MP Cabinet Expansion

 विवादों और बयानों से घिरी मोहन सरकार में बड़े बदलाव के संकेत, मंत्रिमंडल विस्तार में कट सकते हैं कई मंत्रियों के पत्ते

देश/प्रदेश प्रादेशिक भोपाल मध्‍य प्रदेश

एजेंसी, भोपाल। MP Cabinet Expansion : मध्य प्रदेश की वर्तमान भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार इन दिनों मुख्य विपक्षी दल के हमलों से कम, बल्कि अपनी ही कैबिनेट के कुछ खास मंत्रियों की कार्यशैली, उनके बड़बोलेपन और आपसी टकरावों के कारण काफी ज्यादा असहज स्थिति में नजर आ रही है। हाल ही में सामने आए कई गंभीर विवादों के कारण अब भाजपा संगठन के भीतर भी इन मंत्रियों के आचरण और उनके बयानों को लेकर तीखी चर्चाएं और समीक्षाएं शुरू हो चुकी हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के इस ढाई साल के कार्यकाल के दौरान कई मंत्रियों के आचरण ऐसे रहे, जिनके कारण उपजे विवादों की गूंज राज्य स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक सुनाई दी। कहा जा रहा है कि इन मंत्रियों के विवादों ने न सिर्फ सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाया है, बल्कि सत्ता और संगठन दोनों के लिए भी एक बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है, जिससे विपक्ष को बैठे-बिठाए एक बड़ा मुद्दा हाथ लग गया है। सूत्रों के मुताबिक, पार्टी नेतृत्व इन लगातार हो रहे विवादों को बेहद गंभीरता से ले रहा है, जिसके चलते आगामी दिनों में होने वाले प्रदेश मंत्रिमंडल के संभावित विस्तार और फेरबदल के दौरान कई चेहरों की छंटनी की जा सकती है और कुछ नए चेहरों को मौका दिया जा सकता है।

सत्ता और संगठन की शीर्ष बैठक में मंत्रियों के कामकाज और व्यवहार का हुआ आकलन

मोहन सरकार के ढाई वर्ष का कार्यकाल पूरा होने के ऐतिहासिक अवसर पर सत्ता और संगठन के शीर्ष पदाधिकारियों की एक बेहद महत्वपूर्ण और उच्च स्तरीय बैठक राजधानी में आयोजित की गई। इस गोपनीय और रणनीतिक बैठक में सूबे के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ-साथ संगठन की ओर से राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री शिवप्रकाश, मध्य प्रदेश के चुनाव प्रभारी डॉ. महेंद्र सिंह और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल मुख्य रूप से मौजूद रहे। पार्टी के अंदरूनी सूत्रों की मानें तो इस विशेष बैठक में राज्य के सभी मंत्रियों के अब तक के रिपोर्ट कार्ड, उनके विभागीय कामकाज की प्रगति और जनता तथा मीडिया के बीच उनके व्यावहारिक आचरण का बेहद बारीकी से आकलन किया गया है। भाजपा का केंद्रीय और राष्ट्रीय नेतृत्व भी मध्य प्रदेश के मंत्रियों के इन तमाम विवादों से पूरी तरह अवगत है, जिसके कारण यह कयास और ज्यादा मजबूत हो गए हैं कि आगामी दिनों में मंत्रिमंडल में एक बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकता है।

विवादों के घेरे में आए मध्य प्रदेश के ये 6 प्रमुख चेहरे

पार्टी सूत्रों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सरकार के भीतर परेशानी का सबब बने आधा दर्जन मंत्रियों के मुख्य विवाद इस प्रकार हैं:

1. जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह का सैन्य अधिकारी पर विवादित बयान

प्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह का एक बयान राष्ट्रीय स्तर पर बड़े विवाद का कारण बना था। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के बाद इंदौर के रायकुंडा में तैनात सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर कुछ बेहद आपत्तिजनक और अमर्यादित टिप्पणियां की थीं। इस बयान का देशभर में चौतरफा विरोध हुआ था और यह मामला वर्तमान समय में उच्च न्यायालय (हाईकोर्ट) से लेकर देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) में विचाराधीन है।

2. नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय की पत्रकारों से बदजुबानी

वरिष्ठ भाजपा नेता और सूबे के नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी अपनी तीखी बयानबाजी के कारण कई बार अपनी ही सरकार को संकट में डाल चुके हैं। इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने के कारण हुई नागरिकों की मौतों के संवेदनशील मामले पर जब पत्रकारों ने उनसे जवाब मांगा, तो उन्होंने मीडियाकर्मियों के प्रति बेहद अमर्यादित और तीखे शब्दों का प्रयोग किया था, जिसकी काफी तीखी आलोचना हुई थी।

3. राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी का कथित फर्जी जाति प्रमाण पत्र का मामला

नगरीय विकास एवं आवास विभाग की राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी वर्तमान में एक बड़े कानूनी और राजनीतिक विवाद के केंद्र में आ गई हैं। कांग्रेस पार्टी के प्रवक्ता प्रदीप अहिरवार की ओर से अदालत में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें यह गंभीर आरोप लगाया गया है कि राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी ने चुनाव के दौरान जिस जाति प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया था, वह पूरी तरह से फर्जी है। इस मामले ने भी विपक्ष को सरकार पर हमला करने का बड़ा मौका दे दिया है।

4. कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना का रेत माफिया के पक्ष में बयान

प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना अपने एक बेहद अजीबोगरीब बयान को लेकर विपक्षी दलों और पर्यावरणविदों के निशाने पर आ गए हैं। उन्होंने एक सार्वजनिक मंच से कहा था कि ‘जो लोग चंबल के इलाकों में रेत का काम कर रहे हैं, वे कोई रेत माफिया नहीं हैं, बल्कि वे तो पेट माफिया हैं, जो मेहनत करके अपना और अपने परिवार का पेट भरते हैं।’ उनके इस बयान के कुछ ही दिनों बाद मुरैना में अवैध रेत ले जा रहे एक वाहन ने ड्यूटी पर तैनात वन विभाग के रेंजर को कुचल दिया था, जिससे उनकी मौत हो गई। इस घटना के बाद मंत्री के बयान की भारी निंदा हुई थी।

5. अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान के भाई की दबंगई

अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री नागर सिंह चौहान अपने कड़े और बगावती तेवरों के कारण पहले भी कई बार सुर्खियों में रह चुके हैं। हाल ही में उनके सगे भाई इंदर सिंह चौहान पर आलीराजपुर जनपद की मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) को फोन पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी देने का आरोप लगा है। हालांकि, विवाद बढ़ता देख मंत्री नागर सिंह चौहान ने तुरंत मीडिया के सामने आकर खुद को अपने भाई के इस कृत्य से पूरी तरह अलग कर लिया था, लेकिन प्रशासनिक हलकों में इसकी खूब चर्चा रही।

6. लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी मंत्री संपतिया उइके और सहकर्मी मंत्री के बीच आपसी जंग

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) की कद्दावर मंत्री संपतिया उइके पहले भी अपने विभाग के भीतर करोड़ों रुपये के सरकारी धन के गबन और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों को लेकर विवादों के घेरे में रही हैं। ताजा विवाद मंत्रियों की वन-टू-वन समन्वय बैठक के बाद सामने आया है, जिसमें उन्होंने खुले तौर पर अपनी ही सरकार के मंत्री नागर सिंह चौहान पर शराब के कारोबार से जुड़े होने का एक गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में संगठन के सामने कह दिया कि वे ऐसे पृष्ठभूमि वाले नेता के साथ किसी भी प्रकार का विभागीय समन्वय स्थापित नहीं कर सकती हैं। मंत्रियों के बीच की इस आपसी कलह ने सरकार की साख पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

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