MP Medical Store Band

ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में एमपी के 41 हजार मेडिकल स्टोर बंद, मरीज परेशान

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एजेंसी, भोपाल। MP Medical Store Band : मध्यप्रदेश में ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में बुधवार को दवा कारोबारियों ने बड़ा बंद आयोजित किया। प्रदेशभर के करीब 41 हजार मेडिकल स्टोर्स बंद रहे, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। राजधानी भोपाल समेत कई बड़े शहरों में मेडिकल स्टोर संचालकों ने प्रदर्शन करते हुए ऑनलाइन दवा व्यवस्था के खिलाफ नारेबाजी की और पुतला दहन किया। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स के आह्वान पर यह बंद किया गया। संगठन का कहना है कि ऑनलाइन दवाओं की बिक्री से न सिर्फ छोटे व्यापारियों पर असर पड़ रहा है, बल्कि लोगों की सेहत भी खतरे में पड़ सकती है।

भोपाल समेत कई शहरों में असर

भोपाल में 3 हजार से ज्यादा मेडिकल स्टोर्स बंद रहे। इसके अलावा ग्वालियर, जबलपुर, पांढुर्णा और अन्य शहरों में भी मेडिकल दुकानें पूरी तरह बंद दिखाई दीं। दवा व्यापारियों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया और ऑनलाइन दवा सिस्टम का प्रतीकात्मक पुतला जलाया। भोपाल केमिस्ट एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए दवाओं की बिक्री पर पर्याप्त निगरानी नहीं है। इससे नकली या गलत दवा पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है।

दवा नहीं मिलने से मरीजों की बढ़ी परेशानी

मेडिकल स्टोर बंद रहने का सबसे ज्यादा असर बुजुर्गों और नियमित दवा लेने वाले मरीजों पर पड़ा। कई लोग घंटों तक मेडिकल दुकानों के बाहर भटकते रहे, लेकिन उन्हें जरूरी दवाइयां नहीं मिल सकीं। ग्वालियर में एक बुजुर्ग व्यक्ति अपनी पत्नी की दवा लेने पहुंचे थे, लेकिन बाजार बंद होने के कारण उन्हें काफी परेशान होना पड़ा। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी की हालत गंभीर है और समय पर दवा नहीं मिलने से दिक्कत बढ़ सकती है। कई शहरों में मरीजों और उनके परिजनों ने बंद को लेकर नाराजगी भी जताई। हालांकि दवा कारोबारियों का कहना है कि यह विरोध आम लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर किया जा रहा है।

अस्पतालों के मेडिकल स्टोर खुले रहे

बंद के दौरान अस्पताल परिसरों में संचालित मेडिकल स्टोर्स को छूट दी गई थी ताकि गंभीर मरीजों को परेशानी न हो। सरकार और प्रशासन की ओर से जिला स्तर पर विशेष टास्क फोर्स भी बनाई गई, जो जरूरतमंद मरीजों तक दवाइयां पहुंचाने के लिए तैयार रही। प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए, जिनके जरिए लोग आपात स्थिति में दवा की मांग कर सकते थे। अधिकारियों का कहना है कि इमरजेंसी सेवाओं को प्रभावित नहीं होने दिया गया।

ऑनलाइन दवा बिक्री को लेकर क्यों बढ़ा विवाद

दवा कारोबारियों का कहना है कि ऑनलाइन दवा बिक्री में गुणवत्ता और निगरानी को लेकर अभी तक स्पष्ट और मजबूत व्यवस्था नहीं है। उनका आरोप है कि कई बार बिना उचित चिकित्सकीय सलाह के भी दवाइयां घर-घर पहुंचाई जा रही हैं, जिससे मरीजों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। व्यापारियों ने यह भी कहा कि ऑनलाइन कंपनियों के बढ़ते दायरे से पारंपरिक मेडिकल स्टोर्स का कारोबार प्रभावित हो रहा है और हजारों छोटे व्यापारी आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।

कोविड काल में बढ़ी थी ई-फार्मा की भूमिका

कोविड महामारी के दौरान केंद्र सरकार ने लोगों तक जरूरी दवाइयां पहुंचाने के लिए ई-फार्मा कंपनियों को कई रियायतें दी थीं। लॉकडाउन के समय डिजिटल पर्चियों के आधार पर भी दवा वितरण की अनुमति दी गई थी ताकि लोग घर बैठे दवाइयां मंगा सकें। उस दौरान ऑनलाइन दवा सेवाओं को आवश्यक सेवा का दर्जा मिला था और घर-घर दवा पहुंचाने की व्यवस्था को आसान बनाया गया था। हालांकि अब दवा व्यापारी मांग कर रहे हैं कि ऑनलाइन बिक्री के लिए सख्त नियम बनाए जाएं और स्थानीय मेडिकल दुकानों के हितों की भी रक्षा की जाए।

सरकार से नियम सख्त करने की मांग

दवा कारोबारियों ने सरकार से ऑनलाइन दवा बिक्री को लेकर स्पष्ट नीति और सख्त नियम लागू करने की मांग की है। उनका कहना है कि बिना नियंत्रण के चल रही ऑनलाइन दवा बिक्री भविष्य में बड़ा खतरा बन सकती है। व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले समय में आंदोलन और तेज किया जा सकता है। वहीं मरीजों को उम्मीद है कि जल्द ही इस विवाद का समाधान निकले ताकि उन्हें दवाइयों के लिए परेशान न होना पड़े।

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