एजेंसी, नई दिल्ली। RBI Repo Rate : देश के केंद्रीय बैंक यानी भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति की बहुप्रतीक्षित त्रैमासिक बैठक शुक्रवार को संपन्न हो गई। इस महत्वपूर्ण बैठक के बाद रिजर्व बैंक ने अपनी नई मौद्रिक नीति का एलान करते हुए देश के आम नागरिकों और बाजार को बड़ी राहत दी है। केंद्रीय बैंक ने नीतिगत ब्याज दर यानी रेपो रेट को बिना किसी बदलाव के 5.25 प्रतिशत के पुराने स्तर पर ही बरकरार रखने का एक बड़ा फैसला लिया है। भारतीय रिजर्व बैंक के नवनियुक्त गवर्नर संजय मल्होत्रा ने इस घोषणा की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि छह सदस्यों वाली इस विशेष समिति ने लगातार तीन दिनों तक यानी 3, 4 और 5 जून को मैराथन बैठक की। इस बैठक के दौरान देश और दुनिया की मौजूदा आर्थिक और वित्तीय परिस्थितियों की बहुत ही बारीकी से समीक्षा की गई, जिसके बाद सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से ब्याज दरों को स्थिर रखने के पक्ष में अपना मत दिया।
Points that sum up the Monetary Policy announcement on June 05, 2026:
•Policy Repo Rate remains unchanged at 5.25%
•Marginal Standing Facility (MSF) & Bank Rate remains at 5.50%
•Standing Deposit Facility (SDF) remains at 5.00%
•Real GDP growth for 2026-27 is projected at…— ReserveBankOfIndia (@RBI) June 5, 2026
इस बड़े फैसले के साथ ही केंद्रीय बैंक ने भविष्य के लिए अपनी नीतिगत दिशा यानी पॉलिसी स्टांस को भी ‘न्यूट्रल’ यानी पूरी तरह तटस्थ बनाए रखने की घोषणा की है। रिजर्व बैंक के गवर्नर ने वर्तमान वैश्विक हालातों का जिक्र करते हुए कहा कि बीते अप्रैल महीने में हुई मौद्रिक समीक्षा बैठक के बाद से दुनिया भर का आर्थिक माहौल बहुत ज्यादा चुनौतीपूर्ण और अनिश्चितताओं से घिर गया है। विशेष रूप से पश्चिम एशिया के देशों में लगातार जारी भारी तनाव और वहां बने नाजुक युद्धविराम के हालातों की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा के स्रोतों, खासकर कच्चे तेल की कीमतों में बहुत तेज उछाल आया है। इस वैश्विक संकट के कारण पूरी दुनिया की माल आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) बुरी तरह प्रभावित हो रही है, जिसका सीधा और प्रतिकूल असर दुनिया भर की आर्थिक तरक्की और सामानों की महंगाई दर दोनों पर साफ तौर पर देखने को मिल रहा है।
वैश्विक चुनौतियों के बीच भारतीय बाजार की स्थिति मजबूत
रिजर्व बैंक के गवर्नर ने इस बात को खुलकर स्वीकार किया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईंधन की बढ़ती लागत और माल की आपूर्ति में आने वाली बाधाओं के कारण आने वाले समय में दुनिया भर की आर्थिक गतिविधियों पर दबाव काफी हद तक बढ़ सकता है। इसके बावजूद उन्होंने देश को भरोसा दिलाते हुए कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था इतनी मजबूत स्थिति में है कि वह इस प्रकार के बाहरी आर्थिक झटकों का सामना पूरी ताकत के साथ करने में पूरी तरह सक्षम है। इसके साथ ही देश की इस आर्थिक मजबूती को और ज्यादा बढ़ाने के लिए सरकार और रिजर्व बैंक की ओर से लगातार ठोस प्रयास भी किए जा रहे हैं।
संजय मल्होत्रा ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वैश्विक स्तर पर इतनी बड़ी उथल-पुथल होने के बावजूद भारत में आम उपभोक्ताओं से जुड़ी खुदरा महंगाई दर (सीपीआई) अभी भी रिजर्व बैंक द्वारा तय किए गए सुरक्षित लक्ष्य के दायरे से नीचे बनी हुई है। इसका एक मुख्य कारण यह भी है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ी हुई कीमतों का पूरा असर अभी हमारे घरेलू बाजारों तक सीधे तौर पर नहीं पहुंच पाया है। हालांकि, केंद्रीय बैंक ने आगाह भी किया है कि आने वाले कुछ महीनों में देश के भीतर महंगाई के आंकड़े ऊपर की तरफ भाग सकते हैं और यह रिजर्व बैंक द्वारा निर्धारित की गई ऊपरी सुरक्षा सीमा के बेहद करीब तक पहुंच सकती है।
महंगाई के जोखिम को देखते हुए केंद्रीय बैंक पूरी तरह मुस्तैद
