एजेंसी, ऑकलैंड। PM Modi New Zealand visit : वैश्विक कूटनीति और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की भू-राजनीति में एक नया और अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय जुड़ गया है। भारत और न्यूजीलैंड ने एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए अपने द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के सर्वोच्च स्तर पर पहुंचाने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। दोनों देशों ने मिलकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा सहयोग को अभूतपूर्व रूप से सुदृढ़ करने के लिए एक अत्यंत व्यापक और दूरगामी कार्ययोजना यानी रोडमैप तैयार करने का संकल्प लिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी तीन देशों की राजकीय यात्रा के अत्यंत महत्वपूर्ण और अंतिम चरण में शुक्रवार को न्यूजीलैंड की आर्थिक राजधानी ऑकलैंड पहुंचे, जहां न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने हवाई अड्डे पर प्रोटोकॉल तोड़कर उनका बेहद गर्मजोशी और आत्मीयता से स्वागत किया। इस अभूतपूर्व स्वागत ने दोनों देशों के बीच की गहरी प्रगाढ़ता को दर्शाया और खुद प्रधानमंत्री मोदी भी इस स्वागत से बेहद भावुक हो उठे, जिसका विशेष उल्लेख उन्होंने बाद में आधिकारिक वार्ता के दौरान अपने संबोधन में भी किया। इंडोनेशिया और ऑस्ट्रेलिया के बाद अब न्यूजीलैंड के साथ यह गठजोड़ भारत की मजबूत विदेश नीति का एक बड़ा प्रमाण है।
My gratitude to PM Luxon, the Government and people of New Zealand for the exceptional warmth during this fruitful visit.
This visit, the first by an Indian Prime Minister in four decades, has opened an important new chapter in our relations. Our decision to elevate ties to a… pic.twitter.com/gCLPniBIe9
— Narendra Modi (@narendramodi) July 11, 2026
द्विपक्षीय वार्ताओं का सफल दौर और दस बड़े समझौतों पर मुहर
ऑकलैंड में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों के बीच कई दौर की उच्च स्तरीय और सघन आधिकारिक वार्ताएं संपन्न हुईं। इन बैठकों के परिणाम बेहद सकारात्मक रहे और दोनों देशों ने आपसी सहयोग को नई दिशा देने के लिए कुल 10 महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए और 8 बड़ी कूटनीतिक घोषणाएं कीं। कुल मिलाकर 18 महत्वपूर्ण परिणाम सामने आए हैं। इन सभी घोषणाओं और समझौतों का सबसे प्रमुख बिंदु दोनों देशों के आपसी संबंधों को रणनीतिक साझेदारी का दर्जा देना रहा। इस ऐतिहासिक दर्जे को धरातल पर उतारने और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की रूपरेखा तय करने के लिए दोनों पक्षों ने मिलकर भारत-न्यूजीलैंड रणनीतिक साझेदारी: रोडमैप टू 2030 को अपनी अंतिम मंजूरी दे दी है। इस महायोजना के माध्यम से दोनों लोकतांत्रिक देश आने वाले वर्षों में रक्षा, सुरक्षा, व्यापार, संस्कृति और जन-जन के आपसी जुड़ाव को एक नए और आधुनिक ढांचे में ढालने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध दिखाई दे रहे हैं।
साल 2030 तक व्यापार को दोगुना कर 35000 करोड़ करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य
