोपहर की आरती संपन्न होने के बाद मंदिर के ठीक सामने बन रहे नए सभा मंडप के नीचे बड़ी संख्या में लोग कतार में खड़े होकर भगवान का प्रसाद ग्रहण कर रहे थे। इसी दौरान अचानक लोहे की छड़ों, बल्लियों और भारी पत्थरों से बना सेंट्रिंग का ढांचा पूरी तरह से असंतुलित होकर ढह गया। अचानक हुए इस हादसे के कारण वहां मौजूद लोगों को संभलने या भागने का तनिक भी अवसर नहीं मिला और पलक झपकते ही खुशियों का माहौल चीख-पुकार में बदल गया। इस पूरी घटना का एक विचलित करने वाला वीडियो भी वहां लगे सुरक्षा कैमरों में कैद हो गया है।
प्रशासनिक अमले के पहुंचने से पहले स्थानीय ग्रामीणों ने संभाला मोर्चा
हादसे के तुरंत बाद मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में पूरी तरह से अफरा-तफरी का माहौल व्याप्त हो गया। प्रशासनिक सुरक्षा टीमों और राहत दलों के दुर्घटनास्थल पर पहुंचने से पहले ही वहां उपस्थित अन्य श्रद्धालुओं और स्थानीय ग्रामीणों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए राहत और बचाव का कार्य अपने हाथों में ले लिया। मलबे का वजन अत्यधिक होने के कारण लोगों ने हाथों से ही भारी पत्थरों और लोहे के ढांचों को हटाना प्रारंभ किया ताकि नीचे दबे लोगों को जीवित निकाला जा सके। प्रत्यक्षदर्शियों का अनुमान है कि शुरुआत में लगभग चालीस से अधिक लोग इस भारी मलबे के नीचे पूरी तरह दबे हुए थे, जिन्हें बाहर निकालने के लिए बाद में आई सरकारी सहायता और मशीनों का सहारा लिया गया।
भारी मशीनों और विभिन्न विभागों की सहायता से पूरा हुआ बचाव कार्य
घटना की सूचना प्राप्त होते ही जिला प्रशासन अत्यंत सक्रिय हो गया। जिला कलेक्टर संजय चव्हाण, उपमंडल अधिकारी संगीता चव्हाण और तहसीलदार पांडुरंग माछेवाड़ सहित भारी पुलिस बल तुरंत मौके पर पहुंचा। मलबे को तेजी से हटाने के लिए मिट्टी खोदने वाली मशीनों (जेसीबी) को कार्य में लगाया गया। आपदा प्रबंधन विभाग की विशेषज्ञ टीम, पथरी क्षेत्र का अग्निशमन दस्ता, लोक निर्माण विभाग के अभियंता, जिला स्वास्थ्य अधिकारी और नगर निगम के चिकित्सा दलों ने स्थानीय ग्रामीणों के साथ मिलकर संयुक्त रूप से एक बड़ा बचाव अभियान चलाया। एम्बुलेंस की सहायता से घायलों को तुरंत अस्पताल भेजा गया और कई घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद मलबे को पूरी तरह से साफ कर रेस्क्यू ऑपरेशन को समाप्त घोषित किया गया।
चार सौ वर्ष पुराना है त्रिमूर्ति हनुमान मंदिर का गौरवशाली इतिहास
जिस यशवाड़ी देवस्थान में यह दुखद घटना घटी, उसका ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व बेहद खास माना जाता है। मनवत तालुका रोड पर छत्रपति संभाजीनगर से लगभग एक सौ नब्बे किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस त्रिमूर्ति मंदिर का इतिहास करीब चार शताब्दियों पुराना है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, पूर्व में एक समय ऐसा भी आया था जब किन्हीं कारणों से यह पूरा गांव पूरी तरह से उजड़ गया था और सभी निवासी इस स्थान को छोड़कर चले गए थे, परंतु संकटमोचन का यह पावन मंदिर अपनी जगह पर अडिग खड़ा रहा। यहाँ स्थापित हनुमान जी की दिव्य काली प्रतिमा के प्रति संपूर्ण क्षेत्र के लोगों में अगाध श्रद्धा है।
भव्यता विस्तार की योजना के बीच घटित हुई यह अनहोनी
हाल के वर्षों में श्रद्धालुओं की लगातार बढ़ती संख्या और धार्मिक पर्यटन को देखते हुए मंदिर न्यास द्वारा इस परिसर को और अधिक विशाल तथा भव्य रूप देने का कार्य किया जा रहा था। इसी योजना के अंतर्गत आने वाले भक्तों के बैठने और कीर्तन-भजन के लिए एक बड़े सभा मंडप का निर्माण कार्य प्रगति पर था। चूंकि यह मंडप पूरी तरह से भारी पत्थरों की नक्काशी से तैयार किया जा रहा था, इसलिए जब इसका ढांचा गिरा तो पत्थरों की चोट के कारण लोगों को गंभीर चोटें आईं। फिलहाल प्रशासन इस बात की जांच में जुट गया है कि निर्माण कार्य में किसी प्रकार की लापरवाही या घटिया सामग्री का उपयोग तो नहीं किया गया था।
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