एजेंसी, रुड़की। JEE Advanced Data : देश की सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा जेईई एडवांस्ड को लेकर सोशल मीडिया पर चल रही डेटा लीक की खबरों पर अब पूरी तरह से विराम लग गया है। इस साल परीक्षा का संचालन कर रहे नोडल संस्थान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) रुड़की ने शुक्रवार को एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए इन सभी दावों को पूरी तरह से भ्रामक, मनगढ़ंत और तथ्यात्मक रूप से गलत करार दिया है। संस्थान ने साफ किया है कि लाखों अभ्यर्थियों की गोपनीयता और उनके डेटा की सुरक्षा के साथ किसी भी तरह का कोई समझौता नहीं हुआ है और न ही कोई संवेदनशील जानकारी चोरी हुई है।
Claims of a data breach and privacy violation affecting lakhs of JEE (Advanced) aspirants are misleading and factually incorrect.
The information circulating on social media is misleading and does not accurately reflect what happened. There is an attempt at spreading…
— IIT Roorkee (@iitroorkee) June 5, 2026
संस्थान ने इस बात को स्वीकार किया कि क्लाउड स्टोरेज के प्रबंधन तंत्र (कॉन्फिगरेशन) में कुछ समय के लिए एक तकनीकी खामी जरूर आई थी, लेकिन वह बेहद अस्थायी थी और उसे तुरंत ठीक कर लिया गया था। आईआईटी रुड़की का कहना है कि सोशल मीडिया के अलग-अलग मंचों पर इस घटना को लेकर जो भी बातें और क्रेडेंशियल्स साझा किए जा रहे हैं, वे असलियत से कोसों दूर हैं। संस्थान ने आरोप लगाया है कि कुछ तत्वों द्वारा जानबूझकर छात्रों और अभिभावकों के बीच डर का माहौल बनाने और गलत सूचनाएं फैलाने का प्रयास किया जा रहा है, जिसमें कोई सच्चाई नहीं है। गौरतलब है कि जेईई एडवांस्ड परीक्षा के जरिए ही देश के सभी आईआईटी और अन्य शीर्ष तकनीकी संस्थानों के स्नातक पाठ्यक्रमों में छात्रों को दाखिला मिलता है।
तकनीकी सुधार के दौरान सामने आई थी छोटी सी खामी
अपनी बात को और स्पष्ट करने के लिए आईआईटी रुड़की ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक विस्तृत पोस्ट साझा की है। संस्थान के मुताबिक, बीते दो जून को प्रवेश पत्र (एडमिट कार्ड) डाउनलोड करने में कुछ छात्रों को परेशानी आ रही थी। अभ्यर्थियों की इसी समस्या को दूर करने और पूरी पंजीकरण प्रक्रिया को बिना किसी रुकावट के चलाने के लिए तकनीकी टीम द्वारा त्वरित आधार पर कुछ सॉफ्टवेयर सुधार किए गए थे। इसी बदलाव के दौरान इंटरनेट आधारित क्लाउड स्टोरेज के एक छोटे से हिस्से में तकनीकी चूक रह गई थी।
इस तकनीकी कमी को सबसे पहले राइलेन अनिल नाम के एक नैतिक कंप्यूटर विशेषज्ञ (एथिकल हैकर) ने पहचाना और इसकी गोपनीयता बनाए रखते हुए तुरंत इसकी जानकारी सीधे संस्थान के प्रबंधन को दी। उस विशेषज्ञ ने बताया कि इस चूक के कारण डेटाबेस के एक हिस्से तक पहुंच बनाई जा सकती थी। सूचना मिलते ही सुरक्षा टीम ने बिना कोई समय गंवाए सक्रियता दिखाई और उस तकनीकी गड़बड़ी को तुरंत ठीक करते हुए बाहरी पहुंच को पूरी तरह से बंद (ब्लॉक) कर दिया।
छात्रों के अंक, रैंक और परिणामों पर नहीं पड़ेगा कोई असर
संस्थान ने मंगलवार देर रात स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट करते हुए बताया था कि जिस सर्वर और डेटाबेस में यह समस्या आई थी, वह केवल पढ़ने योग्य (रीड-ओनली) मोड में सेट था। इसका सीधा मतलब यह है कि बाहर का कोई भी व्यक्ति उस डेटा के अंदर कोई बदलाव, छेड़छाड़ या प्रविष्टियों को मिटा नहीं सकता था। इसलिए छात्रों के रिकॉर्ड पूरी तरह सुरक्षित और अपरिवर्तित हैं।
आईआईटी रुड़की ने देश के सभी परीक्षार्थियों को भरोसा दिलाया है कि इस पूरी घटना का आने वाले परीक्षा परिणामों पर रत्ती भर भी असर नहीं पड़ेगा। छात्रों के प्राप्तांक, उनकी रैंक और उनकी श्रेणी (कैटेगरी) से जुड़ा सारा डेटा पूरी तरह सुरक्षित और सुरक्षित लॉकर में बंद है। सोशल मीडिया पर चल रही बातें सिर्फ अफवाह मात्र हैं और छात्रों को अपनी आगे की तैयारियों पर ध्यान देना चाहिए।
पूरी तरह सुरक्षित माहौल में आयोजित होगी आगामी काउंसलिंग प्रक्रिया
प्रवेश परीक्षा की शुचिता और विश्वसनीयता को सर्वोपरि बताते हुए आईआईटी रुड़की ने कहा कि वे पूरी परीक्षा प्रणाली, आगामी जोसा (जेओएसएए) काउंसलिंग और सीटों के आवंटन की पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी, निष्पक्ष और अभेद्य बनाए रखने के लिए पूरी तरह से वचनबद्ध हैं। इसमें किसी भी स्तर पर सुरक्षा में चूक की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी।
संस्थान ने अपने संदेश में कहा कि जेईई एडवांस्ड की पूरी प्रशासनिक टीम देश के सभी भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) और भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) में दाखिले की इस यात्रा को सुगम, सरल और सुरक्षित बनाने के लिए हर छात्र के साथ खड़ी है। इससे पहले मंगलवार को भी संस्थान ने पारदर्शी रुख अपनाते हुए माना था कि वर्ष 2026 के परिणाम पोर्टल के क्लाउड सर्वर में एक कॉन्फिगरेशन संबंधी तकनीकी समस्या आई थी, जिसे समय रहते पूरी तरह काबू में कर लिया गया था।
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