Padma Awards 2026

पद्म पुरस्कार समारोह 2026 : राष्ट्रपति भवन में अलका याग्निक, ममूटी और विजय अमृतराज पद्म भूषण से सम्मानित, शिबू सोरेन को मरणोपरांत मिला सर्वोच्च सम्मान

नई दिल्ली बॉलीवुड मनोरंजन राष्ट्रीय

एजेंसी, नई दिल्ली। Padma Awards 2026 : देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक पद्म पुरस्कारों को लेकर राजधानी दिल्ली के राष्ट्रपति भवन से एक बेहद गौरवशाली और महत्वपूर्ण खबर सामने आ रही है। महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार की शाम को राष्ट्रपति भवन के ऐतिहासिक गणतंत्र मंडप में आयोजित एक अत्यंत भव्य और गरिमामयी समारोह के दौरान देश की पैंसठ महान और प्रख्यात हस्तियों को पद्म पुरस्कारों के दूसरे चरण के तहत सम्मानित किया। इस बेहद खास और वीआईपी राष्ट्रीय समारोह में देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित शासन और प्रशासन के कई आला अधिकारी और गणमान्य लोग व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहे। इस बार के पुरस्कारों में कला, खेल, पत्रकारिता और जनसेवा के क्षेत्र में देश का नाम पूरी दुनिया में रोशन करने वाले दिग्गजों को सम्मानित किया गया है, जिसमें क्रिकेट जगत के स्टार खिलाड़ी रोहित शर्मा, मशहूर पार्श्व गायिका अलका याग्निक, दक्षिण भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता ममूटी और भारत के पूर्व टेनिस स्टार विजय अमृतराज जैसी महान हस्तियों के नाम प्रमुख रूप से शामिल हैं।

भावुक पल: व्हीलचेयर पर बैठी पत्नी रूपी सोरेन को मंच से नीचे उतरकर राष्ट्रपति ने सौंपा शिबू सोरेन का पद्म भूषण

इस पूरे गरिमामयी समारोह के दौरान एक ऐसा अत्यंत भावुक और ऐतिहासिक पल भी देखने को मिला जिसने वहां मौजूद देश के प्रधानमंत्री सहित हर एक अतिथि की आंखों को पूरी तरह से नम कर दिया। झारखंड आंदोलन के महानायक, झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक और सूबे के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय शिबू सोरेन को देश के प्रति उनके अतुलनीय योगदान के लिए मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान से नवाजा गया है। उनकी तरफ से यह सर्वोच्च सम्मान ग्रहण करने के लिए उनकी धर्मपत्नी रूपी सोरेन विशेष रूप से व्हीलचेयर पर बैठकर राष्ट्रपति भवन पहुंची थीं। उनकी शारीरिक स्थिति और सम्मान को देखते हुए महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अद्वितीय संवेदनशीलता का परिचय दिया और वे स्वयं अपने मुख्य मंच से नीचे उतरकर रूपी सोरेन के पास पहुंचीं और उन्हें आदरपूर्वक पद्म भूषण पुरस्कार प्रदान किया।

जल-जंगल-जमीन के रक्षक और आदिवासियों के मसीहा ‘दिशोम गुरु’ का ऐतिहासिक सफर

मरणोपरांत पद्म भूषण से सम्मानित होने वाले शिबू सोरेन का नाम इतिहास के पन्नों में एक ऐसे अद्वितीय नायक के रूप में दर्ज है, जिन्होंने आदिवासी समाज की अस्मिता और उनके मूल अधिकारों के लिए अपना पूरा जीवन दांव पर लगा दिया था। उनका जन्म ग्यारह जनवरी एक हजार नौ सौ चवालिस को रामगढ़ जिले के नेमरा गांव में हुआ था। उनके पिता सोबरन सोरेन महाजनी शोषण के खिलाफ लड़ते हुए शहीद हो गए थे, जिसके बाद युवा शिबू सोरेन ने शोषकों के खिलाफ एक बहुत बड़ा बिगुल फूंक दिया। सत्तर के दशक में उन्होंने महाजनी प्रथा और आदिवासियों की जमीन हड़पने के खिलाफ ऐतिहासिक ‘धानकटनी आंदोलन’ की शुरुआत की थी। उन्होंने गांवों में रात्रि पाठशालाएं चलाकर लोगों को शिक्षित और जागरूक किया, जिसके कारण संपूर्ण समाज उन्हें आदरपूर्वक ‘दिशोम गुरु’ और ‘गुरुजी’ के नाम से पुकारने लगा। साल एक हजार नौ सौ बहत्तर में जेएमएम का गठन करके उन्होंने अलग राज्य की लड़ाई को एक मजबूत राजनीतिक दिशा दी, जिसके परिणामस्वरूप पंद्रह नवंबर दो हजार को पृथक झारखंड राज्य का निर्माण हुआ। वे तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री और केंद्र में कोयला मंत्री भी रहे।

