NITI Aayog Meeting

नीति आयोग की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बड़ा बयान, कहा- वैश्विक उथल-पुथल के बीच अटूट विश्वास के साथ प्रगति पथ पर अग्रसर है भारत

नई दिल्ली राष्ट्रीय

एजेंसी, नई दिल्ली। NITI Aayog Meeting : देश की राजधानी दिल्ली में गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गरिमामयी अध्यक्षता में नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल की एक बेहद महत्वपूर्ण और उच्चस्तरीय बैठक संपन्न हुई। इस महाबैठक में देश के तमाम राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों, उपमुख्यमंत्रियों, उपराज्यपालों, वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों समेत नीति आयोग के आला अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों का हवाला दिया और कहा कि आज जब पूरी दुनिया राजनीतिक और आर्थिक रूप से भारी अनिश्चितता और अस्थिरता के दौर से गुजर रही है, तब हमारा भारत पूरे आत्मविश्वास, दृढ़ संकल्प और मजबूती के साथ विकास के रास्ते पर आगे कदम बढ़ा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब हम आने वाले वर्षों में ‘विकसित भारत’ के अपने महान सपने को हकीकत में बदलने की तरफ बढ़ रहे हैं, तो केंद्र सरकार और सभी राज्य सरकारों की सामूहिक जिम्मेदारी पहले से कहीं ज्यादा बढ़ जाती है। इस बार की बैठक इसलिए भी खास रही क्योंकि तमिलनाडु, कर्नाटक और पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद वहां के नए मुख्यमंत्री पहली बार इस राष्ट्रीय नीति निर्धारक मंच का हिस्सा बने।

केंद्र और राज्यों के बीच मजबूत टीम वर्क पर प्रधानमंत्री का जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन के दौरान संघवाद की भावना को मजबूत करने और केंद्र तथा राज्यों के बीच आपसी सहयोग को एक नए स्तर पर ले जाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि देश के चहुंमुखी विकास के लिए दोनों पक्षों के बीच लगातार बातचीत, संवाद का आदान-प्रदान और आपसी तालमेल होना बेहद जरूरी है। पीएम ने रेखांकित किया कि नीति आयोग महज एक संस्था नहीं है, बल्कि यह केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग और समन्वय स्थापित करने के लिए एक बेहद सशक्त और साझा मंच के तौर पर अपनी बड़ी भूमिका निभा सकता है। उन्होंने सभी मुख्यमंत्रियों से अपील की कि वे राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर राष्ट्र निर्माण के एक ही विजन पर मिलकर काम करें ताकि देश की प्रगति की रफ्तार को और तेज किया जा सके।

युवा शक्ति और वैश्विक व्यापार के अवसरों को भुनाने की जरूरत

देश की जनसांख्यिकी शक्ति यानी डेमोग्राफिक डिविडेंड की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के पास इस समय युवाओं की जो विशाल आबादी है, वह हमारे इतिहास का एक ऐसा सुनहरा और ऐतिहासिक मौका है जिसे हम किसी भी कीमत पर गंवा नहीं सकते हैं। आज के समय में हमारे देश के युवाओं को बेहतरीन और आधुनिक शिक्षा देना, उन्हें नए जमाने के कौशल से लैस करना और रोजगार के नए इकोसिस्टम का निर्माण करना ही सरकारों की सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए, क्योंकि यही सशक्त और आत्मनिर्भर युवा हमारे विकसित भारत की यात्रा के असली कर्णधार बनेंगे। इसके साथ ही उन्होंने राज्यों को जानकारी दी कि भारत सरकार ने वैश्विक बाजार में देश के निर्यात और व्यापार को बढ़ाने के लिए दुनिया के कई बड़े देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी मुक्त व्यापार समझौते किए हैं। यह नीतियां देश के छोटे और मध्यम उद्योगों यानी एमएसएमई के लिए एक बहुत बड़ा वैश्विक अवसर हैं, जिससे वे अंतरराष्ट्रीय मानकों को अपनाकर दुनिया के बाजारों में अपनी धाक जमा सकते हैं।

महिला नेतृत्व और उनके सशक्तिकरण से मजबूत होगी देश की नींव

देश की तरक्की में आधी आबादी के अभूतपूर्व योगदान की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि महिलाओं के नेतृत्व में होने वाला विकास ही असल में विकसित भारत के विजन की सबसे मजबूत नींव है। आज देश की बेटियां और महिलाएं खेती-किसानी और नए-नवेले स्टार्टअप से लेकर आधुनिक विज्ञान और अनुसंधान तक हर एक क्षेत्र में अपना परचम लहरा रही हैं और महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। प्रधानमंत्री ने सभी मुख्यमंत्रियों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासकों से विशेष आग्रह किया कि वे अपने-अपने राज्यों में महिलाओं की इस असीम क्षमता और ऊर्जा का पूरा इस्तेमाल करें। इसके लिए उन्होंने राज्य स्तर पर महिलाओं की उच्च शिक्षा, तकनीकी स्किलिंग, सुरक्षा व्यवस्था और समग्र सशक्तिकरण से जुड़ी योजनाओं को प्राथमिक आधार पर लागू करने की आवश्यकता बताई।

विकसित भारत-2047 के संकल्प और नए मुख्यमंत्रियों की भागीदारी पर विशेष ध्यान

इस वर्ष आयोजित हुई नीति आयोग की इस 11वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक का मुख्य एजेंडा और पूरा फोकस ‘विकसित भारत-2047’ के रोडमैप को तैयार करना था, यानी आजादी के 100 वर्ष पूरे होने तक देश को एक पूर्ण विकसित राष्ट्र की श्रेणी में खड़ा करना है। इस रणनीतिक बैठक में राजनीतिक रूप से भी कई नए समीकरण देखने को मिले, जहां कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने पहली बार इस परिषद की बैठक में शिरकत की और अपने-अपने राज्यों की प्रगति और देश के विकास को लेकर अपने महत्वपूर्ण विचार साझा किए।

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