एजेंसी, काबुल। Eastern Afghanistan Flash Floods : भारतीय उपमहाद्वीप में इन दिनों मूसलाधार बारिश और कुदरत के कहर का भीषण रूप देखने को मिल रहा है। भारत और चीन के अलग-अलग हिस्सों में भारी तबाही के बाद अब पूर्वी अफगानिस्तान में अचानक आई भीषण बाढ़ यानी फ्लैश फ्लड ने भयानक तबाही मचाई है। अफगान आपदा प्रबंधन अधिकारियों द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार इस भयंकर प्राकृतिक आपदा में कम से कम 20 लोगों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि 80 से अधिक नागरिक गंभीर रूप से घायल हैं। इसके अलावा बाढ़ के तेज पानी के बहाव में बह जाने के कारण 100 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं, जिनकी तलाश में राहत और बचाव दल लगातार जुटे हुए हैं।
🌊 Search and rescue efforts continue after severe flash floods hit Afghanistan’s eastern Nuristan province, killing at least 23 people
📌 More than 100 people remain missing, at least 80 others are injured and thousands are displaced https://t.co/JPVuGDCzrN pic.twitter.com/tPhrQ20tEo
— Anadolu English (@anadoluagency) July 21, 2026
नूरिस्तान प्रांत में तबाही, ढहे सैकड़ों कच्चे मकान और 10 प्रांतों में अलर्ट
अफगानिस्तान राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि इस कुदरती तबाही का सबसे भयंकर और जानलेवा असर पूर्वी प्रांत नूरिस्तान में देखने को मिला है। नूरिस्तान के पारून और आसपास के दुर्गम इलाकों में अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। पहाड़ों से आए पानी के प्रचंड वेग और उफनती नदियों के तेज बहाव में सैकड़ों मकान ताश के पत्तों की तरह ढह गए और खेतों में खड़ी फसलें पूरी तरह जलमग्न हो गईं। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में बेबस ग्रामीण जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों की ओर भागते दिखाई दे रहे हैं। बिगड़ते मौसम को देखते हुए प्रशासन ने देश के 34 में से 10 संवेदनशील प्रांतों में भारी बारिश, धूल भरी आंधी और बाढ़ का अलर्ट जारी किया है।
जर्जर बुनियादी ढांचा और जलवायु परिवर्तन ने बढ़ाई त्रासदी की भयावहता
आपदा प्रबंधन विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि वे नदियों के तटों और संभावित जोखिम वाले संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों से दूर रहें। विशेषज्ञों का मानना है कि अफगानिस्तान में दशकों से जारी संघर्ष, खस्ताहाल बुनियादी ढांचे, कमजोर अर्थव्यवस्था, अंधाधुंध जंगलों की कटाई और जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणामों ने इस त्रासदी को और अधिक भयावह बना दिया है। खासकर ग्रामीण और पहाड़ी इलाकों में बने कच्चे मिट्टी के घर बाढ़ के तेज थपेड़ों को बर्दाश्त करने में पूरी तरह असमर्थ साबित हो रहे हैं। उल्लेखनीय है कि इससे पहले चालू वर्ष 2026 की शुरुआत में भी अफगानिस्तान के कई हिस्सों में बाढ़ और भूस्खलन के कारण 110 से अधिक लोगों की अकाल मृत्यु हो चुकी थी।
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