देश के पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज और मलयालम पत्रकार को मिला सर्वोच्च पद्म विभूषण सम्मान

इस शानदार और प्रतिष्ठित समारोह के दूसरे चरण के भीतर देश के दो सबसे बड़े और कद्दावर व्यक्तित्वों को सर्वोच्च पद्म विभूषण सम्मान से अलंकृत किया गया है। कानून और न्याय के क्षेत्र में देश को एक नई दिशा देने वाले सुप्रीम कोर्ट के पूर्व माननीय न्यायाधीश केटी थॉमस को उनकी अद्वितीय जनसेवा और न्यायिक सुधारों के लिए पद्म विभूषण दिया गया। इसके साथ ही भारतीय मीडिया और पत्रकारिता के जगत में अपनी कलम का लोहा मनवाने वाले वरिष्ठ मलयालम पत्रकार पी नारायणन को साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में उनके असाधारण व ऐतिहासिक योगदान के लिए देश के इस दूसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान से नवाजा गया है।

गणतंत्र मंडप में दो पद्म विभूषण, सात पद्म भूषण और छप्पन पद्म श्री पुरस्कारों का हुआ वितरण

राष्ट्रपति भवन की तरफ से मिली आधिकारिक और प्रामाणिक जानकारी के अनुसार, इस दूसरे चरण के मुख्य उत्सव के दौरान कुल मिलाकर दो पद्म विभूषण, सात पद्म भूषण और छप्पन पद्म श्री पुरस्कार देश की महान विभूतियों को सौंपे गए हैं। प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि इस वर्ष यानी दो हजार छब्बीस में पूरे देश के भीतर से कुल एक सौ इकतीस भाग्यशाली और कर्मठ हस्तियों को पद्म पुरस्कारों के लिए चुना गया था। इससे पहले आयोजित किए गए प्रथम चरण के भव्य समारोह के दौरान देश की कुल छियासठ हस्तियों को राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया जा चुका था, जिसमें भारतीय महिला क्रिकेट टीम की धाकड़ कप्तान हरमनप्रीत कौर और हिंदी सिनेमा के सदाबहार अभिनेता धर्मेंद्र के नाम मुख्य रूप से शामिल थे।

साल दो हजार छब्बीस के पद्म पुरस्कारों की पूरी सूची और मुख्य श्रेणियों का विवरण

इस वर्ष गृह मंत्रालय और भारत सरकार की तरफ से घोषित किए गए सभी पद्म पुरस्कारों की मुख्य और विस्तृत रूपरेखा इस प्रकार तय की गई है:

  • पांच महान हस्तियों को मिला पद्म विभूषण: इस सर्वोच्च श्रेणी में सिनेमा जगत के दिग्गज और दिवंगत अभिनेता धर्मेंद्र, देश के सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व माननीय जज केटी थॉमस, और केरल के पूर्व मुख्यमंत्री व कम्युनिस्ट पार्टी के कद्दावर नेता वीएस अच्युतानंदन समेत कुल पांच लोगों को इस सम्मान के लिए चुना गया है।

  • तेरह प्रमुख लोगों को मिला पद्म भूषण: इस महत्वपूर्ण सूची के भीतर भारतीय संगीत की मल्लिका अलका याग्निक, झारखंड के दिवंगत पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन, और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री व वरिष्ठ नेता भगत सिंह कोश्यारी सहित देश के तेरह दिग्गजों को स्थान प्राप्त हुआ है।

  • एक सौ तेरह प्रतिभाओं को मिला पद्मश्री: खेल और कला जगत को गौरवान्वित करने वाले मशहूर अभिनेता आर माधवन, भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार बल्लेबाज रोहित शर्मा, पैरा एथलीट प्रवीण कुमार, महिला क्रिकेट की कप्तान हरमनप्रीत कौर और भारतीय महिला हॉकी टीम की दीवार कही जाने वाली गोलकीपर सविता पूनिया समेत कुल एक सौ तेरह जमीन से जुड़े कलाकारों और खिलाड़ियों को इस पदक से सम्मानित किया गया है।

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