MP Cabinet Decisions

मध्य प्रदेश सरकार का ऐतिहासिक फैसला : प्रदेश के लाखों लोगों को मिलेगी जमीन की पक्की रजिस्ट्री, सरकारी स्कूल के बच्चों को मिलेगी सिली-सिलाई ड्रेस

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एजेंसी, भोपाल। MP Cabinet Decisions : मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को आयोजित की गई कैबिनेट बैठक में राज्य की जनता के हित में कई अत्यंत महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक फैसले लिए गए हैं। इस उच्च स्तरीय बैठक में मुख्य रूप से स्वामित्व योजना के अंतर्गत राज्य के लाखों ग्रामीण परिवारों को उनकी आबादी भूमि के पक्के रजिस्ट्रीकृत दस्तावेज सौंपने और सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को सीधे तैयार सिलाई की हुई यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने की मंजूरी दी गई है। राज्य सरकार के इन बड़े फैसलों से प्रदेश के ग्रामीण अंचलों और शिक्षा व्यवस्था में एक बहुत बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा। सरकार का यह कदम आम जनता को सीधे तौर पर आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होने जा रहा है।

संपत्तियों की पक्की रजिस्ट्री कराने वाला देश का पहला राज्य बनेगा मध्य प्रदेश

कैबिनेट बैठक में लिए गए निर्णयों की विस्तृत जानकारी देते हुए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य काश्यप ने बताया कि केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी स्वामित्व योजना के तहत राज्य के ग्रामीण आबादी क्षेत्रों में बसे लोगों की संपत्तियों का अत्याधुनिक ड्रोन और सैटेलाइट सर्वे के माध्यम से पूरी सटीकता के साथ चिह्नांकन किया गया था। इस वैज्ञानिक सर्वे के पूरा होने के बाद सभी पात्र ग्रामीणों को उनके अधिकार पत्र यानी स्वामित्व पत्र वितरित किए जा चुके थे। अब मोहन यादव सरकार इस दिशा में एक कदम और आगे बढ़ते हुए इन सभी संपत्तियों की बाकायदा सरकारी रजिस्ट्री कराएगी और ग्रामीणों को पूरी तरह से प्रमाणित पंजीकृत कानूनी दस्तावेज उपलब्ध करवाएगी। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश के सभी पचपन जिलों में कुल अड़तालीस लाख अस्सी हजार निजी संपत्तियों और लगभग उन्नीस लाख सरकारी संपत्तियों की पहचान की जा चुकी है।

इस पूरी रजिस्ट्री प्रक्रिया में लगने वाला पंचायत उपकर और स्टांप पंजीयन शुल्क का पूरा खर्च आम जनता पर डालने के बजाय खुद राज्य सरकार वहन करेगी। सरकार के इस बड़े फैसले से सरकारी खजाने पर करीब अडतीस सौ करोड़ रुपये का भारी वित्तीय भार आने का अनुमान लगाया गया है। सरकार का यह ठोस दावा है कि एक बार पक्के कानूनी दस्तावेज हाथ में आ जाने के बाद ग्रामीण लाभार्थियों को बैंकों से आसानी से लोन मिल सकेगा और वे अन्य कई सरकारी सुविधाओं का लाभ बिना किसी अड़चन के उठा पाएंगे। इस तरह की अनोखी और जनहितैषी व्यवस्था लागू करने वाला मध्य प्रदेश पूरे देश का पहला राज्य बनने जा रहा है।

स्कूली बच्चों के खातों में पैसे भेजने की व्यवस्था बंद, अब सीधे मिलेगी तैयार ड्रेस

