एजेंसी, जम्मू। Ganderbal Bus Accident : जम्मू और कश्मीर के गांदरबल जिले में मंगलवार की सुबह एक बड़ा सड़क हादसा देखने को मिला है। पवित्र अमरनाथ गुफा में बाबा बर्फानी के दर्शन करके वापस लौट रहे श्रद्धालुओं से भरी एक बस अचानक अपना संतुलन खो बैठी और सीधे एक रिहायशी मकान के ऊपर जा गिरी। इस भयानक बस दुर्घटना में करीब 39 तीर्थयात्री घायल हो गए हैं। गनीमत यह रही कि इस भयंकर क्रैश में किसी भी यात्री की जान को कोई गंभीर खतरा नहीं है और सभी को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। हादसे के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा बलों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू कर दिया था। एंबुलेंस के जरिए सभी घायलों को तुरंत पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां डॉक्टरों की सीनियर टीम उनका लगातार चेकअप कर रही है और मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार सभी की हालत पूरी तरह से खतरे से बाहर बताई जा रही है।
Ganderbal, Jammu & Kashmir: A Yatri bus reportedly skidded off the road at Hariganiwan in Ganderbal. CRPF personnel from 118 Battalion, ITBP, and Civil Police carried out rescue operations and shifted the injured to Kangan Hospital. A total of 31 yatris were injured and referred… pic.twitter.com/KKh82RAJgR
— IANS (@ians_india) July 28, 2026
खतरनाक घुमावदार रास्ते पर कैसे हुआ यह भयंकर बस क्रैश
प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस से मिली शुरुआती जानकारी के मुताबिक यह दर्दनाक दुर्घटना गांदरबल जिले के गुंड इलाके में घटित हुई। जब यह टूरिस्ट बस पहाड़ों की तेज ढलान से नीचे की तरफ उतर रही थी तभी एक बेहद खतरनाक और संकरे मोड़ पर ड्राइवर स्टेरिंग से अपना नियंत्रण पूरी तरह से खो बैठा। तेज ढलान और तीखे मोड़ की वजह से बस सड़क से नीचे की तरफ बुरी तरह फिसल गई और गहरी खाई में जाने के बजाय सीधे सड़क के नीचे बने एक घर की छत पर क्रैश हो गई। जिस वक्त यह मेजर एक्सीडेंट हुआ उस समय बस के अंदर बैठे पैसेंजर्स के बीच भारी चीख पुकार मच गई। शोर सुनकर आसपास के लोकल लोग तुरंत मदद के लिए दौड़े और पुलिस कंट्रोल रूम को भी इमरजेंसी की सूचना दी गई। पहाड़ी रास्तों पर ड्राइविंग हमेशा से ही एक बड़ा चैलेंज रहता है और थोड़ी सी भी तकनीकी खराबी बहुत बड़े हादसे का कारण बन जाती है।
सुरक्षाबलों और लोकल लोगों का कामयाब जॉइंट रेस्क्यू मिशन
जैसे ही इस इमरजेंसी का अलर्ट जारी हुआ वैसे ही जम्मू कश्मीर पुलिस की पेट्रोलिंग टीम तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गई। उनके साथ ही इंडियन तिब्बत बॉर्डर पुलिस यानी आईटीबीपी, सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स यानी सीआरपीएफ और भारतीय सेना के जवानों ने भी मौके पर पहुंचकर पूरा मोर्चा अपने हाथों में ले लिया। सुरक्षाबलों ने स्थानीय निवासियों की मदद से बिना कोई समय बर्बाद किए बस के अंदर फंसे लोगों को निकालने के लिए एक बड़ा जॉइंट रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। जवानों ने बस के टूटे हुए शीशे और दरवाजे काटकर एक एक करके सभी 39 पैसेंजर्स को सुरक्षित बाहर निकाला। घटनास्थल पर ही सभी को जरूरी फर्स्ट ऐड देने के बाद फौरन नजदीकी मेडिकल सेंटर भेजा गया। इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान सेना और पैरा मिलिट्री फोर्सेज के जवानों ने जिस प्रोफेशनल तरीके से काम किया उसकी वजह से एक बहुत बड़ी त्रासदी को समय रहते टाल दिया गया।
लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा ने लिया हालात का त्वरित जायजा
जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इस दुर्भाग्यपूर्ण बस एक्सीडेंट की खबर मिलते ही गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने तुरंत गांदरबल के डिप्टी कमिश्नर और स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों के साथ फोन पर बातचीत की और ग्राउंड जीरो के पूरे हालात का जायजा लिया। उपराज्यपाल ने मीडिया को बताया कि सभी 39 घायल श्रद्धालुओं को बेहतरीन मेडिकल फैसिलिटी मुहैया कराने के लिए उन्हें स्किम्स अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया है। उन्होंने अस्पताल के वरिष्ठ डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को सख्त निर्देश दिए हैं कि इन सभी तीर्थयात्रियों के इलाज और देखभाल में किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं आनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने बाबा बर्फानी से प्रार्थना की है कि सभी घायल श्रद्धालु जल्द से जल्द पूरी तरह से रिकवर हो जाएं और बिना किसी परेशानी के सुरक्षित अपने घरों को लौट सकें।
पवित्र अमरनाथ यात्रा के वर्तमान आंकड़े और ट्रेकिंग रूट्स
आपको बता दें कि इस साल श्री अमरनाथ यात्रा की शुरुआत 2 जुलाई को पूरे जोश और भारी उत्साह के साथ हुई थी। यह पवित्र और ऐतिहासिक यात्रा 28 अगस्त तक लगातार चलेगी जो कुल 57 दिनों का लंबा सफर तय करेगी। श्राइन बोर्ड के सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक 4.15 लाख से भी अधिक शिवभक्त बाबा बर्फानी के पवित्र शिवलिंग के दर्शन सफलतापूर्वक कर चुके हैं। समुद्र तल से लगभग 3880 मीटर की भारी ऊंचाई पर मौजूद इस रहस्यमयी गुफा तक पहुंचने के लिए भक्त मुख्य रूप से दो अलग अलग रास्तों का इस्तेमाल करते हैं। इनमें से पहला नुनवान पहलगाम का बेस कैंप रूट है जो लगभग 48 किलोमीटर लंबा और पुराना पारंपरिक रास्ता है। वहीं दूसरा रास्ता बालटाल बेस कैंप से होकर गुजरता है जिसकी कुल दूरी तो केवल 14 किलोमीटर है लेकिन इसकी चढ़ाई बहुत ज्यादा सीधी और जोखिम से भरी है। सुरक्षा एजेंसियां यात्रा के आखिरी दिन तक सभी पिलग्रिम्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हाई अलर्ट पर हैं।
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