Chaitanya Baghel

छत्तीसगढ़ शराब घोटाला : पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य को सर्वोच्च न्यायालय से राहत, ईडी और राज्य सरकार की याचिकाएं खारिज

छत्तीसगढ़ देश/प्रदेश

एजेंसी, नई दिल्ली/रायपुर। Chhattisgarh Liquor Scam Chaitanya Baghel : छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित कथित शराब घोटाले से जुड़े मामलों में प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल को सर्वोच्च न्यायालय से बहुत बड़ी कानूनी राहत प्राप्त हुई है। सर्वोच्च न्यायालय की तीन सदस्यीय पीठ ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) और राज्य सरकार की उन याचिकाओं को पूरी तरह से निरस्त कर दिया, जिनमें चैतन्य बघेल को प्रदान की गई जमानत को रद्द करने की मांग की गई थी। शीर्ष अदालत के इस फैसले से जहां एक ओर चैतन्य बघेल की व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर मंडराता संकट टल गया है, वहीं दूसरी ओर जमानत के फैसलों को चुनौती देने की जांच एजेंसियों की आदत पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं

जमानत रद्द कराने की प्रवृत्ति पर सर्वोच्च न्यायालय की तल्ख टिप्पणी

भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए जमानत फैसलों के खिलाफ लगातार अपीलें दायर करने के एजेंसियों के रवैये पर गहरी चिंता प्रकट की। सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि केवल तकनीकी खामियों या कानूनी आधारों की आड़ लेकर किसी अभियुक्त की स्वतंत्रता को छीनना उचित नहीं है और इस परिपाटी पर गंभीरता से विचार किए जाने की आवश्यकता है। हालांकि, शीर्ष अदालत ने छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय द्वारा राज्य पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) के विरुद्ध अपने आदेश में की गई प्रतिकूल टिप्पणियों को न्यायिक रिकॉर्ड से हटाने का आदेश दिया है

‘समानता का अधिकार’ और उच्च न्यायालय के पूर्व आदेश के तर्क

इससे पहले 2 जनवरी को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के न्यायाधीश अरविंद कुमार वर्मा की एकल पीठ ने चैतन्य बघेल को ईडी तथा ईओडब्ल्यू दोनों ही प्रकरणों में जमानत प्रदान की थी। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में रेखांकित किया था कि इस कथित मामले के मुख्य आरोपितों—जैसे अनवर ढेबर, अनिल टुटेजा और अरविंद सिंह—को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पहले ही जमानत दी जा चुकी है। ऐसी स्थिति में चैतन्य बघेल को लंबे समय तक हिरासत में रखना संविधान द्वारा प्रदत्त समानता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन होगा। इसके अलावा, उच्च न्यायालय ने यह भी माना था कि मामले से जुड़े अधिकांश साक्ष्य दस्तावेजी प्रकृति के हैं और धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा 50 के अंतर्गत दर्ज बयानों की सत्यता की जांच मुकदमे की सुनवाई के दौरान ही संभव है

3,500 करोड़ रुपये का कथित घोटाला और गिरफ्तारी की पृष्ठभूमि

उल्लेखनीय है कि प्रवर्तन निदेशालय ने चैतन्य बघेल को जुलाई में तथा राज्य की आर्थिक अपराध शाखा ने सितंबर में गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसियों का दावा था कि वर्ष 2019 से 2022 की अवधि के दौरान छत्तीसगढ़ में हुए इस कथित शराब घोटाले के माध्यम से सरकारी खजाने को भारी राजस्व हानि पहुंचाई गई और लगभग 3,500 करोड़ रुपये का वित्तीय भ्रष्टाचार हुआ। एजेंसियों ने चैतन्य बघेल को इस पूरे तंत्र का एक प्रमुख साजिशकर्ता बताते हुए उन पर करोड़ों रुपये की अवैध धनराशि प्राप्त करने का आरोप लगाया था। हालांकि, बचाव पक्ष की दलीलों और लंबी न्यायिक प्रक्रिया के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय के जमानत के आदेश को पूरी तरह से न्यायसंगत ठहराते हुए बरकरार रखा है

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