एजेंसी, इम्फाल। Manipur Violence : पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में शांति बहाली की तमाम कोशिशों के बीच एक बार फिर हिंसा की भीषण आग भड़क उठी है। राज्य के कामजोंग जिले से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां गुरुवार की सुबह तड़के संदिग्ध उग्रवादियों ने एक गांव पर धावा बोलते हुए भारी गोलीबारी की, जिसमें दो निर्दोष लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस मुख्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक, हथियारों से लैस उग्रवादियों ने सुबह करीब पौने पांच बजे कुलतूह कुकी ग्रामीण इलाके को चारों तरफ से घेर लिया और सोते हुए ग्रामीणों पर अंधाधुंध गोलियां बरसानी शुरू कर दीं। इस अचानक हुए कायरतापूर्ण हमले से पूरे इलाके में चीख-पुकार मच गई और दहशत का माहौल पैदा हो गया। वारदात को अंजाम देने के बाद हमलावर उग्रवादी मौके से फरार हो गए, जिसके बाद से पूरे जिले में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भारी तनाव व्याप्त है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर प्रभावित इलाकों में भारी तादाद में अतिरिक्त सुरक्षाबलों और सेना की टुकड़ियों को तैनात कर दिया है, और स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर दोषियों को पकड़ने के लिए जंगलों में एक बड़ा तलाशी अभियान शुरू किया गया है।
STORY | Two shot dead, houses burnt by militants in Manipur’s Kamjong
Suspected militants attacked a village in Manipur’s Kamjong district on Thursday, gunning down two persons and burning several houses, police said.
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— Press Trust of India (@PTI_News) June 11, 2026
दर्जनों घरों को किया आग के हवाले, हर तरफ मची तबाही
हमलावर उग्रवादी केवल गोलीबारी करने तक ही नहीं रुके, बल्कि उन्होंने गांव में जमकर तबाही मचाई और क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, उग्रवादियों ने अंधाधुंध फायरिंग करने के तुरंत बाद गांव के रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया और एक के बाद एक कई मासूम ग्रामीणों के घरों को आग के हवाले कर दिया। देखते ही देखते आग की गगनचुंबी लपटों ने कई मकानों को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे गरीब ग्रामीणों की जीवन भर की जमा पूंजी और पूरा आशियाना जलकर पूरी तरह राख हो गया। इस आगजनी के कारण कई परिवार बेघर हो गए हैं और अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागने को मजबूर हुए हैं। प्रभावित गांव में इस वक्त चारों तरफ धुआं और सन्नाटा पसरा हुआ है, जिसे देखते हुए जिला प्रशासन पूरी स्थिति पर नियंत्रण पाने की पुरजोर कोशिश कर रहा है।
छह नगा नागरिकों के शव मिलने से भड़का लोगों का गुस्सा
कामजोंग जिले में हुई यह ताजा हिंसक वारदात ठीक उस घटना के एक दिन बाद सामने आई है, जिसने पूरे मणिपुर को हिलाकर रख दिया है। दरअसल, बीते बुधवार को ही कांगपोकपी जिले के सुदूर इलाके से रहस्यमयी परिस्थितियों में छह नगा नागरिकों के क्षत-विक्षत शव बरामद किए गए थे। इस घटना के बाद से ही नगा समुदाय के लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। आशंका जताई जा रही है कि ये बरामद शव उन्हीं छह बदनसीब लोगों के हैं, जिन्हें करीब एक महीना पहले यानी बीती 13 मई को लीलोन वैफेई नामक गांव से कुछ अज्ञात हथियारबंद बदमाशों ने जबरन अगवा कर लिया था। पूरे 29 दिनों तक लापता रहने के बाद अचानक इतनी बड़ी संख्या में नगा समुदाय के लोगों की लाशें मिलने से घाटी और पहाड़ी दोनों ही क्षेत्रों में सामाजिक और राजनीतिक समीकरण बेहद संवेदनशील हो गए हैं, और पुराने घाव एक बार फिर हरे हो गए हैं।
अस्पताल परिसर रणक्षेत्र में बदला, सुरक्षा बलों ने दागे आंसू गैस के गोले
कांगपोकपी के कराम वैफेई गांव से बरामद किए गए इन सभी छह शवों को गुरुवार की सुबह पोस्टमार्टम और आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए सूबे की राजधानी इम्फाल में स्थित जवाहरलाल नेहरू आयुर्विज्ञान संस्थान अस्पताल लाया गया। जैसे ही यह खबर फैली, वैसे ही मृतकों के रोते-बिलखते परिजन, नगा समुदाय के शीर्ष सामाजिक नेता और हजारों की संख्या में स्थानीय लोग अस्पताल परिसर के बाहर इकट्ठा होने लगे। देखते ही देखते अस्पताल के बाहर जमा हुई भारी भीड़ बेहद उग्र हो गई और इंसाफ की मांग को लेकर नारेबाजी करने लगी। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और वहां तैनात पुलिसकर्मियों के बीच तीखी झड़प शुरू हो गई। हालात को बेकाबू होते देख और अस्पताल की सुरक्षा को खतरे में पड़ता देख सुरक्षा बलों को मजबूरन बल प्रयोग करना पड़ा, और आक्रोशित भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के दर्जनों गोले दागने पड़े, जिससे पूरा अस्पताल परिसर कुछ देर के लिए रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। हालांकि, स्थानीय प्रशासन ने अभी तक तकनीकी रूप से इन शवों की आधिकारिक शिनाख्त की पुष्टि नहीं की है, लेकिन मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने इस पूरे हत्याकांड की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए को सौंप दी है।
कई जिलों में फैली हिंसा की चिंगारी, नगा संगठनों ने किया बंद का ऐलान
छह शवों के मिलने के बाद मणिपुर के कई अन्य जिलों में भी हिंसक विरोध प्रदर्शनों का दौर शुरू हो गया है, जिससे कानून व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। सेनापति जिले में उग्र प्रदर्शनकारियों ने नगा पीपुल्स फ्रंट यानी एनपीएफ के एक राजनीतिक दफ्तर को घेरकर उसमें आग लगा दी, जिससे दफ्तर के भीतर रखा सारा सामान जल गया। इसके अलावा, प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर भी जमकर उपद्रव किया और मालवाहक ट्रकों को रोककर उनके साथ तोड़फोड़ की और कुछ गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। इस बेहद तनावपूर्ण स्थिति के बीच नगा समुदाय की सबसे बड़ी और शीर्ष संस्था यूनाइटेड नागा काउंसिल ने इस जघन्य हत्याकांड के विरोध में राज्य के सभी नगा बहुल और पहाड़ी क्षेत्रों में 24 घंटे के पूर्ण बंद का कड़ा आह्वान किया है। इस बंद के कारण यातायात, स्कूल और व्यापारिक प्रतिष्ठान पूरी तरह ठप हो गए हैं, जिससे राज्य में आम जनजीवन एक बार फिर पूरी तरह पटरी से उतर गया है।
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