शिक्षा के क्षेत्र में एक और बड़ा बदलाव करते हुए राज्य कैबिनेट ने स्कूल शिक्षा विभाग के एक बेहद महत्वपूर्ण प्रस्ताव को अपनी हरी झंडी दे दी है। इस नए फैसले के तहत अब प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा से लेकर आठवीं कक्षा तक पढ़ने वाले सभी छात्र-छात्राओं को सीधे तैयार की हुई सिलाई वाली स्कूल यूनिफॉर्म उपलब्ध कराई जाएगी। गौरतलब है कि इससे पहले तक सरकार की डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी डीबीटी योजना के माध्यम से बच्चों के बैंक खातों में स्कूल यूनिफॉर्म के लिए छह सौ रुपये की राशि सीधे भेजी जाती थी। लेकिन इस पुरानी व्यवस्था को लेकर धरातल से लगातार कई तरह की शिकायतें और विसंगतियां सामने आ रही थीं, जिन्हें ध्यान में रखते हुए सरकार ने अब पूरी व्यवस्था को ही पलट दिया है। नई व्यवस्था के अनुसार, अब सरकार पारदर्शी टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से बड़े पैमाने पर कपड़ा खरीदेगी और स्वयं सहायता समूहों तथा अन्य माध्यमों से विद्यार्थियों के लिए यूनिफॉर्म सिलवाकर उन्हें सीधे स्कूल में वितरित करेगी। इससे पहले मोहन यादव सरकार छात्रों को साइकिल वितरण की पुरानी व्यवस्था में भी इसी तरह का बड़ा और सुधारात्मक बदलाव कर चुकी है।

देश में गेहूं खरीदी में मध्य प्रदेश अव्वल, यूसीसी पर भी हुई गहन चर्चा

इस महत्वपूर्ण कैबिनेट बैठक के दौरान राज्य में चल रही गेहूं खरीदी की प्रगति की भी विस्तृत समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान सामने आए आंकड़ों के अनुसार, इस चालू वर्ष में पूरे देश के भीतर सबसे अधिक गेहूं की सरकारी खरीदी करने वाला राज्य मध्य प्रदेश बनकर उभरा है। इसके साथ ही, देश भर में चर्चा का विषय बने समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी को लेकर भी कैबिनेट के भीतर महत्वपूर्ण विचार-विमर्श हुआ। सरकार की तरफ से यह स्पष्ट जानकारी दी गई कि इस कानून को लेकर आम जनता, विशेषज्ञों और विभिन्न संगठनों से सुझाव प्राप्त करने की पूरी प्रक्रिया को आगामी तीस जुलाई तक अनिवार्य रूप से पूरा कर लिया जाएगा। इस विशेष कैबिनेट बैठक की औपचारिक शुरुआत हमेशा की तरह राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत के गरिमामय गायन के साथ की गई।

भोपाल में विधायकों को मकान किराये के लिए हर महीने मिलेंगे चालीस हजार रुपये

राजधानी भोपाल में स्थित पुराने विधायक विश्राम गृह परिसर के पारिवारिक खंड और विधायक विश्राम गृह खंड एक को पूरी तरह से जमींदोज कर वहां एक आधुनिक बहुमंजिला इमारत का निर्माण कार्य शुरू किया जा रहा है। इस निर्माण कार्य के चलते वहां रह रहे विधायकों के सामने आवास की समस्या पैदा हो गई थी। इस स्थिति को देखते हुए विधानसभा की संसदीय सुविधा समिति ने यह पुरजोर अनुशंसा की थी कि जब तक नई बहुमंजिला इमारत का निर्माण कार्य पूरी तरह से मुकम्मल नहीं हो जाता, तब तक वहां रहने वाले विधायकों को निजी तौर पर मकान किराए पर लेने के लिए प्रति माह चालीस हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए। कैबिनेट ने आज इस प्रस्ताव को भी अपनी मंजूरी दे दी है। सरकार के इस फैसले से सरकारी खजाने पर सालाना एक करोड़ उनतीस लाख रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ने वाला है।

