एजेंसी, जकार्ता। Indonesia Ferry Fire : इंडोनेशिया में रविवार सुबह एक भयानक समुद्री हादसा सामने आया जब मादुरा द्वीप के पास एक यात्रियों से भरी फेरी में अचानक भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि बोट पर सवार यात्रियों के बीच हड़कंप मच गया और कई लोगों ने जान बचाने के लिए सीधे समुद्र में छलांग लगा दी। अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, इस भीषण अग्निकांड में कम से कम 5 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 41 यात्री अब भी लापता हैं। सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और रेस्क्यू टीमों ने बड़े पैमाने पर राहत अभियान शुरू कर दिया है।
#Indonesia: Five persons lost their lives, and 41 are still missing after a ferry carrying 271 passengers and crew caught fire while at sea off Madura Island.
The country’s Search and Rescue Agency said that of those on board, 225 have been rescued so far. pic.twitter.com/itPGhW9EBb
— All India Radio News (@airnewsalerts) August 2, 2026
271 यात्रियों और क्रू मेंबर से भरी थी फेरी, 225 का किया गया रेस्क्यू
इंडोनेशिया की राष्ट्रीय सर्च एंड रेस्क्यू एजेंसी से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस दुर्घटनाग्रस्त फेरी में कुल 271 यात्री और क्रू मेंबर सवार थे। यह फेरी ईस्ट जावा प्रांत के सुराबाया शहर से रवाना होकर साउथ सुलावेसी के मकासार शहर की तरफ जा रही थी। रास्ते में जैसे ही यह मादुरा द्वीप के करीब पहुंची, इसमें अचानक आग की लपटें उठने लगीं। दोपहर तक चलाए गए त्वरित रेस्क्यू ऑपरेशन के तहत 225 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया है। बचाए गए लोगों को लाइफगार्ड ट्यूब्स और बचाव नावों की मदद से सुरक्षित तट तक लाया गया, जबकि समुद्र में लापता अन्य यात्रियों की तलाश जारी है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुए रोंगटे खड़े करने वाले विजुअल्स
घटनास्थल से सामने आए वीडियो और तस्वीरों में देखा जा सकता है कि दुर्घटनाग्रस्त फेरी के पिछले हिस्से से काले धुएं का विशाल गुबार निकल रहा था। जान बचाने के लिए बेबस यात्री फेरी के अगले हिस्से में एकत्र हो गए और अपनी जान बचाने के लिए एक-एक करके उफनते समुद्र में कूदने लगे। बचाव दल ने मौके पर पहुंचकर तुरंत पानी में तैर रहे लोगों को लाइफगार्ड ट्यूब प्रदान किए ताकि वे डूबने न पाएं। आग लगने की वास्तविक वजह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाई है, और अधिकारी तकनीकी जांच में जुटे हैं।
इंडोनेशिया में सुरक्षा मानकों की अनदेखी से पहले भी हुए हैं बड़े हादसे
17 हजार से अधिक द्वीपों वाले देश इंडोनेशिया में एक द्वीप से दूसरे द्वीप तक जाने के लिए फेरी बोट्स ही यातायात का मुख्य साधन हैं। हालांकि, सुरक्षा नियमों में ढिलाई और जहाजों के पुराने होने के कारण यहाँ लगातार बड़े हादसे होते रहे हैं। इससे पहले जुलाई 2025 में नॉर्थ सुलावेसी के पास ‘केएम बार्सिलोना 5’ नाम की फेरी में आग लगने से 3 लोगों की मौत हुई थी। इसके अलावा मई 2021 में ‘केएम कार्य इंदाह’ नामक फेरी भी टरनेटे के पास जलकर खाक हो गई थी, जहां यात्रियों को अपनी जान बचाने के लिए समुद्र में कूदना पड़ा था।
फेरी हादसों के पीछे पुरानी नावें, ओवरलोडिंग और खराब मौसम प्रमुख कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, इंडोनेशिया में बार-बार होने वाले समुद्री हादसों के पीछे कई मूलभूत कारण जिम्मेदार हैं। अधिकांश फेरी बोट्स काफी पुरानी हो चुकी हैं और उनका नियमित मेंटेनेंस नहीं कराया जाता। इसके अतिरिक्त निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों और भारी सामान को लादना (ओवरलोडिंग) भी एक बड़ी समस्या है। समुद्र में अचानक बदलने वाला खराब मौसम, तेज धाराएं और ऊंची लहरें दुर्घटना की आशंका को और बढ़ा देती हैं। सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन न होना और नियमित जांच तंत्र की कमी के चलते हर साल कई निर्दोष लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ती है।
इस पूरे मामले और मुख्य बिंदुओं को समझने के लिए नीचे दिए गए प्रमुख प्रश्नों और उनके उत्तरों को पढ़ें :
प्रश्न 1: यह बड़ा समुद्री हादसा किस देश और किस द्वीप के पास हुआ?
उत्तर 1: यह हादसा इंडोनेशिया के मादुरा द्वीप के करीब समुद्र में घटित हुआ।
प्रश्न 2: फेरी पर कुल कितने लोग सवार थे और कितनों को बचाया गया?
उत्तर 2: दुर्घटनाग्रस्त फेरी बोट में कुल 271 यात्री और क्रू मेंबर मौजूद थे, जिनमें से 225 लोगों को सुरक्षित बचा लिया गया।
प्रश्न 3: हादसे में कुल कितने लोगों की मृत्यु हुई और कितने लापता हैं?
उत्तर 3: इस अग्निकांड में 5 लोगों की मृत्यु हो चुकी है, जबकि 41 यात्री अभी भी लापता हैं जिनकी तलाश जारी है।
प्रश्न 4: दुर्घटनाग्रस्त फेरी बोट किस समुद्री मार्ग पर यात्रा कर रही थी?
उत्तर 4: यह फेरी ईस्ट जावा प्रांत के सुराबाया शहर से साउथ सुलावेसी के मकासार शहर की ओर जा रही थी।
प्रश्न 5: इंडोनेशिया में बार-बार होने वाले फेरी हादसों के मुख्य कारण क्या हैं?
उत्तर 5: जहाजों का पुराना होना, नियमित मरम्मत न होना, क्षमता से अधिक यात्रियों व सामान की ओवरलोडिंग और अचानक खराब मौसम इसके मुख्य कारण हैं।
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