एजेंसी, मदुरै। तमिलनाडु के मदुरै कोर्ट ने सथानकुलम कस्टोडियल डेथ (हिरासत में मौत) के चर्चित मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत ने कस्टोडियल डेथ केस घटना को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ यानी विरले में से विरलतम श्रेणी का मानते हुए इसे सत्ता के दुरुपयोग और बर्बरता का चरम उदाहरण बताया। करीब 6 साल तक चली लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद फर्स्ट एडिशनल डिस्ट्रिक्ट एंड सेशंस जज जी. मुथुकुमारन ने सभी आरोपियों को हत्या का दोषी करार दिया।
#WATCH | Chennai | On 9 Tamil Nadu Cops Get Death Sentence in the Sathankulam custodial death case, DMK Spokesperson TKS Elangovan says, “Yes, they brutally attacked two people, hanging them throughout the night and killed them. No action was taken. At that time, AIADMK was in… pic.twitter.com/104VMigvEX
— ANI (@ANI) April 6, 2026
क्या था पूरा मामला और पुलिस की बर्बरता
यह दर्दनाक घटना 19 जून 2020 की है, जब लॉकडाउन के नियमों के उल्लंघन के आरोप में पुलिस ने व्यापारी पी. जयराज और उनके बेटे जे. बेनिक्स को हिरासत में लिया था। आरोप था कि उन्होंने तय समय के बाद भी अपनी दुकान खुली रखी थी। सथानकुलम पुलिस स्टेशन ले जाने के बाद दोनों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया, जहां चोटों और अत्यधिक टॉर्चर के कारण उनकी मौत हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया था कि पूरी रात थाने में दोनों के साथ अमानवीय व्यवहार किया गया और उनके शरीर पर गंभीर चोटों के निशान मिले थे।
सीबीआई की जांच और महिला कांस्टेबल की गवाही
मद्रास हाईकोर्ट के आदेश पर इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। जांच के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि पिता-पुत्र को पूरी रात योजनाबद्ध तरीके से प्रताड़ित किया गया था। इस मामले में एक महिला कांस्टेबल की गवाही सबसे बड़ा सबूत बनी, जिसने तस्दीक की कि थाने में मेज और लाठियों पर खून के निशान मौजूद थे। सीबीआई ने अपनी दलील में कहा कि यह सामान्य मारपीट नहीं बल्कि सोची-समझी हत्या थी। हालांकि, पुलिस ने सबूत मिटाने के लिए थाने के सीसीटीवी फुटेज को भी सुरक्षित नहीं रखा था।
इन पुलिसकर्मियों को मिली सजा
अदालत ने जिन 9 पुलिसकर्मियों को दोषी पाकर सजा सुनाई है, उनमें इंस्पेक्टर एस. श्रीधर, सब-इंस्पेक्टर पी. रघु गणेश और के. बालकृष्णन के साथ-साथ हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल स्तर के अधिकारी शामिल हैं। मामले के 10वें आरोपी स्पेशल सब-इंस्पेक्टर पॉलदुरई की सुनवाई के दौरान ही कोरोना संक्रमण की वजह से मौत हो गई थी। कोर्ट के इस फैसले ने साफ कर दिया है कि वर्दी की आड़ में कानून हाथ में लेने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
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