एजेंसी, मंडी। Mandi Earthquake News : हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध धार्मिक और सांस्कृतिक नगर मंडी में रविवार सुबह अचानक भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर पैमाने पर इस भूकंप की तीव्रता 3.1 दर्ज की गई। राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के अनुसार, भूकंप का केंद्र मंडी जिले में ही जमीन के अंदर 8 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। गनीमत यह रही कि भूकंप की तीव्रता काफी कम थी, जिसकी वजह से इलाके में किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली है।
EQ of M: 3.1, On: 02/08/2026 09:13:18 IST, Lat: 31.445 N, Long: 76.993 E, Depth: 8 Km, Location: Mandi, Himachal Pradesh.
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सुबह 9:13 बजे कांपी धरती, घरों से बाहर निकले लोग
भूकंप के यह हल्के झटके रविवार सुबह 9:13 बजे महसूस किए गए। उस समय रविवार की छुट्टी होने के कारण कई लोग अपने घरों में आराम कर रहे थे। अचानक धरती हिलने और बर्तनों तथा खिड़कियों के खड़खड़ाने का एहसास होते ही लोगों में डर का माहौल बन गया। एहतियात के तौर पर लोग तुरंत अपने मकानों से बाहर निकलकर खुली जगह और मैदानों की तरफ भागे। कुछ देर तक स्थिति सामान्य होने का इंतजार करने और राहत की सांस लेने के बाद लोग वापस अपने घरों में लौटे।
अति संवेदनशील जोन 4 और 5 में आता है हिमाचल प्रदेश
भौगोलिक दृष्टि से देखा जाए तो पूरा हिमाचल प्रदेश राज्य भूकंपीय गतिविधि के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। भारत के भूकंपीय जोन वर्गीकरण के अनुसार, पूरे देश को 5 अलग-अलग जोखिम जोन में विभाजित किया गया है, जिसमें जोन 1 सबसे सुरक्षित और जोन 5 सबसे खतरनाक माना जाता है। हिमाचल प्रदेश के चंबा, लाहौल-स्पीति, किन्नौर और कांगड़ा जिले पूरी तरह से जोन 5 में आते हैं, जबकि राजधानी शिमला का कुछ हिस्सा भी इसी अति संवेदनशील श्रेणी में शामिल है। इसके अलावा मंडी, कुल्लू, बिलासपुर, हमीरपुर, सोलन और ऊना जिले हाई रिस्क यानी जोन 4 में शामिल हैं।
रिक्टर स्केल का गणित और नुकसान की संभावनाएं
वैज्ञानिक दृष्टिकोण से 5.0 तीव्रता से नीचे के भूकंप आमतौर पर सुरक्षित माने जाते हैं और इनसे किसी बड़े ढांचे को नुकसान नहीं पहुंचता है। हालांकि, 5.0 या उससे अधिक तीव्रता वाले भूकंपों को खतरनाक माना जाता है, जिनसे इमारतों के गिरने और जान-माल की हानि होने की आशंका बढ़ जाती है। रिक्टर स्केल का प्रत्येक अगला अंक पिछले अंक की तुलना में 10 गुना अधिक ऊर्जा और शक्ति दर्शाता है। उदाहरण के लिए, 6.0 तीव्रता का भूकंप 5.0 तीव्रता वाले भूकंप से 10 गुना अधिक विनाशकारी होता है। इसके अलावा, भूकंप का हाइपोसेंटर यानी केंद्र धरती की सतह से जितना कम गहराई पर होगा, सतह पर उसके झटके और तबाही का असर उतना ही अधिक देखने को मिलता है।
इस पूरे मामले और मुख्य बिंदुओं को समझने के लिए नीचे दिए गए प्रमुख प्रश्नों और उनके उत्तरों को पढ़ें :
प्रश्न 1: हिमाचल प्रदेश के किस क्षेत्र में भूगर्भीय झटके महसूस किए गए?
उत्तर 1: हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध सांस्कृतिक व धार्मिक नगर मंडी में भूकंप के झटके महसूस किए गए।
प्रश्न 2: भूकंप की तीव्रता कितनी मापी गई और इसका केंद्र कहाँ स्थित था?
उत्तर 2: रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 3.1 दर्ज की गई और इसका केंद्र मंडी जिले में जमीन से 8 किलोमीटर की गहराई में था।
प्रश्न 3: हिमाचल प्रदेश के कौन से जिले अति संवेदनशील भूकंपीय जोन 5 के अंतर्गत आते हैं?
उत्तर 3: हिमाचल प्रदेश के चंबा, कांगड़ा, किन्नौर और लाहौल-स्पीति जिले पूरी तरह से सबसे खतरनाक जोन 5 में आते हैं।
प्रश्न 4: मंडी जिला किस सिस्मिक जोन की श्रेणी में आता है?
उत्तर 4: मंडी जिला हाई रिस्क वाले भूकंपीय जोन 4 के अंतर्गत शामिल है।
प्रश्न 5: रिक्टर पैमाने पर किस तीव्रता का भूकंप नुकसानदेह माना जाता है?
उत्तर 5: वैज्ञानिकों के अनुसार रिक्टर पैमाने पर 5.0 या उससे अधिक तीव्रता वाले भूकंप को खतरनाक और विनाशकारी माना जाता है।
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