दूध उत्पादन में भारी उछाल और पशुपालकों के लिए गोरस मोबाइल ऐप लॉन्च

कैबिनेट को जानकारी देते हुए मंत्री चैतन्य काश्यप ने यह भी बताया कि सरकार के निरंतर प्रयासों से राज्य में दूध के उत्पादन में एक बहुत बड़ा और रिकॉर्ड तोड़ उछाल दर्ज किया गया है। प्रदेश में प्रतिदिन होने वाला दूध का उत्पादन नौ लाख लीटर से सीधे बढ़कर अब ग्यारह लाख लीटर प्रतिदिन के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच चुका है। इसी क्षेत्र को और बढ़ावा देने तथा ग्रामीण पशुपालकों को मौसम के बदलते मिजाज, उन्नत पशु आहार और मवेशियों की बेहतर देखभाल संबंधी सभी जरूरी तकनीकी जानकारियां समय पर देने के लिए सरकार द्वारा ‘गोरस’ नाम से एक विशेष मोबाइल एप्लीकेशन भी लॉन्च किया गया है। इसके अतिरिक्त, पीएम सूर्यघर योजना के तहत राज्य में अब तक चार लाख से अधिक घरों की छतों पर रूफटॉप सोलर सिस्टम सफलतापूर्वक स्थापित किए जा चुके हैं और सरकार ने अब इसे बढ़ाकर छह लाख घरों तक ले जाने का एक बड़ा लक्ष्य तय किया है। वहीं दूसरी तरफ, राज्य में चल रहे जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत अब तक दो लाख से अधिक प्राचीन और नई जल संरचनाओं के जीर्णोद्धार और निर्माण का कार्य पूरी तत्परता से पूरा किया जा चुका है।

कैबिनेट में गूंजा किसानों की मिट्टी परिवहन का मुद्दा, मुख्यमंत्री ने दिए कड़े निर्देश

इस कैबिनेट बैठक के दौरान एक बेहद संवेदनशील और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ा मुद्दा सूबे के राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा द्वारा उठाया गया। उन्होंने किसानों के खेतों और गांवों के पारंपरिक तालाबों से निकाली जाने वाली उपजाऊ मिट्टी के परिवहन में आ रही व्यावहारिक दिक्कतों का मामला मुख्यमंत्री के सामने रखा। राजस्व मंत्री ने कहा कि राज्य के कई ग्रामीण क्षेत्रों में खनिज विभाग और स्थानीय पुलिस प्रशासन के अधिकारी तालाब की गाद और मिट्टी ले जा रहे भोले-भाले किसानों को जबरन रोक देते हैं और उन पर कानूनी कार्रवाई की धौंस जमाते हैं, जिससे ग्रामीणों को भारी मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने तर्क दिया कि भीषण गर्मी के इस मौसम में जब गांव के तालाब और खेत पूरी तरह से सूख जाते हैं, तब ग्रामीण और किसान अपने निजी संसाधनों और खर्च पर तालाबों का गहरीकरण यानी उनकी सफाई करते हैं।

ऐसे समय में यदि कोई किसान या ग्रामीण तालाब से निकली हुई इस उपजाऊ मिट्टी को जेसीबी और ट्रैक्टर-ट्रॉली की मदद से अपने खेतों में सुधार के लिए ले जाना चाहता है, तो खनिज विभाग और प्रशासनिक अमला परिवहन की अनुमति न होने का बहाना बनाकर उन्हें परेशान करता है। मंत्री ने मुख्यमंत्री के सामने यह मजबूत पक्ष रखा कि जब बिना किसी सरकारी खर्च और बजट के ग्रामीण खुद अपने स्तर पर तालाबों को गहरा कर रहे हैं, जिससे जल संरक्षण को सीधा बढ़ावा मिल रहा है, तब इस तरह की मिट्टी के परिवहन पर प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा अनावश्यक रूप से रोक लगाना कहीं से भी न्यायसंगत नहीं है। इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मौके पर मौजूद आला अधिकारियों को इस पूरे विषय का गहराई से परीक्षण करने और एक बेहद सरल व व्यावहारिक व्यवस्था तैयार करने के कड़े निर्देश दिए हैं, ताकि भविष्य में किसानों और ग्रामीणों को मिट्टी ले जाते समय किसी भी तरह की प्रशासनिक प्रताड़ना या अनावश्यक परेशानी का सामना बिल्कुल न करना पड़े।

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