एजेंसी, दिल्ली। NEET Row Lok Sabha Adjourned : मानसून सत्र के दौरान भारतीय संसद में नीट परीक्षा में हुई कथित धांधली का मुद्दा पूरी तरह से गरमाया हुआ है। देश के सबसे बड़े सदन में इस विषय को लेकर लगातार भारी हंगामा देखने को मिल रहा है। विपक्ष के कड़े विरोध और नारेबाजी के कारण लोकसभा की कार्यवाही को 2 बार रोकना पड़ा और अंततः इसे पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया। पिछले 4 दिनों से सदन में कोई भी महत्वपूर्ण कामकाज नहीं हो पा रहा है। विपक्षी दल लगातार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और पुलिस द्वारा छात्रों पर किए गए लाठीचार्ज के विरोध में अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। वहीं सत्ता पक्ष का कहना है कि वे हर प्रकार की चर्चा के लिए पूरी तरह से तैयार हैं, लेकिन विपक्ष जानबूझकर कार्यवाही में बाधा डालकर देश का समय बर्बाद कर रहा है।
#MonsoonSession2026 #LokSabha adjourned till 11:00AM on 24.07.2026@ombirlakota @LokSabhaSectt @loksabhaspeaker pic.twitter.com/xPLIoYhiVx
— SansadTV (@sansad_tv) July 23, 2026
विपक्ष की मांग और स्पीकर के साथ हुई विशेष बैठक
विपक्षी खेमा इस बात पर अड़ा हुआ है कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री अपना पद नहीं छोड़ते, तब तक सदन में कोई भी सार्थक बातचीत संभव नहीं है। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के नेता लगातार सरकार पर भारी दबाव बना रहे हैं। इस बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच विपक्ष के प्रमुख चेहरे राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से उनके कक्ष में जाकर बहुत अहम मुलाकात की। इस विशेष बैठक में तृणमूल कांग्रेस की नेता महुआ मोइत्रा और सौगत राय भी उपस्थित थे। स्पीकर ने सभी नेताओं से आग्रह किया था कि वे चर्चा का समय और स्वरूप तय करने के लिए उनसे मिलें। हालांकि सदन के अंदर जब प्रश्नकाल शुरू हुआ, तो विपक्षी सांसदों ने अपनी मांगों को लेकर वेल में आकर भारी नारेबाजी शुरू कर दी, जिसके चलते कामकाज पूरी तरह से ठप पड़ गया।
संसदीय कार्य मंत्री की विपक्ष से भावुक अपील
सदन में लगातार हो रहे शोरगुल के बीच सरकार की ओर से संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मोर्चा संभाला। उन्होंने दोनों हाथ जोड़कर विपक्षी सांसदों से निवेदन किया कि वे सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलने दें और नीट के इस बेहद संवेदनशील मुद्दे पर विस्तृत चर्चा में भाग लें। मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि सरकार किसी भी दिन, किसी भी समय और कितनी भी लंबी बहस के लिए पूरी तरह से तैयार है। उन्होंने विपक्ष पर निशाना साधते हुए यह भी कहा कि चर्चा से पहले शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की शर्त रखना महज बहाना है, जिसका असली मकसद बातचीत से दूर भागना है। रिजिजू ने बताया कि सत्ताधारी गठबंधन के सभी सहयोगी दल भी चाहते हैं कि जिन जिन राज्यों में परीक्षा के पेपर लीक हुए हैं, उन सभी मामलों पर संसद के पटल पर खुलकर और पारदर्शी तरीके से बात होनी चाहिए।
प्रधानमंत्री का सख्त संदेश और फास्ट ट्रैक कोर्ट का फैसला
इस पूरे गतिरोध के बीच देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी गुरुवार की सुबह कड़ा और स्पष्ट संदेश जारी किया है। उन्होंने देश के युवाओं और छात्रों को आश्वस्त किया है कि उनके भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने साफ तौर पर कहा है कि नीट परीक्षा में हुई गड़बड़ी के दोषियों को जल्द से जल्द और कड़ी से कड़ी सजा दिलाने के लिए सरकार फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन करने जा रही है। सरकार का यह कदम दर्शाता है कि वह इस राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में हुई अनियमितताओं को लेकर बेहद गंभीर है और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शने के मूड में नहीं है।
दिनभर चला सदन के स्थगन का सिलसिला
गुरुवार को लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही हंगामे की भेंट चढ़ गई। सुबह जब सांसदों ने शोर मचाना शुरू किया, तो स्पीकर ओम बिरला ने कार्यवाही को 12 बजे तक के लिए रोक दिया। इसके बाद जब दोपहर 2 बजे दोबारा सदन की कार्यवाही शुरू हुई, तो पीठासीन सभापति दिलीप सैकिया ने सांसदों से नियम 377 के तहत जनहित के मुद्दे उठाने का आग्रह किया। उन्होंने विपक्षी सदस्यों को समझाने का प्रयास किया कि सरकार चर्चा के लिए तैयार है, इसलिए सदन को बाधित करना सही नहीं है। लेकिन विपक्ष अपनी मांग पर अडिग रहा और शोरगुल थमता ना देखकर पीठासीन सभापति ने मात्र 3 मिनट बाद ही सदन को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया। इस प्रकार मानसून सत्र के शुरुआती 4 दिन बिना किसी प्रश्नकाल, शून्यकाल या विधायी कामकाज के पूरी तरह से बर्बाद हो गए।
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