Mamata Banerjee

भवानीपुर चुनाव नतीजों के खिलाफ कलकत्ता उच्च न्यायालय पहुंचीं ममता बनर्जी, मतगणना केंद्र में मारपीट और धांधली का लगाया गंभीर आरोप

देश/प्रदेश पश्चिम बंगाल

एजेंसी, कोलकाता। Mamata Banerjee HC : पश्चिम बंगाल की राजनीति से इस वक्त की एक बहुत बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने भवानीपुर विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र के चुनावी नतीजों को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने इन परिणामों को चुनौती देते हुए मंगलवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। पूर्व मुख्यमंत्री ने अदालत से गुहार लगाई है कि इस विधानसभा सीट पर हुए चुनाव और उसके बाद घोषित किए गए नतीजों की कानूनी वैधता की पूरी गहराई से जांच करवाई जाए। इस कदम के बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर से भारी गर्माहट आ गई है।

याचिका दायर करने खुद अदालत परिसर पहुंचीं पूर्व मुख्यमंत्री

इस कानूनी लड़ाई की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ममता बनर्जी मंगलवार को खुद व्यक्तिगत रूप से अपनी याचिका दाखिल करने के लिए कलकत्ता उच्च न्यायालय के परिसर में मौजूद थीं। अदालत में दी गई अपनी आधिकारिक शिकायत में उन्होंने चुनाव प्रक्रिया पर बेहद गंभीर और संगीन सवाल उठाए हैं। उन्होंने याचिका में साफ तौर पर कहा है कि भवानीपुर सीट पर चुनावी नियमों को ताक पर रखकर गलत तरीके से मतगणना का काम पूरा किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब वोटों की गिनती का बारहवां दौर चल रहा था, तब मतगणना केंद्र के भीतर उनके चुनावी एजेंट और उनके साथ अभद्र व्यवहार करते हुए मारपीट की गई और उन्हें जबरन केंद्र से बाहर निकाल दिया गया।

भवानीपुर में शुभेंदु अधिकारी के हाथों झेलनी पड़ी थी शिकस्त

गौरतलब है कि हाल ही में घोषित हुए बेहद रोमांचक चुनावी नतीजों में भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता शुभेंदु अधिकारी ने भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी को पंद्रह हजार एक सौ पांच मतों के अंतर से शिकस्त दी थी। यह सीट ममता बनर्जी का पुराना और बेहद मजबूत गढ़ मानी जाती रही है और वे यहां से पहले भी तीन बार विधायक चुनी जा चुकी हैं। हालांकि, इस बार चुनाव के दौरान भी उन्होंने मतगणना प्रक्रिया में जानबूझकर बड़े पैमाने पर गड़बड़ी किए जाने और सरकारी तंत्र के दुरुपयोग के आरोप लगाए थे। चार मई को जब मतों की गिनती हो रही थी, तब भी वे केंद्र पर पहुंची थीं और उन्होंने बाहर आकर अपने साथ हुई बदसलूकी की बात मीडिया के सामने रखी थी।

मतों की गिनती से ठीक एक दिन पहले भी हुआ था भारी हंगामा

भवानीपुर में विवाद की शुरुआत नतीजों की घोषणा से एक दिन पहले यानी तीन मई को ही हो गई थी। उस दिन मतगणना केंद्र के मुख्य द्वार पर तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच जमकर नोकझोंक और हंगामा हुआ था। तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने आरोप लगाया था कि विरोधी दल के झंडे लगी एक संदिग्ध गाड़ी को बिना किसी सुरक्षा जांच के सीधे सखावत मेमोरियल स्कूल के भीतर बने सुरक्षित कक्ष यानी स्ट्रॉन्ग रूम के परिसर में जाने की अनुमति दे दी गई। इस घटना की सूचना मिलते ही ममता बनर्जी खुद वहां पहुंची थीं और वे सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए करीब चार घंटे तक उसी सुरक्षित कक्ष के भीतर मौजूद रही थीं।

केंद्रीय बलों और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल

पूर्व मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि राज्य के कई अन्य संवेदनशील निर्वाचन क्षेत्रों में भी नियमों के खिलाफ जाकर जानबूझकर मतों की गिनती को बीच में ही रोक दिया गया था। उन्होंने केंद्रीय सुरक्षा बलों और चुनाव आयोग की भूमिका पर भी तीखे सवाल खड़े किए हैं। ममता बनर्जी का दावा है कि सरकारी मशीनरी पूरी तरह से विपक्षी दल के भारी दबाव में काम कर रही थी और जानबूझकर चुनाव परिणामों को प्रभावित करने की कोशिश की गई। दूसरी तरफ, भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी की सुरक्षित कक्ष के भीतर की तस्वीरें साझा करते हुए इन आरोपों को पूरी तरह से खारिज किया था और इसे चुनाव हारने के डर से किया गया महज एक नाटक करार दिया था।

पश्चिम बंगाल में पहली बार भारतीय जनता पार्टी ने बनाई सरकार

इस बार का पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव राज्य के इतिहास में एक बहुत बड़ा राजनीतिक बदलाव लेकर आया है। चार मई को घोषित हुए अंतिम परिणामों में भारतीय जनता पार्टी ने अभूतपूर्व प्रदर्शन करते हुए कुल दो सौ आठ सीटों पर शानदार जीत दर्ज की और पूर्ण बहुमत के साथ राज्य में पहली बार अपनी सरकार बनाई। इस ऐतिहासिक जीत के बाद शुभेंदु अधिकारी को विधायक दल का नेता चुना गया और उन्होंने पश्चिम बंगाल के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। वहीं, इस चुनाव में लंबे समय तक सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा और वह महज अस्सी सीटों पर ही सिमट कर रह गई।

नंदीग्राम चुनाव के बाद भी अदालत की शरण में गई थीं ममता

यह पहला मौका नहीं है जब ममता बनर्जी ने शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ चुनावी नतीजों को अदालत में चुनौती दी हो। इससे पहले वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी नंदीग्राम की बेहद चर्चित सीट पर शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को एक बेहद कड़े मुकाबले में करीब एक हजार नौ सौ छप्पन वोटों से हरा दिया था। उस समय भी ममता बनर्जी ने इस हार को स्वीकार नहीं किया था और सत्रह जून 2021 को कलकत्ता उच्च न्यायालय में चुनाव याचिका दायर कर जीत को चुनौती दी थी। उस दौरान तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग से मतों की दोबारा गिनती यानी रीकाउंटिंग कराने की आधिकारिक मांग की थी, जिसे आयोग ने पूरी तरह से खारिज कर दिया था। अब एक बार फिर इतिहास खुद को दोहरा रहा है और देखना होगा कि अदालत इस पूरे मामले पर क्या रुख अपनाती है।

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