एजेंसी, भोपाल। राजधानी के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में शनिवार को यूपीएससी की परीक्षा में सफल हुए मध्य प्रदेश के 61 युवाओं के लिए ‘सफलता के मंत्र’ सम्मान समारोह आयोजित किया गया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की गरिमामयी उपस्थिति में हुए इस कार्यक्रम में उन प्रतिभावान युवाओं का सम्मान किया गया, जिन्होंने कड़े संघर्ष और सीमित संसाधनों के बावजूद देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता हासिल की है।
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बेहद दिलचस्प अंदाज में अपनी तुलना नवनियुक्त अफसरों से की। उन्होंने कहा, “लोकतंत्र की यह खूबसूरती है कि यहां एक चाय वाला प्रधानमंत्री और एक गाय वाला मुख्यमंत्री बन सकता है। आप लोग सौभाग्यशाली हैं कि एक बार परीक्षा पास करने के बाद आपका चयन स्थायी हो गया है, लेकिन हम राजनीतिज्ञों को तो हर 5 साल में जनता के बीच जाकर परीक्षा देनी पड़ती है और अपनी नीतियों के आधार पर उनका विश्वास जीतना पड़ता है।”
सिविल सेवा परीक्षा में मध्यप्रदेश के 61 उम्मीदवारों का चयन हुआ है। टॉप 10 में 2 उम्मीदवारों ने जगह बनाई है। सिविल सेवा के क्षेत्र में प्रदेश के उम्मीदवारों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
आज भोपाल में ‘सफलता के मंत्र’ कार्यक्रम में चयनित उम्मीदवारों को सफल सिविल सेवा के लिए… pic.twitter.com/FkyeIdGnJU
— Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) March 23, 2026
चयनित अभ्यर्थियों का बढ़ता आंकड़ा और सरकारी कॉलेजों का प्रदर्शन अपर मुख्य सचिव अनुपम राजन ने जानकारी दी कि वर्ष 2020 में जब डॉ. मोहन यादव उच्च शिक्षा मंत्री थे, तब प्रदेश से चयनित होने वाले अभ्यर्थियों की संख्या 37 थी, जो अब बढ़कर 61 हो गई है। गौरव की बात यह है कि इन 61 सफल युवाओं में 20 बेटियां शामिल हैं। साथ ही, 22 अभ्यर्थी ऐसे हैं जिन्होंने किसी महंगे निजी संस्थान के बजाय मध्य प्रदेश के सरकारी कॉलेजों से अपनी शिक्षा पूरी की है।
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सीएम के नए अफसरों के लिए 5 विशेष मंत्र मुख्यमंत्री ने नवनियुक्त अधिकारियों को फील्ड में काम करने के लिए पांच मुख्य सुझाव दिए:
– अंत्योदय : समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की सेवा को प्राथमिकता दें।
– नवाचार : आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए नए विचारों पर अमल करें।
– शुचिता : अपने कार्य और समय की पवित्रता बनाए रखें।
– ईमानदारी : सत्यनिष्ठा के मार्ग पर अडिग रहें।
– शिल्पकार : विकसित भारत के सपने को साकार करने में अपनी भूमिका निभाएं।
छोटे शहरों ने तोड़ा दिल्ली का मिथक समारोह में यह बात उभरकर सामने आई कि अब यूपीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली जाना या बड़े कोचिंग संस्थानों का ठप्पा जरूरी नहीं रह गया है। अनूपपुर, डिंडोरी, छतरपुर और सतना जैसे छोटे जिलों के युवाओं ने अपनी मेहनत से यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा किसी विशेष स्थान की मोहताज नहीं होती। मुख्यमंत्री ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि पद मिलने के बाद अहंकार के स्थान पर सेवा का भाव होना चाहिए और इतिहास की जानकारी रखने वाला व्यक्ति ही बेहतर भविष्य का निर्माण कर सकता है।


