एजेंसी, नई दिल्ली। Fuel Export Duty Cut : देश के आम नागरिकों और पेट्रोलियम क्षेत्र के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने घरेलू स्तर पर उत्पादित कच्चे तेल और ईंधन के निर्यात पर लगाए जाने वाले विंडफॉल गेन टैक्स (विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क) में भारी कटौती करने का एक बड़ा नीतिगत फैसला किया है। सरकार द्वारा पेट्रोल, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (हवाई ईंधन) के निर्यात पर टैक्स की दरों को काफी कम कर दिया गया है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, टैक्स कटौती की यह नई दरें 1 जून से पूरे देश में प्रभावी रूप से लागू हो जाएंगी।
Central Government notifies export levies on exports of petrol, diesel and aviation turbine fuel (ATF) for the fortnight beginning 1st June, 2026
🔷The rates are being revised on a fortnightly basis and the last such revision was undertaken with effect from 16th May, 2026. The…
— PIB India (@PIB_India) May 31, 2026
पेट्रोल पर निर्यात टैक्स आधा हुआ, डीजल और हवाई ईंधन पर भी मिली बड़ी राहत
वित्त मंत्रालय द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल गेन टैक्स को सीधे आधा कर दिया है। अब इसे 3 रुपये प्रति लीटर से घटाकर 1.50 रुपये प्रति लीटर मुकर्रर कर दिया गया है। इसके साथ ही डीजल के निर्यात पर लगने वाले टैक्स में भी बड़ी कटौती की गई है। डीजल पर निर्यात शुल्क को 16.5 रुपये प्रति लीटर से घटाकर अब 13.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। हवाई जहाजों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन यानी एविएशन टरबाइन फ्यूल पर भी टैक्स की मार कम की गई है। इस पर लगने वाले कर को 16 रुपये प्रति लीटर से घटाकर सीधे 9.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जिससे विमानन क्षेत्र को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर नहीं पड़ेगा कोई सीधा असर
वित्त मंत्रालय ने इस नीतिगत फैसले के साथ एक महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण भी जारी किया है। मंत्रालय ने साफ किया है कि पेट्रोल और डीजल के विदेशी निर्यात पर लगने वाले सड़क और बुनियादी ढांचा उपकर (इन्फ्रास्ट्रक्चर सेस) को अब पूरी तरह से शून्य कर दिया गया है। हालांकि, सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि देश के भीतर घरेलू इस्तेमाल और आम उपभोक्ताओं के लिए बेचे जाने वाले पेट्रोल और डीजल पर मौजूदा टैक्स व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है। यानी आम जनता के लिए पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों पर इसका कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा। गौरतलब है कि पेट्रोल और डीजल पर लगने वाली इस स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी की सरकार द्वारा हर दो सप्ताह (14 दिन) में वैश्विक बाजार की परिस्थितियों के आधार पर समीक्षा की जाती है और इसी के तहत यह नया बदलाव किया गया है।
क्यों लगाया जाता है विंडफॉल टैक्स और कब हुई थी इसकी शुरुआत?
भारत में केंद्र सरकार द्वारा पहली बार जुलाई 2022 में विंडफॉल गेन टैक्स लगाने की शुरुआत की गई थी। दरअसल, रूस-यूक्रेन संकट और ईरान युद्ध जैसी वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की आपूर्ति बुरी तरह बाधित हुई थी, जिससे वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों में बेतहाशा तेजी आ गई थी। इस स्थिति का फायदा उठाकर देश की निजी तेल रिफाइनरी कंपनियां घरेलू बाजार में तेल बेचने के बजाय विदेशों में महंगे दामों पर तेल का भारी निर्यात कर रही थीं, जिससे देश के भीतर तेल का संकट खड़ा होने का खतरा पैदा हो गया था। घरेलू बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और निजी कंपनियों के अप्रत्याशित मुनाफे पर लगाम लगाने के लिए सरकार ने मार्च और जुलाई 2022 के दौरान निर्यात शुल्क और विंडफॉल टैक्स लगाने का फैसला किया था। जब भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें एक निश्चित सीमा से ऊपर जाती हैं, तो कंपनियों को होने वाले इस अतिरिक्त मुनाफे पर सरकार टैक्स वसूलती है।
रिलायंस और ओएनजीसी जैसी बड़ी निजी व सरकारी कंपनियों को मिलेगा फायदा
सरकार के इस नए फैसले से देश के बड़े प्राइवेट रिफाइनर्स (निजी तेल शोधक कंपनियों) को सबसे ज्यादा वित्तीय राहत मिलेगी, जो भारी मात्रा में पेट्रोलियम उत्पादों का विदेशों में निर्यात करते हैं। इस कटौती से रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी देश की सबसे बड़ी निजी तेल निर्यातक कंपनी को सीधा फायदा पहुंचेगा। रिलायंस देश के भीतर से डीजल और हवाई ईंधन का निर्यात करने वाली सबसे अग्रणी कंपनी है। गुजरात के जामनगर में स्थित रिलायंस की दो विशाल रिफाइनरियों में रोजाना करीब 50 टन हवाई ईंधन का उत्पादन किया जाता है, जो भारत के कुल हवाई ईंधन उत्पादन का लगभग एक-चौथाई (25 प्रतिशत) हिस्सा है। इस उत्पादन का एक बहुत बड़ा हिस्सा विदेशी बाजारों में निर्यात किया जाता है। रिलायंस के अलावा इस टैक्स कटौती का सीधा लाभ देश की सार्वजनिक क्षेत्र की दिग्गज तेल कंपनियों जैसे ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन और ऑयल इंडिया लिमिटेड को भी मिलेगा, जो कच्चे तेल के उत्पादन और ईंधन उत्पादों के निर्यात कार्य से जुड़ी हुई हैं।
ये भी पढ़े : ताजमहल के संगमरमरी हुस्न पर टिफनी ट्रंप फिदा : तय कार्यक्रम बदल पति माइकल के साथ अचानक पहुंचीं आगरा
ताज़ा अपडेट और ब्रेकिंग न्यूज़ के लिए हमारे फेसबुक पेज से जुड़ें और STPV.live के साथ अपडेट रहें


