एजेंसी, नई दिल्ली। Ram Mandir Donation Scam : अयोध्या के नवनिर्मित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दान-चढ़ावे की राशि में कथित भारी चोरी और करोड़ों के गबन के आरोपों को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत ने सोमवार को अत्यंत कड़ा रुख अख्तियार किया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस बहुचर्चित और संवेदनशील मामले में आधिकारिक रूप से संज्ञान लेते हुए राम मंदिर के प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालने वाले ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ को औपचारिक नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा मामले की जांच के लिए गठित किए गए विशेष जांच दल (एसआईटी) से अब तक की जांच प्रगति की पूरी स्टेटस रिपोर्ट भी तलब कर ली है।
#BREAKING Ayodhya Ram Mandir Donation Theft : Supreme Court Issues Notice To Union, UP & Temple Trust On Pleas Seeking CBI Probe |@DebbyJain
SC sought a status report from the SIT.#SupremeCourt #Ayodhya #RamMandir https://t.co/f5oTyEou62
— Live Law (@LiveLawIndia) July 13, 2026
केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार से मांगा गया स्पष्ट जवाब
सर्वोच्च न्यायालय में कई जनहित याचिकाएं दायर की गई थीं, जिनमें राम मंदिर निर्माण और दर्शनार्थियों द्वारा दिए गए चंदे व चढ़ावे में बड़े स्तर पर हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं की एक स्वतंत्र एजेंसी से अथवा सीधे सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच कराने की पुरजोर मांग की गई थी। इन याचिकाओं पर प्रारंभिक सुनवाई करते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की एक विशेष खंडपीठ ने केंद्र सरकार और उत्तर प्रदेश की राज्य सरकार को नोटिस जारी किए हैं। पीठ ने दोनों सरकारों से पूछा है कि इतने बड़े आस्था के केंद्र में वित्तीय कुप्रबंधन के आरोपों से निपटने के लिए उन्होंने क्या ठोस कदम उठाए हैं।
एसआईटी के गठन और अब तक की प्रगति का मांगा विस्तृत ब्यौरा
मामले की सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार के अधिवक्ताओं को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि अदालत राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी को अपनी विस्तृत जांच स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट के पटल पर सौंपने का आदेश देती है। अदालत ने विशेष रूप से यह भी निर्देश दिया है कि जो स्टेटस रिपोर्ट पेश की जाएगी, उसमें इस बात का भी पूरा और स्पष्ट ब्यौरा शामिल होना चाहिए कि इस एसआईटी का गठन कब और किन शर्तो के साथ किया गया था, तथा इसमें कौन-कौन से अधिकारी शामिल हैं। यह आदेश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दान-चढ़ावा चोरी के इस मामले में अब तक 8 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और तीन सदस्य ट्रस्ट से अपना इस्तीफा दे चुके हैं।
20 जुलाई को होगी मामले की अगली महत्वपूर्ण सुनवाई
खंडपीठ ने इस मामले की गंभीरता और देशवासियों की आस्था को ध्यान में रखते हुए इस पर आगे की विस्तृत सुनवाई के लिए अगले सोमवार, यानी 20 जुलाई 2026 की तारीख निर्धारित की है। अदालत ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भी निर्देश दिया है कि वह सुनवाई की अगली तारीख से पहले याचिकाओं में लगाए गए गबन और चोरी के गंभीर आरोपों पर अपना आधिकारिक पक्ष और हलफनामा अदालत में दाखिल करे। अब सभी की नजरें एसआईटी की स्टेटस रिपोर्ट और ट्रस्ट के जवाब पर टिकी हैं कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था से जुड़े इस मंदिर में दान राशि के प्रबंधन की वास्तविक सच्चाई क्या है।
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