एजेंसी, नई दिल्ली। Petrol Diesel Price Hike : देशभर में बढ़ती महंगाई के बीच आम लोगों को एक और बड़ा झटका लगा है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार बढ़ोतरी कर दी गई है। मंगलवार को पेट्रोल और डीजल के दाम में करीब 90 पैसे प्रति लीटर तक की वृद्धि हुई, जिसके बाद कई बड़े शहरों में ईंधन की कीमतें नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। लगातार बढ़ती कीमतों का असर अब सीधे आम आदमी की जेब पर पड़ने लगा है और परिवहन से लेकर रोजमर्रा की चीजों तक महंगाई बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
Diesel prices increased by 91 paise per litre and petrol by 87 paise per litre. Diesel in Delhi hiked to Rs 91.58 per litre, and Petrol hiked to Rs 98.64 per litre
RSP (Retail Selling Price) of four Metro cities for 19.05.26 are as follows:
MS (petrol) prices
Delhi…
— ANI (@ANI) May 19, 2026
दिल्ली समेत बड़े शहरों में बढ़े ईंधन के दाम
नई दरों के लागू होने के बाद राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत बढ़कर 98.64 रुपये प्रति लीटर हो गई है, जबकि पहले यह 97.77 रुपये थी। वहीं डीजल अब 91.58 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है, जो पहले 90.67 रुपये था। मुंबई में पेट्रोल 107.59 रुपये और डीजल 94.08 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है। कोलकाता में पेट्रोल 109.70 रुपये और डीजल 96.07 रुपये प्रति लीटर हो गया है। चेन्नई में भी पेट्रोल और डीजल दोनों के दाम में तेजी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो ईंधन के दामों में और इजाफा हो सकता है।
ईरान संकट बना बड़ी वजह
जानकारों के मुताबिक फरवरी में शुरू हुए पश्चिम एशिया संकट और ईरान से जुड़े युद्ध जैसे हालात के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी तेजी आई है। अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर कार्रवाई और उसके बाद तेहरान की जवाबी प्रतिक्रिया से होर्मुज जलडमरूमध्य पर दबाव बढ़ गया। यह समुद्री मार्ग दुनिया में तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक का उछाल देखने को मिला है। इसका असर भारत समेत कई देशों पर पड़ा है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है।
तेल कंपनियों को हो रहा भारी नुकसान
सरकारी तेल कंपनियों का कहना है कि लंबे समय तक कीमतें स्थिर रखने के कारण उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा के अनुसार हाल में हुई मूल्य वृद्धि के बाद भी तेल कंपनियां रोजाना लगभग 750 करोड़ रुपये का नुकसान झेल रही हैं। क्रिसिल की रिपोर्ट के मुताबिक पेट्रोल पर करीब 10 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर लगभग 13 रुपये प्रति लीटर का नुकसान अब भी बना हुआ है। यही कारण है कि कंपनियों ने धीरे-धीरे कीमतों में बढ़ोतरी शुरू की है ताकि नुकसान को कुछ हद तक कम किया जा सके।
चुनाव के दौरान स्थिर रखे गए थे दाम
विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि कई राज्यों में विधानसभा चुनावों के कारण सरकार ने लंबे समय तक ईंधन के दाम नहीं बढ़ाए। उनका कहना है कि चुनाव खत्म होने और भाजपा की जीत के बाद कीमतों में लगातार वृद्धि की जा रही है। हालांकि सरकार का दावा है कि उसने उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय बाजार की बढ़ी कीमतों का बोझ खुद उठाया। मार्च 2024 में लोकसभा चुनाव से पहले पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 2 रुपये प्रति लीटर की कटौती भी की गई थी।
सीएनजी और एलपीजी भी हुई महंगी
पेट्रोल और डीजल के अलावा सीएनजी की कीमतों में भी लगातार वृद्धि हो रही है। दिल्ली और मुंबई समेत कई शहरों में पहले 2 रुपये प्रति किलोग्राम और फिर 1 रुपये प्रति किलोग्राम की अतिरिक्त बढ़ोतरी की गई। वहीं घरेलू रसोई गैस एलपीजी सिलेंडर भी मार्च में 60 रुपये महंगा किया गया था। उद्योग सूत्रों का कहना है कि तेल कंपनियों को अभी भी एक घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर सैकड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। ऐसे में आने वाले समय में रसोई गैस की कीमतों में भी और बदलाव देखने को मिल सकता है।
बढ़ती महंगाई से आम आदमी की चिंता बढ़ी
ईंधन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी का असर अब परिवहन, खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी वस्तुओं पर भी पड़ने लगा है। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से रोजमर्रा के सामान की कीमतें बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक हालात जल्द नहीं सुधरे तो आने वाले महीनों में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी लोगों से ईंधन के विवेकपूर्ण उपयोग, विदेश यात्रा कम करने और गैरजरूरी खर्चों से बचने की अपील की है। सरकार विदेशी मुद्रा भंडार पर बढ़ते दबाव को देखते हुए कई स्तरों पर खर्च नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है।
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