एजेंसी, जम्मू। Kashmir Terrorist Network Raid : जम्मू-कश्मीर में देश विरोधी ताकतों, सीमा पार से संचालित होने वाले आतंकवादी नेटवर्क और उनके छिपे हुए स्लीपर सेल के खिलाफ देश की सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी सबसे बड़ी और निर्णायक कार्रवाई शुरू कर दी है। बुधवार के तड़के जम्मू-कश्मीर पुलिस की विशेष आतंकवाद-रोधी जांच इकाई, काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर (सीआईके) ने घाटी के छह अलग-अलग संवेदनशील जिलों में एक साथ बेहद गोपनीय और व्यापक छापेमारी (सर्च ऑपरेशन) कर राष्ट्र विरोधी संदिग्ध गतिविधियों को पूरी तरह से नेस्तनाबूद करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। सुरक्षा अधिकारियों से प्राप्त आधिकारिक जानकारी के अनुसार, यह पूरी आक्रामक कार्रवाई पाकिस्तान समर्थित खूंखार आतंकवादी संगठनों और उनके स्थानीय मददगारों से जुड़े एक दशक पुराने बेहद गंभीर मामले के सिलसिले में की गई है, जिससे घाटी के आतंकी गलियारों में हड़कंप मच गया है।
हालिया खुफिया जानकारियों और तकनीकी विश्लेषण के बाद चिन्हित किए गए थे संदिग्ध ठिकाने
इस बेहद संवेदनशील और बड़े ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए काउंटर इंटेलिजेंस कश्मीर के आला अधिकारियों ने पिछले कई दिनों से एक मजबूत रणनीतिक योजना तैयार कर रखी थी। सुरक्षा बलों को हाल ही में कुछ बेहद पुख्ता खुफिया इनपुट्स मिले थे, जिनकी गहन जांच और आधुनिक तकनीकी विश्लेषण करने के बाद घाटी के अलग-अलग हिस्सों में स्थित कुल आठ अत्यंत संदिग्ध ठिकानों की पहचान की गई। इन सभी ठिकानों पर बुधवार की सुबह सूरज निकलने से पहले ही सुरक्षा बलों और सीआईके के जांबाज जवानों ने एक साथ धावा बोल दिया। इस औचक कार्रवाई के अंतर्गत श्रीनगर और बांदीपोरा जिलों में दो-दो प्रमुख स्थानों पर छापेमारी की गई, जबकि कुपवाड़ा, अनंतनाग, कुलगाम और बारामूला जिलों में एक-एक रणनीतिक ठिकाने पर सघन तलाशी अभियान चलाया गया।
वर्ष 2015 से दर्ज मामले में जांच तेज, सीमा पार बैठे आकाओं से जुड़े थे तार
सुरक्षा एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस पूरे मामले की कड़ियों को जोड़ते हुए बताया कि यह आपराधिक मुकदमा मूल रूप से वर्ष 2015 में दर्ज किया गया था। इस मामले का सीधा संबंध पड़ोसी देश पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित और पोषित किए जाने वाले विभिन्न आतंकवादी संगठनों, उनके भूमिगत स्लीपर सेल नेटवर्क तथा जम्मू-कश्मीर की शांत वादियों में मासूम स्थानीय युवाओं को बरगलाने से है। ये नेटवर्क युवाओं की जबरन भर्ती करने, उनके भीतर कट्टरपंथी विचारधारा का जहर घोलने और घाटी में अशांति तथा आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने के काम में लिप्त था। हालिया जांच में यह भी बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इस नेटवर्क के कुछ प्रमुख संदिग्ध सदस्य बेहद गोपनीय और आधुनिक संचार माध्यमों के जरिए पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओं और आतंकी संचालकों के साथ लगातार सीधे संपर्क में बने हुए थे।
एन्क्रिप्टेड एप्लीकेशन और सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को कट्टरपंथी बनाने की थी साजिश
देश की सुरक्षा और डिजिटल निगरानी (डिजिटल सर्विलांस) करने वाली विशेष टीमों की तकनीकी जांच के दौरान कई संदिग्धों की रहस्यमयी और देश विरोधी गतिविधियां सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर आई थीं। खुफिया जांच से इस बात के पक्के संकेत मिले थे कि ये देशद्रोही तत्व इंटरनेट पर मौजूद एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन एप्लीकेशन (पूरी तरह सुरक्षित संदेश भेजने वाले ऐप्स) और विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल कर रहे थे। इन माध्यमों के जरिए पूरी घाटी में भारत विरोधी चरमपंथी प्रचार सामग्री और भड़काऊ वीडियो प्रसारित किए जा रहे थे, ताकि स्थानीय युवाओं के दिमाग को प्रभावित करके उन्हें मुख्यधारा से अलग कर कट्टरपंथ की अंधी राह पर धकेला जा सके।
भारी मात्रा में डिजिटल उपकरण और दस्तावेज बरामद, आने वाले दिनों में और होंगी गिरफ्तारियां
बुधवार को दिन भर चली इस बेहद कड़ी और मुस्तैद छापेमारी के दौरान सुरक्षा बलों को एक बहुत बड़ी सफलता हाथ लगी है। तलाशी दलों ने संदिग्ध ठिकानों से भारी मात्रा में आधुनिक डिजिटल उपकरण, व्यक्तिगत मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक स्टोरेज डिवाइस (मेमोरी कार्ड और हार्ड डिस्क) सहित कई अन्य बेहद महत्वपूर्ण और गोपनीय दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए हैं। जब्त की गई इस सभी सामग्री को तुरंत वैज्ञानिक और फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया गया है, ताकि इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य सक्रिय सदस्यों, आतंकवाद के लिए आने वाले पैसों के स्रोतों (फंडिंग रूट्स) और उनके अन्य संपर्कों के बारे में सटीक जानकारियां जुटाई जा सकें। सुरक्षा अधिकारियों का दृढ़ विश्वास है कि इस बड़ी कार्रवाई से घाटी में सक्रिय स्लीपर सेल के रीढ़ की हड्डी पूरी तरह टूट जाएगी। साथ ही, इस जांच से मिलने वाली नई जानकारियों के आधार पर आने वाले दिनों में कुछ और बड़े चेहरों की गिरफ्तारी और बड़ी कार्रवाइयों से इंकार नहीं किया जा सकता है।
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