एजेंसी, कोलकाता। Mamata Banerjee EVM : पश्चिम बंगाल की बेहद हाई-प्रोफाइल भवानीपुर विधानसभा सीट पर हुए चुनावी मुकाबले और उसके नतीजों को लेकर अब देश की न्यायपालिका बेहद सख्त रुख अपना रही है। कलकत्ता हाईकोर्ट ने मंगलवार को एक अत्यंत महत्वपूर्ण और बड़ा आदेश जारी करते हुए भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र की मतगणना से जुड़े तमाम तकनीकी और प्रशासनिक साक्ष्यों को पूरी तरह से सुरक्षित और संरक्षित रखने का हुक्म दिया है। अदालत ने विधानसभा चुनाव के नतीजों में बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ी और धांधली के गंभीर आरोपों पर सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया है कि चुनाव से जुड़े सभी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम, वीवीपैट पर्चियां, सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और अन्य सभी संबंधित सरकारी दस्तावेजों को पूरी तरह से संभालकर रखा जाए।
#WATCH | Kolkata, WB: On argument on Bhabanipur Election result matter in Calcutta High Court, Advocate and TMC MP Kalyan Banerjee says, “He (former CEO of Manoj Agarwal) has been appointed as the Joint Secretary of CMO. Therefore, there is a quid pro quo and there is a… pic.twitter.com/l5ef2IblbR
— ANI (@ANI) June 23, 2026
माननीय अदालत की अनुमति के बिना साक्ष्यों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ पर पूर्ण प्रतिबंध
इस बेहद संवेदनशील मामले की सुनवाई कर रहे माननीय जस्टिस गौरांग कांत ने अपने आदेश में विशेष रूप से उस शेखावाटी मेमोरियल स्कूल का जिक्र किया जहाँ मतगणना केंद्र और स्ट्रॉन्गरूम बनाया गया था। अदालत ने निर्देश दिया है कि इस स्कूल परिसर के भीतर और बाहर लगे सभी सीसीटीवी कैमरों की फुटेज को पूरी तरह से सुरक्षित किया जाए। कोर्ट ने अपने आदेश में बेहद कड़े शब्दों में कहा कि भविष्य में जरूरत पड़ने पर इन सभी डिजिटल और भौतिक साक्ष्यों की बारीकी से जांच की जाएगी। इसलिए अदालत की लिखित अनुमति के बिना इन रिकॉर्ड्स को न तो मिटाया जाएगा, न बदला जाएगा और न ही किसी तरह से नष्ट किया जाएगा। इसके साथ ही कोर्ट ने इस मामले को आगे बढ़ाते हुए मौजूदा मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, उनके मुख्य सलाहकार सुभ्रत गुप्ता और सुनील अग्रवाल को भी इस कानूनी लड़ाई में मुख्य पक्षकार बनाने का आदेश जारी किया है। गौरतलब है कि इस सीट पर शुभेंदु अधिकारी ने तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी को पंद्रह हजार एक सौ पांच वोटों के अंतर से शिकस्त दी थी।
पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद हाईकोर्ट पहुंचकर चुनावी नतीजों की वैधता को दी चुनौती
इससे पहले बीते सोलह जून को तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी ने खुद कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और भवानीपुर सीट के चुनावी नतीजों के खिलाफ एक मुख्य याचिका दाखिल की थी। उन्होंने कोर्ट से इस पूरे चुनाव की वैधता की जांच कराने की जोरदार मांग की है। अपनी याचिका में पूर्व मुख्यमंत्री ने बेहद सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा है कि यह पूरा चुनाव गलत और असंवैधानिक तरीके से कराया गया है। उन्होंने दावा किया कि मतगणना के दौरान जब बारह राउंड की गिनती पूरी हो चुकी थी, तब अचानक विरोधी तत्वों द्वारा उनके इलेक्शन एजेंट और स्वयं उनके साथ मारपीट की गई और उन्हें जबरन काउंटिंग सेंटर से धक्के मारकर बाहर निकाल दिया गया। भवानीपुर सीट से लगातार तीन बार विधायक रह चुकीं ममता बनर्जी ने चुनाव के दौरान भी केंद्रीय बलों के दुरुपयोग और मतगणना में हेराफेरी के गंभीर आरोप लगाए थे।
मतगणना से ठीक एक दिन पहले स्ट्रॉन्गरूम के भीतर चार घंटे तक रुकी रहीं ममता
