एजेंसी, नई दिल्ली। INDI Alliance Meet Rahul Gandhi : देश में नीट प्रश्नपत्र लीक विवाद को लेकर जारी भारी राजनीतिक घमासान के बीच राजधानी में गतिविधियां अचानक बहुत तेज हो गई हैं। एक तरफ जहां सड़क से लेकर संसद तक विरोध का माहौल बना हुआ है, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी खेमे ने सरकार को घेरने के लिए अपनी रणनीति और ज्यादा मजबूत कर ली है। इसी कड़ी में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के नई दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास पर इंडी अलायंस की एक बेहद महत्वपूर्ण और इमरजेंसी मीटिंग आयोजित की गई। इस उच्च स्तरीय बैठक में नीट पेपर लीक केस में सरकार के रवैये के खिलाफ साझा रणनीति तैयार करने और संसद के चालू मानसून सत्र में आंदोलन को और तेज करने पर गहन विचार विमर्श किया गया।
INDIA bloc leaders met today to discuss key issues facing the nation and the way forward.
LoP Shri @RahulGandhi was also present.
📍 Parliament House, New Delhi pic.twitter.com/d23rcG0tvV
— Congress (@INCIndia) July 23, 2026
शीर्ष विपक्षी नेताओं का जमावड़ा और रणनीतिक मंथन
राहुल गांधी के घर पर बुलाई गई इस अहम बैठक में इंडी गठबंधन के दोनों सदनों यानी लोकसभा और राज्यसभा के कई प्रमुख सांसद शामिल हुए। बैठक में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी शरद पवार गुट की वरिष्ठ नेता सुप्रिया सुले, समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश समेत विपक्ष के कई दिग्गज चेहरे एक मंच पर नजर आए। सभी नेताओं ने एक सुर में नीट मामले पर सरकार की कथित ढिलाई की कड़े शब्दों में निंदा की। इसके साथ ही विपक्षी गठबंधन ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तत्काल इस्तीफे की अपनी पुरानी मांग को फिर से पूरी मजबूती के साथ दोहराया। विपक्षी नेताओं का स्पष्ट मानना है कि इतने बड़े पैमाने पर हुए प्रश्नपत्र लीक की नैतिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी सीधे तौर पर शिक्षा मंत्रालय की बनती है।
पार्लियामेंट में बना गतिरोध और सरकार का स्पष्टीकरण
नीट विवाद की वजह से संसद के मानसून सत्र में लगातार रुकावट आ रही है और सदन की कार्यवाही बुरी तरह से प्रभावित हुई है। इस राजनीतिक गतिरोध के बीच केंद्र सरकार ने भी अपनी तरफ से कई बड़े कदम उठाने का दावा किया है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार की सुबह ही यह घोषणा की थी कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले आरोपियों को त्वरित सजा दिलाने के लिए इस मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाया जाएगा। इसके अलावा सरकार ने संसद में इस पूरे विषय पर विस्तृत बहस कराने की इच्छा भी जताई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में साफ किया था कि सरकार बिना किसी समय सीमा के विपक्ष के हर सवाल का जवाब देने के लिए संसद के पटल पर पूरी तरह से तैयार है।
जितेंद्र सिंह की अपील और नड्डा के आवास पर संवाद की पेशकश
केंद्र सरकार की तरफ से गतिरोध को दूर करने के लिए लगातार प्रयास किए जाने की बात कही जा रही है। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि पिछले 24 घंटों के भीतर सरकार ने प्रदर्शनकारियों और विपक्ष के सामने बातचीत के कई प्रपोजल रखे हैं। सरकार आंदोलन से जुड़े हर पहलू और मांग पर खुले मन से चर्चा करने के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी बताया कि बातचीत को शांतिपूर्ण माहौल में आगे बढ़ाने के लिए प्रदर्शनकारियों को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा के सरकारी आवास या उनके दफ्तर में आमंत्रित किया गया था। सरकार का कहना है कि वे हर मुद्दे को सुलझाने के लिए सीधे संवाद का रास्ता अपनाना चाहते हैं।
जंतर मंतर पर सीजेपी का कड़ा रुख और न्यूट्रल वैन्यू की शर्त
दूसरी ओर जंतर मंतर पर डटे प्रदर्शनकारियों का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी ने सरकार के इस इनविटेशन को सिरे से खारिज कर दिया है। सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता आशुतोष रांका ने संगठन का रुख साफ करते हुए कहा कि वे बातचीत की प्रक्रिया के खिलाफ बिल्कुल नहीं हैं, लेकिन वे किसी भी केंद्रीय मंत्री के निजी निवास या आधिकारिक ऑफिस जाकर बात नहीं करेंगे। उनका मानना है कि जनता की आवाज सड़कों पर उठ रही है, इसलिए कोई भी ऑफिशियल टॉक केवल जंतर मंतर पर या फिर दोनों पक्षों की आपसी सहमति से तय किए गए किसी न्यूट्रल वैन्यू पर ही होनी चाहिए। सीजेपी के इस कड़े फैसले के बाद सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच का डायलॉग फिलहाल अनिश्चितता के दौर में पहुंच गया है।
ताज़ा अपडेट और ब्रेकिंग न्यूज़ के लिए हमारे फेसबुक पेज से जुड़ें और STPV.live के साथ अपडेट रहें