गवर्नर के अनुसार, हालांकि इस समय महंगाई से जुड़े कई तरह के अप्रत्याशित जोखिम काफी बढ़ गए हैं, लेकिन मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए तुरंत ब्याज दरों में किसी भी तरह का फेरबदल करने के बजाय स्थिति को थोड़ा और साफ होने देने का विवेकपूर्ण निर्णय लिया गया है। भारतीय रिजर्व बैंक आने वाले समय में भी पूरी तरह से जमीनी आंकड़ों और तथ्यों के आधार पर ही अपने फैसले लेगा। इसके साथ ही बैंक प्रशासन देश के भीतर महंगाई की चाल और सामानों की आपूर्ति से जुड़े हर छोटे-बड़े दबाव पर लगातार अपनी पैनी नजर बनाए रखेगा ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत कदम उठाए जा सकें।
मजबूत जीडीपी और औद्योगिक विकास से मिला सहारा
आर्थिक तरक्की की रफ्तार का ब्यौरा देते हुए गवर्नर ने कहा कि राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा जारी किए गए दूसरे अग्रिम अनुमानों के मुताबिक, पिछले पूरे वित्त वर्ष के दौरान भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की विकास दर बेहद शानदार 7.6 प्रतिशत दर्ज की गई थी। देश की इस मजबूत तरक्की को मुख्य रूप से घरेलू स्तर पर होने वाले निजी उपभोग, नए निवेश, भारी विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और सेवा क्षेत्र (सर्विस सेक्टर) के बेहतरीन और दमदार प्रदर्शन से बहुत बड़ा सहारा मिला है। उन्होंने खुशी जताते हुए कहा कि पश्चिम एशिया में इतना बड़ा भू-राजनैतिक तनाव शुरू होने के बावजूद भारत की आंतरिक आर्थिक गतिविधियां काफी हद तक स्थिर और मजबूत बनी हुई हैं। देश के विनिर्माण और सेवा क्षेत्र के पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) के ताजा आंकड़े भी साफ दर्शाते हैं कि दोनों ही क्षेत्रों में लगातार मजबूती बनी हुई है और देश के उद्योग जगत का कारोबारी भरोसा भी काफी सकारात्मक नजर आ रहा है।
रिजर्व बैंक की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय उपभोक्ताओं द्वारा किया जाने वाला खर्च, विशेष रूप से अपनी सुख-सुविधाओं की चीजों पर होने वाला विवेकाधीन खर्च अब तक बाजार में बहुत मजबूत बना हुआ है। दूसरी तरफ, उद्योगों के संचालन की लागत बढ़ने के बावजूद देश के भीतरी निवेश कार्यों में भी लगातार तेजी देखी जा रही है। इसके अलावा वैश्विक स्तर पर समुद्री माल ढुलाई के भाड़े और बीमा की लागतों में भारी बढ़ोतरी होने के बावजूद, बीते अप्रैल महीने में भारत से होने वाले माल के निर्यात में एक बहुत ही अच्छी और उत्साहजनक वृद्धि दर्ज की गई है।
मानसून और खेती को लेकर रिजर्व बैंक की विशेष चेतावनी
इन सभी सकारात्मक पहलुओं के बीच रिजर्व बैंक ने देश को एक जरूरी चेतावनी भी जारी की है। बैंक का कहना है कि देश के दक्षिण-पश्चिम मानसून में संभावित कमी या देरी होने का सीधा असर हमारे कृषि उत्पादन और ग्रामीण इलाकों की बाजार मांग पर पड़ सकता है। हालांकि, राहत की बात यह है कि केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाएं, जैसे कि फसलों का विविधीकरण, आधुनिक जल संरक्षण तकनीक, वर्षा जल का संचयन, मौसम के अनुकूल खेती को बढ़ावा देना और कम समय में तैयार होने वाली विशेष फसलों की बुवाई जैसी रणनीतियां इस संभावित कृषि संकट के प्रभाव को काफी हद तक कम करने में मददगार साबित हो सकती हैं।
गवर्नर ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि हमारे सेवा क्षेत्र में बनी हुई लगातार मजबूती, वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के मोर्चे पर हुए सुधारों के सकारात्मक प्रभाव और देश में रोजगार की अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई स्थिति के कारण शहरों में रहने वाले लोगों की खपत लगातार बनी रहेगी। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि अंतरराष्ट्रीय कारणों से बढ़ती हुई महंगाई आने वाले दिनों में सामान्य मध्यमवर्गीय परिवारों की क्रय शक्ति यानी जेब पर कुछ दबाव जरूर डाल सकती है। रिजर्व बैंक ने बिल्कुल साफ कर दिया है कि मौजूदा वैश्विक अनिश्चितताओं और ईंधन की आसमान छूती कीमतों को देखते हुए केंद्रीय बैंक भविष्य में भी पूरी तरह सतर्क और सावधान रहेगा। फिलहाल के लिए ब्याज दरों को स्थिर रखकर बाजार को समय दिया गया है, लेकिन आने वाले महीनों की आर्थिक परिस्थितियों को देखकर ही आगे की नई रणनीतियां तैयार की जाएंगी।
ये भी पढ़े : आईएसआई और अंडरवर्ल्ड आतंकी नेटवर्क मामले में सुरक्षा एजेंसियों का बड़ा एक्शन, मुंबई से संदिग्ध हुजैफा गिरफ्तार
ताज़ा अपडेट और ब्रेकिंग न्यूज़ के लिए हमारे फेसबुक पेज से जुड़ें और STPV.live के साथ अपडेट रहें