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों के ठीक एक दिन पहले यानी तीन मई की रात को भवानीपुर के काउंटिंग सेंटर के बाहर भारी राजनीतिक हंगामा और बवाल देखने को मिला था। उस समय तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने एक बड़ा आरोप लगाते हुए कहा था कि भारतीय जनता पार्टी के झंडे और सिंबल लगी एक संदिग्ध कार को बिना किसी सुरक्षा जांच और तलाशी के भवानीपुर के मुख्य स्ट्रॉन्गरूम परिसर के अंदर जाने की अनुमति दी गई। इस गंभीर घटना की सूचना मिलते ही ममता बनर्जी खुद रात के समय सखावत मेमोरियल स्कूल में बने स्ट्रॉन्गरूम में पहुंच गई थीं और सुरक्षा चिंताओं के मद्देनजर वे वहां करीब चार घंटे तक जमी रहीं। शुभेंदु अधिकारी ने बाद में ममता बनर्जी की स्ट्रॉन्गरूम के भीतर मौजूदगी की तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर जारी की थीं।
मतगणना के दिन मारपीट और धक्का-मुक्की के लगे आरोप, विरोधियों ने बताया ड्रामेबाजी
चार मई को जब पूरे राज्य के चुनावी नतीजे सामने आ रहे थे, तब ममता बनर्जी एक बार फिर शेखावाटी मेमोरियल स्कूल स्थित काउंटिंग सेंटर पहुंची थीं। वहां से बाहर आने के बाद उन्होंने मीडिया के सामने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि उनके पोलिंग एजेंट्स को डरा-धमकाकर हॉल से बाहर खदेड़ दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सुरक्षा बलों और विपक्षी कार्यकर्ताओं ने उन्हें खुद धक्का दिया, उनके साथ बदसलूकी की और उन्हें काउंटिंग सेंटर के अंदर जाने से पूरी तरह रोक दिया। दूसरी तरफ इन आरोपों पर पलटवार करते हुए तत्कालीन भाजपा नेता और वर्तमान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने ममता के सभी दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया था। शुभेंदु अधिकारी ने कहा था कि हार के डर और हताशा के कारण ममता बनर्जी केवल राजनीतिक ड्रामेबाजी कर रही हैं और उनके द्वारा ईवीएम को लेकर लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह से निराधार और मनगढ़ंत हैं, जिससे जनता का फैसला बदलने वाला नहीं है।
पश्चिम बंगाल के राजनैतिक इतिहास में भाजपा ने पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ बनाई सरकार
बीते चार मई को घोषित हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के ऐतिहासिक नतीजों ने पूरे देश को चौंका दिया था। सूबे के इतिहास में पहली बार भारतीय जनता पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल दो सौ आठ सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की और पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाई। वहीं दूसरी तरफ लंबे समय तक सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस यानी टीएमसी महज अस्सी सीटों पर सिमट कर रह गई। इस बंपर जीत के बाद भवानीपुर सीट से चुनाव जीतने वाले शुभेंदु अधिकारी को सर्वसम्मति से राज्य का नया मुख्यमंत्री चुना गया।
साल दो हजार इक्कीस में भी नंदीग्राम सीट की हार के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंची थीं ममता
यह पहला मौका नहीं है जब ममता बनर्जी ने अपनी चुनावी हार को अदालत में चुनौती दी हो। इससे पहले साल दो हजार इक्कीस के विधानसभा चुनाव में भी नंदीग्राम सीट पर एक बेहद कड़े और कांटे के मुकाबले में शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को करीब एक हजार नौ सौ छप्पन वोटों के मामूली अंतर से हरा दिया था। उस समय भी नतीजों के तुरंत बाद तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग से दोबारा मतगणना यानी रीकाउंटिंग की मांग की थी, जिसे आयोग ने ठुकरा दिया था। इसके बाद सत्रह जून दो हजार इक्कीस को ममता बनर्जी ने कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर कर शुभेंदु अधिकारी की जीत को चुनौती दी थी, और अब पांच साल बाद एक बार फिर दोनों नेताओं के बीच की यह राजनीतिक जंग अदालत के गलियारों में पहुंच चुकी है।
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