आर्थिक मोर्चे पर दोनों देशों ने एक बेहद साहसिक और महत्वाकांक्षी कदम उठाते हुए अपने द्विपक्षीय व्यापार को साल 2030 तक दोगुना करने का बड़ा लक्ष्य निर्धारित किया है। वर्तमान व्यापारिक गतिविधियों को नई गति प्रदान करते हुए इसे 35000 करोड़ रुपये तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया है। दोनों देश वर्तमान में एक व्यापक मुक्त व्यापार समझौते पर अत्यंत सक्रियता से काम कर रहे हैं और उद्योग जगत का मानना है कि दोनों देशों की आर्थिक क्षमताओं को देखते हुए यह लक्ष्य आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुक्त व्यापार समझौते को दोनों देशों के आर्थिक इतिहास में एक युगांतकारी घटना और गेम चेंजर बताया। उन्होंने ऑकलैंड में चुनिंदा मुख्य कार्यकारी अधिकारियों और उद्योग जगत के शीर्ष प्रतिनिधियों के साथ एक विशेष बैठक की, जिसमें उन्होंने रेखांकित किया कि भारत की तीव्र आर्थिक वृद्धि, विशाल युवा और कुशल कार्यबल, तेजी से बढ़ता मध्यम वर्ग और निरंतर जारी आर्थिक सुधार न्यूजीलैंड की कंपनियों के लिए निवेश के असीमित द्वार खोलते हैं।
समुद्री सुरक्षा और नौसैनिक रसद सहायता के लिए ऐतिहासिक रक्षा गठबंधन
रक्षा और सुरक्षा के मोर्चे पर दोनों देशों के बीच हुए समझौते बेहद दूरगामी परिणाम देने वाले हैं। भारत के रक्षा मंत्रालय और न्यूजीलैंड रक्षा बल के बीच समुद्री सहयोग को लेकर एक विशेष समझौता किया गया है, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आपसी संवाद, रणनीतिक समन्वय, सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान और संयुक्त सैन्य गतिविधियों को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा। इसके साथ ही समुद्र विज्ञान और नौवहन मानचित्रण के क्षेत्र में भी आपसी सहयोग की एक ठोस व्यवस्था की गई है, जिससे दोनों देशों की नौसेनाएं मिलकर नौवहन चार्टों का संयुक्त उत्पादन कर सकेंगी और समुद्री डेटा को साझा कर क्षमता निर्माण को बढ़ावा देंगी। एक और मील का पत्थर साबित होने वाला समझौता दोनों नौसेनाओं के बीच पारस्परिक रसद सहायता व्यवस्था की मंजूरी है। इसके तहत भविष्य में किसी भी सैन्य अभियान या गश्त के दौरान दोनों देशों के बल एक-दूसरे को रसद, ईंधन और अन्य आवश्यक सामग्रियां अत्यंत सुगमता से उपलब्ध करा सकेंगे, जिससे दोनों देशों की परिचालन क्षमता में भारी वृद्धि होगी।
आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त मोर्चा और खालिस्तानी गतिविधियों पर भारत की चिंता
बदलते वैश्विक परिदृश्य में सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए भारत और न्यूजीलैंड ने आतंकवाद विरोधी सहयोग को मजबूत करने के लिए एक विशेष संयुक्त कार्य समूह की स्थापना करने का बड़ा फैसला किया है। यह कदम भारत के लिए रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि पिछले कुछ समय से न्यूजीलैंड की धरती पर खालिस्तान समर्थकों की बढ़ती गतिविधियों और संख्या को लेकर भारत कूटनीतिक स्तर पर चिंतित रहा है। इस नए संयुक्त समूह के गठन के बाद दोनों देशों की खुफिया and सुरक्षा एजेंसियां आतंकवाद के खतरों, कट्टरपंथ और आंतरिक सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों से निपटने के लिए आपस में रीयल-टाइम सूचनाएं साझा कर सकेंगी और अधिक प्रभावी ढंग से समन्वय स्थापित कर सकेंगी। इसके अतिरिक्त दोनों देशों ने विदेश मंत्रियों के बीच नियमित अंतराल पर संवाद आयोजित करने और हर साल वरिष्ठ अधिकारियों की बैठकों की व्यवस्था को भी संस्थागत रूप से मजबूत करने का निर्णय लिया है।
कृषि, डेयरी विज्ञान और उभरती प्रौद्योगिकियों में निवेश का खुला आमंत्रण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने न्यूजीलैंड के दिग्गज निवेशकों और उद्योगपतियों को भारत के विकास की यात्रा में भागीदार बनने के लिए सीधे तौर पर आमंत्रित किया। उन्होंने विशेष रूप से बुनियादी ढांचे के विकास, नागरिक उड्डयन, लॉजिस्टिक्स, स्वच्छ ऊर्जा, शहरी परिवहन, जल प्रबंधन, कचरा प्रबंधन और डिजिटल अर्थव्यवस्था जैसे आधुनिक क्षेत्रों में निवेश का आह्वान किया। भारत के विशाल और तेजी से बढ़ते स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने दोनों देशों के निजी क्षेत्रों से वित्तीय तकनीक और उभरती प्रौद्योगिकियों में सहयोग बढ़ाने की अपील की। पीएम मोदी ने कहा कि डेयरी विज्ञान, बागवानी और वानिकी के क्षेत्र में न्यूजीलैंड के पास दुनिया की सर्वश्रेष्ठ विशेषज्ञता है, जबकि भारत के पास एक विशाल उपभोक्ता बाजार, फूड पार्क और कृषि तकनीक से जुड़ी बेहतरीन प्रतिभाएं हैं। ये दोनों मिलकर एक अत्यंत मजबूत वैश्विक खाद्य मूल्य श्रृंखला का निर्माण कर सकते हैं, जो पूरी दुनिया के लिए फायदेमंद साबित होगी।
चालीस साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का दौरा और तीस साल पुराने मफलर की भावुक कहानी
यह यात्रा ऐतिहासिक रूप से इसलिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले 40 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह न्यूजीलैंड की पहली आधिकारिक यात्रा है। इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान ऑकलैंड में प्रवासी भारतीय समुदाय द्वारा प्रधानमंत्री के सम्मान में किया ओरा मोदी नामक एक भव्य और रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में जब प्रधानमंत्री मोदी मंच पर पहुंचे, तो वहां मौजूद हजारों प्रवासी भारतीयों ने तालियों की गड़गड़ाहट और मोदी-मोदी के गगनभेदी नारों के साथ उनका स्वागत किया। मंच पर उनके साथ न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन भी गर्व से खड़े थे। इसी मंच से प्रधानमंत्री मोदी ने अपने जीवन की एक बेहद निजी और भावुक याद साझा की। उन्होंने अपने पास सहेज कर रखा हुआ एक पुराना मफलर जनता को दिखाया और बताया कि करीब 25 से 30 साल पहले, जब वे सार्वजनिक जीवन के शीर्ष पर नहीं थे और एक साधारण नागरिक के रूप में न्यूजीलैंड घूमने आए थे, तब उन्हें यह मफलर उपहार में मिला था। उन्होंने इस मफलर को तीन दशकों से एक अनमोल धरोहर की तरह संभाल कर रखा है, जो न्यूजीलैंड के प्रति उनके गहरे लगाव को दर्शाता है।
वैश्विक पटल पर भारत का नया विकास मॉडल और अटूट मित्रता का संकल्प
प्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने वैश्विक मंदी और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के बीच भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति का लोहा मनवाया। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि आज तमाम वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में मजबूती से स्थापित है और विश्व के सामने विकास का एक बिल्कुल नया मॉडल पेश कर रहा है। उन्होंने डिजिटल क्रांति का उदाहरण देते हुए कहा कि आज भारत में एकीकृत भुगतान इंटरफेस के माध्यम से हर महीने अरबों के डिजिटल लेनदेन हो रहे हैं, जिसने विकसित देशों को भी आश्चर्यचकित कर दिया है। इसके साथ ही देश अब ड्रोन तकनीक और अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भी नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। प्रधानमंत्री ने अंत में कहा कि भारत और न्यूजीलैंड के साझा लोकतांत्रिक मूल्य और दो समुद्री देश होना उन्हें एक स्वाभाविक साझेदार बनाता है। यह संबंध मेड फॉर ईच अदर जैसा है, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि के हमारे साझा लक्ष्यों को हासिल करने में नई ऊर्जा भरने का काम करेगा। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री लक्सन ने भी सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि भारत के साथ यह रणनीतिक साझेदारी दोनों देशों के गहरे संबंधों को एक नई ऐतिहासिक ऊंचाई पर ले जाएगी और नया समुद्री सुरक्षा संवाद क्षेत्र को सुरक्षित बनाने में बड़ी भूमिका निभाएगा।
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