एजेंसी, मुंबई। Mumbai Police Fake Drugs Threat : महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई में कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले चल रहे विशाल छात्र विरोध प्रदर्शनों के बीच एक बेहद हैरान करने वाला और सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगे रख रहे छात्रों को पुलिस द्वारा डराने और धमकाने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है। इस वीडियो ने खाकी वर्दी की कार्यशैली पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मुंबई पुलिस के एक अधिकारी द्वारा युवाओं को ड्रग्स के झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी देने के बाद पूरे राज्य में भारी सियासी और सामाजिक बवाल मच गया है।
The Mumbai Police are threatening students who are protesting, warning that if they return,
they will be framed in a drug case and end up spending their entire lives in jail. pic.twitter.com/6b7J7AeJ93— Bhavesh Makwana (@Bhaveshmakwana_) July 23, 2026
वायरल वीडियो में पुलिसकर्मी की शर्मनाक धमकी
पिछले कुछ दिनों से दादर के शिवाजी पार्क, चेंबूर और आजाद मैदान जैसे प्रमुख इलाकों में भारी संख्या में युवा और आम नागरिक अपनी मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे हुए हैं। इसी बीच इंटरनेट पर वायरल हुए एक वीडियो ने तहलका मचा दिया है। इस वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि पुलिस की वैन में कुछ प्रदर्शनकारी छात्रों को हिरासत में लेकर बैठाया गया है। अगली सीट पर बैठा एक पुलिसकर्मी इन युवाओं को सख्त हिदायत दे रहा है कि वे चुपचाप अपने घर चले जाएं और भूलकर भी दोबारा किसी भी प्रोटेस्ट में शामिल न हों। अधिकारी इतने पर ही नहीं रुका, उसने सीधे तौर पर धमकी देते हुए कहा कि अगर तुम लोग दोबारा यहां नजर आए तो वह उनके बैग में 50 ग्राम नशीला पाउडर डाल देगा और उनकी पूरी जिंदगी बर्बाद कर देगा। पुलिसकर्मी अपनी भड़ास निकालते हुए यह भी कहता है कि इन प्रदर्शनों की वजह से उसकी खुद की ड्यूटी और जिंदगी बहुत मुश्किल हो गई है।
कांग्रेस का कड़ा रिएक्शन और डिपार्टमेंटल एक्शन
इस विवादित वीडियो के सामने आने के तुरंत बाद मुंबई कांग्रेस ने इसे अपने सोशल मीडिया हैंडल एक्स पर साझा करते हुए पुलिस प्रशासन को जमकर आड़े हाथों लिया है। कांग्रेस पार्टी ने अपने बयान में कहा है कि अगर यह वीडियो पूरी तरह से प्रामाणिक है, तो यह केवल मासूम छात्रों को डराने की कोशिश नहीं है, बल्कि देश के लोकतांत्रिक अधिकारों पर एक सीधा और खुला प्रहार है। पार्टी का स्पष्ट मानना है कि सरकार के खिलाफ अपनी आवाज उठाना कोई अपराध नहीं है और छात्रों के जायज सवालों का जवाब उन्हें धमकाकर नहीं, बल्कि पूरी जवाबदेही के साथ दिया जाना चाहिए। मामले के तूल पकड़ते ही मुंबई पुलिस के आला अधिकारियों ने भी इसका कड़ा संज्ञान लिया है। पुलिस विभाग ने इस शर्मनाक घटना की उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है और शुरुआती कार्रवाई करते हुए वीडियो में दिख रहे पुलिसकर्मी को उसकी वर्तमान पोस्टिंग से तुरंत हटा दिया गया है। फाइनल जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे का कड़ा एक्शन लिया जाएगा।
छात्रों पर डिजिटल सर्विलांस और पुलिस का भारी दबाव
केवल झूठे मुकदमों की धमकी ही नहीं, बल्कि मुंबई पुलिस पर छात्रों के विरोध को कुचलने के लिए कई अन्य सख्त और अलोकतांत्रिक तरीके अपनाने के भी गंभीर आरोप लग रहे हैं। प्रदर्शनकारी युवाओं का दावा है कि पुलिस प्रशासन उन पर भारी डिजिटल सर्विलांस रख रहा है और उनके घरों तक जाकर परिजनों पर मानसिक दबाव बनाया जा रहा है। जिन छात्रों के नाम पहले से किसी एफआईआर में दर्ज हैं या जिन्हें कानूनी नोटिस मिल चुके हैं, उन्हें सीधे पुलिस थानों से फोन कॉल्स और व्हाट्सएप मैसेजेस आ रहे हैं। सोशल मीडिया पर शेयर किए गए कई वेरिफाइड स्क्रीनशॉट्स में यह साफ देखा जा सकता है कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारी प्रदर्शनकारियों को अपने घरों में ही रहने और लगातार अपनी व्हाट्सएप लाइव लोकेशन शेयर करने का कड़ा निर्देश दे रहे हैं। इसके अलावा, सुबह सुबह मैसेजिंग ऐप्स के माध्यम से बीएनएसएस की धारा 35 के तहत युवाओं को डिजिटल लीगल नोटिस भेजे जा रहे हैं, जिनमें लोगों को पहले की सभाओं के संबंध में पूछताछ के लिए पेश होने को कहा गया है।
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