एजेंसी, चंडीगढ़। IDFC First Bank Fraud : प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े 645 करोड़ रुपये के बेहद बहुचर्चित और बड़े फंड गबन घोटाले में एक और बड़ी सफलता हासिल करते हुए एक मुख्य आरोपी को सलाखों के पीछे भेज दिया है। जांच एजेंसी के चंडीगढ़ जोनल कार्यालय ने इस मामले में गहराई से तफ्तीश करते हुए हरियाणा के विकास एवं पंचायत निदेशालय में तत्कालीन सुपरिंटेंडेंट के पद पर तैनात रहे नरेश कुमार को धन शोधन निवारण अधिनियम यानी पीएमएलए के कड़े प्रावधानों के तहत गिरफ्तार कर लिया है। ईडी के वरिष्ठ अधिकारियों का सीधा आरोप है कि नरेश कुमार न केवल सरकारी खातों से गबन की गई इस भारी-भरकम राशि के मुख्य लाभार्थियों में शामिल था, बल्कि वह इस अवैध धन के हेर-फेर, लेन-देन और उसे कानून की नजरों से छिपाने की पूरी साजिश में भी बेहद सक्रिय भूमिका निभा रहा था।
Directorate of Enforcement (ED), Chandigarh Zonal Office has arrested Naresh Kumar, the then superintendent in the office of Director, Development and Panchayat, Haryana on 10.06.2026 in connection with an ongoing investigation in IDFC Bank fraud under the provisions of… pic.twitter.com/My3yNl5Dxz
— IANS (@ians_india) June 11, 2026
विशेष अदालत ने चार दिनों की ईडी रिमांड को दी मंजूरी
जांच एजेंसी द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, नरेश कुमार को 10 जून को लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के तुरंत बाद अगले दिन उन्हें विशेष पीएमएलए अदालत के समक्ष पेश किया गया, जहां ईडी के वकीलों ने घोटाले की तह तक जाने और मनी ट्रेल का पता लगाने के लिए आरोपी की कस्टडी की मांग की। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी नरेश कुमार को 14 जून तक के लिए चार दिनों की ईडी रिमांड पर सौंपने की मंजूरी दे दी है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में यह कोई पहली गिरफ्तारी नहीं है, इससे पहले भी ईडी इस घोटाले की कड़ियों को जोड़ते हुए रिभव ऋषि, अभय कुमार और विक्रम वाधवा जैसे बड़े रसूखदार आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जो वर्तमान समय में जेल की सलाखों के पीछे न्यायिक हिरासत में बंद हैं।
सरकारी और निजी संस्थानों के खातों से 645 करोड़ की भारी हेराफेरी
प्रवर्तन निदेशालय की अब तक की वित्तीय जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। ईडी के अनुसार, इस पूरे रैकेट के जरिए हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ प्रशासन और चंडीगढ़ तथा पंचकूला इलाके के दो नामचीन निजी स्कूलों के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक खातों को निशाना बनाया गया था। इन सभी वीआईपी और सरकारी खातों से योजनाबद्ध तरीके से कुल 645 करोड़ रुपये की विशाल राशि की अवैध हेराफेरी की गई। जांच एजेंसी का दावा है कि इस पूरे संगठित अपराध और नेटवर्क को अंजाम देने में विक्रम वाधवा, रिभव ऋषि, अभय कुमार के साथ-साथ बैंक के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और चुनिंदा सरकारी कर्मचारियों की आपस में गहरी मिलीभगत थी, जिन्होंने पद का दुरुपयोग कर जनता के पैसे पर डाका डाला।
कागजी शेल कंपनियों के जाल और लेयरिंग के जरिए घुमाया गया पैसा
घोटाले की गई इस विशाल रकम को ठिकाने लगाने और कानून की आंखों में धूल झोंकने के लिए आरोपियों ने कई फर्जी और कागजी कंपनियों यानी शेल कंपनियों का एक जटिल जाल तैयार किया हुआ था। जांच में मुख्य रूप से स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स, कैपको फिनटेक सर्विसेज, आरएस ट्रेडर्स और एसआरआर प्लानिंग गुरुस प्राइवेट लिमिटेड जैसी संदिग्ध संस्थाओं और फर्मों के नाम उजागर हुए हैं। ईडी का आरोप है कि सरकारी और स्कूल के खातों से निकाली गई करोड़ों की राशि को सबसे पहले इन शेल कंपनियों के बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया। इसके बाद, बैंकिंग प्रणाली के भीतर ही पैसे को कई स्तरों पर अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करके ‘लेयरिंग’ की गई, ताकि जांच एजेंसियों को धन के मुख्य स्रोत और उसके मालिक का पता लगाने में भारी मशक्कत करनी पड़े।
आरोपी नरेश कुमार और उनके परिवार के खातों में पहुंचे करोड़ों रुपये
ईडी के जांच अधिकारियों ने नरेश कुमार की भूमिका को लेकर बेहद पुख्ता सबूत मिलने का दावा किया है। वित्तीय लेन-देन के दस्तावेजों के मुताबिक, नरेश कुमार को सीधे तौर पर स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स नामक फर्जी फर्म के खाते से मोटी रकम ट्रांसफर की गई थी। इसके अलावा, तकनीकी जांच में यह भी प्रमाणित हुआ है कि नरेश कुमार और उनके सगे पारिवारिक सदस्यों के विभिन्न बैंक खातों में करीब 1.20 करोड़ रुपये की अवैध राशि जमा की गई थी। केंद्रीय एजेंसी का यह भी कहना है कि केवल डिजिटल या बैंकिंग लेन-देन ही नहीं, बल्कि गबन की गई राशि को बाजार में घुमाकर जो मोटी नकदी या कैश तैयार किया गया था, उसका एक बड़ा हिस्सा भी सीधे नरेश कुमार तक पहुंचाया गया था। यही वजह है कि ईडी उन्हें इस पूरे घोटाले के नेटवर्क की एक बेहद मजबूत और महत्वपूर्ण कड़ी मानकर रिमांड के दौरान कड़ाई से पूछताछ कर रही है।
सर्राफा व्यापारियों तक पहुंचे करोड़ों रुपये, अब नकदी के अंतिम छोर की तलाश
इस पूरे मामले की तफ्तीश जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इसमें नए और दिलचस्प मोड़ सामने आ रहे हैं। ईडी की मनी लॉन्ड्रिंग जांच में यह बात भी साफ हुई है कि शेल कंपनियों के बैंक खातों से सैकड़ों करोड़ रुपये देश के विभिन्न बड़े सर्राफा व्यापारियों यानी ज्वेलर्स के खातों में धड़ल्ले से ट्रांसफर किए गए थे। ईडी के मुताबिक, इन आभूषण व्यवसायियों को बैंक के जरिए पैसा ट्रांसफर करने के बदले में उनसे बड़े पैमाने पर कैश यानी नकदी ली गई थी, जिसे बाद में बिना किसी रिकॉर्ड के विभिन्न प्रभावशाली व्यक्तियों और इस घोटाले के असली राजनीतिक व प्रशासनिक लाभार्थियों तक चुपचाप पहुंचाया गया। प्रवर्तन निदेशालय की विशेष टीम अब इस भारी-भरकम नकदी के अंतिम छोर और उसके अंतिम लाभार्थियों का पता लगाने के साथ-साथ इस काली कमाई से देश-विदेश में खरीदी गई चल-अचल संपत्तियों को कुर्क करने की कानूनी तैयारी में पूरी मुस्तैदी से जुटी हुई है।
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