एजेंसी, नई दिल्ली। MEA India Reply : भारत के विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तानी राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी द्वारा भारतीय मुस्लिम धार्मिक स्थलों और आंतरिक व्यवस्था को लेकर दिए गए विवादित बयान पर बेहद सख्त और कड़ा रुख अपनाया है। भारत सरकार ने जरदारी के इस बयान को पूरी तरह से मनगढ़ंत और बकवास बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि पाकिस्तानी नेतृत्व की यह टिप्पणी भारत के आंतरिक और संप्रभु मामलों में एक सोची-समझी साजिश के तहत किया गया दुर्भावनापूर्ण हस्तक्षेप है। भारत ने पाकिस्तान को नसीहत देते हुए साफ कहा है कि जिस देश का मानवाधिकारों को लेकर अपना खुद का इतिहास बेहद शर्मनाक और दागदार रहा है, उसे भारत जैसे दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को ज्ञान या उपदेश देने का कोई भी नैतिक अधिकार नहीं है।
Our response to media queries regarding comments made by the President of Pakistan ⬇️
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— Randhir Jaiswal (@MEAIndia) June 20, 2026
विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तानी नेतृत्व को दिखाया आईना
भारतीय विदेश मंत्रालय के मुख्य और आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शनिवार की देर रात एक विशेष प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए पाकिस्तान को उसकी असलियत दिखाई। उन्होंने अपने बेहद कड़े बयान में कहा कि भारत सरकार पाकिस्तान के राष्ट्रपति द्वारा की गई इन तमाम गैर-जरूरी और पूरी तरह से बेबुनियाद टिप्पणियों को सिरे से खारिज करती है। भारतीय प्रवक्ता ने दृढ़ता के साथ स्पष्ट किया कि किसी भी अंतरराष्ट्रीय मंच या परिस्थिति में पाकिस्तान को भारत के आंतरिक प्रशासनिक और सामाजिक मामलों पर किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने का कोई कानूनी या नैतिक हक नहीं है और भारत ऐसी हरकतों को बर्दाश्त नहीं करेगा।
पाकिस्तान का अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न का काला इतिहास जगजाहिर
रणधीर जायसवाल ने पाकिस्तानी सत्तासीनों पर सीधा और तीखा हमला बोलते हुए आगे कहा कि मानवाधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता के नाजुक मुद्दे पर पाकिस्तान की तरफ से ऐसी बातें आना अपने आप में बेहद हास्यास्पद और अजीब है। पूरी दुनिया जानती है कि पाकिस्तान का अपना मानवाधिकार रिकॉर्ड हमेशा से अत्यंत दयनीय और निराशाजनक रहा है, जिसकी वजह से समय-समय पर वैश्विक स्तर पर और संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों पर भी उसकी कड़ी आलोचना होती रही है। पाकिस्तान के भीतर रहने वाले विभिन्न धार्मिक अल्पसंख्यकों जैसे हिंदू, सिख और ईसाइयों को वहां सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया जाता है, उनका जबरन धर्म परिवर्तन कराया जाता है और उनके बुनियादी नागरिक अधिकारों को बेरहमी से कुचला जाता है। पाकिस्तान का यह काला और दर्दनाक इतिहास पूरी दुनिया के सामने आ चुका है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर छवि बिगाड़ने का सुनियोजित राजनीतिक प्रोपेगैंडा
भारत ने पूरी मजबूती के साथ स्पष्ट किया है कि अपने देश की बदहाल जमीनी हकीकत और कंगाली से अपनी जनता का ध्यान भटकाने के लिए पाकिस्तानी राष्ट्रपति ने यह मनगढ़ंत बयान जारी किया है। यह और कुछ नहीं बल्कि पाकिस्तान का एक पुराना और सुनियोजित राजनीतिक प्रोपेगैंडा है। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस प्रकार की घटिया टिप्पणियां केवल और केवल पाकिस्तान की आंतरिक कट्टरता, संकीर्ण सोच और भारत के प्रति नफरत पर टिकी उनकी राष्ट्रीय नीतियों का नतीजा हैं। पाकिस्तान का मुख्य मकसद केवल अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के सामने भारत की धर्मनिरपेक्ष और मजबूत छवि को नुकसान पहुंचाना है, लेकिन दुनिया अब पाकिस्तान की इन चालबाजियों को अच्छी तरह समझ चुकी है और भारत अपनी आंतरिक सुरक्षा और भाईचारे को बनाए रखने के लिए पूरी तरह सक्षम है।
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