Delhi Hotel Fire

विदेश मंत्रालय ने जारी की दिल्ली अग्निकांड में मृत 13 विदेशी नागरिकों की सूची, मोजाम्बिक और नाइजीरिया समेत कई देशों के लोग थे शामिल

देश/प्रदेश नई दिल्ली राष्ट्रीय

एजेंसी, नई दिल्ली। Delhi Hotel Fire : देश की राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में स्थित एक होटल में बीते बुधवार को हुए भीषण अग्निकांड को लेकर विदेश मंत्रालय ने एक बहुत बड़ा खुलासा किया था। मंत्रालय द्वारा जारी की गई आधिकारिक सूची के अनुसार, इस दर्दनाक हादसे में अपनी जान गंवाने वाले कुल 21 लोगों में से 13 नागरिक विभिन्न देशों के रहने वाले विदेशी सैलानी थे। भारत सरकार ने इस भीषण हादसे पर गहरा दुख प्रकट करते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त की थीं और साफ किया था कि सरकार सभी संबंधित देशों के दूतावासों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है।

विदेश मंत्रालय के मुख्य प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अपनी साप्ताहिक प्रेस वार्ता के दौरान इस घटना की विस्तृत जानकारी साझा की थी। उन्होंने बताया था कि इस दर्दनाक अग्निकांड में जान गंवाने वाले विदेशी नागरिकों में मोजाम्बिक, नाइजीरिया, लाइबेरिया, किर्गिस्तान, उज्बेकिस्तान, बांग्लादेश, कांगो और इराक जैसे देशों के मूल निवासी शामिल थे। प्रवक्ता ने यह भी जानकारी दी थी कि इस भयावह अग्निकांड की चपेट में आने से लगभग 20 से 22 अन्य विदेशी नागरिक भी गंभीर रूप से झुलस गए थे, जिन्हें इलाज के लिए तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया था।

विदेश मंत्रालय ने जारी किया मृतकों का पूरा आंकड़ा

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, आग की इस विनाशकारी घटना में नाइजीरिया देश के सबसे ज्यादा यानी चार नागरिकों की मौत हुई थी। इसके अलावा किर्गिस्तान के तीन नागरिक, मोजाम्बिक का एक, लाइबेरिया का एक, उज्बेकिस्तान का एक, बांग्लादेश का एक, कांगो का एक और इराक के एक नागरिक ने इस हादसे में अपनी जान गंवाई थी। विदेश मंत्रालय ने आश्वस्त किया था कि अस्पताल में भर्ती सभी घायल विदेशी नागरिकों को हरसंभव उच्च स्तरीय चिकित्सा सहायता और सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके साथ ही उनके आपातकालीन दस्तावेजी कार्यों और कागजी प्रक्रियाओं को पूरा करने के लिए भी सरकारी टीमें लगातार मदद कर रही थीं।

यह भीषण हादसा मालवीय नगर के एक ‘बेड एंड ब्रेकफास्ट’ होटल में अचानक घटित हुआ था। आग इतनी तेजी से फैली थी कि होटल के भीतर ठहरे हुए लोगों को बाहर निकलने का मौका तक नहीं मिल सका था। इस वजह से कई लोग मलबे और धुएं के बीच फंस गए और दम घुटने के कारण उनकी मौत हो गई थी। मृतकों और घायलों में बहुत बड़ी संख्या में विदेशी नागरिकों के शामिल होने की वजह से यह पूरा मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बेहद चर्चा में आ गया था।

होटल का मुख्य मालिक गिरफ्तार, कोर्ट ने चार दिन की रिमांड पर भेजा था

इस भीषण लापरवाही और अग्निकांड के मामले में मुस्तैदी दिखाते हुए दिल्ली पुलिस ने होटल के सह-मालिक लवकेश बजाज को तुरंत गिरफ्तार कर लिया था। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को दिल्ली की साकेत अदालत में पेश किया गया था, जहां से न्यायाधीश ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपी को चार दिन की पुलिस कस्टडी (रिमांड) में भेजने का आदेश जारी कर दिया था।

पुलिस प्रशासन ने आरोपी मालिक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न कड़े कानूनों के तहत मुकदमा दर्ज किया था। आरोपी पर गैर-इरादतन हत्या, जानबूझकर आग लगाकर संपत्ति को नुकसान पहुंचाना, भारी लापरवाही बरतकर निर्दोष लोगों की जान को खतरे में डालना और सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने जैसी कई गंभीर धाराएं लगाई गई थीं, जिनमें सख्त सजा का प्रावधान है।

सुरक्षा मानकों की जांच में जुटी पुलिस की विशेष टीमें

अदालत से रिमांड मिलने के बाद पुलिस की तकनीकी और फॉरेंसिक टीमें इस बात की गहनता से जांच कर रही थीं कि क्या होटल के संचालन में अग्निशमन विभाग और स्थानीय प्रशासन के जरूरी सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था या नहीं। पुलिस अधिकारी इस बात का भी सुराग लगा रहे थे कि होटल के भीतर आग लगने की मुख्य वजह क्या थी, वहां आग बुझाने के आधुनिक इंतजाम काम कर रहे थे या नहीं और इस पूरे हादसे के लिए असल में किसकी लापरवाही सबसे ज्यादा जिम्मेदार थी।

प्रशासनिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी लवकेश बजाज दिल्ली के कई अन्य इलाकों में भी हॉस्पिटैलिटी और होटल उद्योग से जुड़ी इकाइयों का संचालन करता है। जिस बहुमंजिला इमारत में यह भयानक आग लगी, उसका वह मुख्य मालिकाना हक रखता था। पुलिस इस बात की भी फाइलों से तफ्तीश कर रही थी कि होटल में ठहरने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों की सुरक्षा और आपातकालीन रास्तों को लेकर कहीं पहले भी तो कोई गंभीर शिकायतें सामने नहीं आई थीं।

विदेशी दूतावासों के साथ मिलकर काम कर रही है सरकार

विदेश मंत्रालय ने देश और दुनिया को आश्वस्त करते हुए कहा था कि भारत सरकार इस संकट की घड़ी में पूरी तरह मुस्तैद है। हादसे का शिकार हुए सभी मृत और घायल नागरिकों के देशों के राजनयिकों और दूतावासों को घटना की पल-पल की जानकारी दी जा रही थी। घायलों के बेहतर इलाज, शवों को उनके देश ससम्मान वापस भेजने की जरूरी कागजी कार्रवाई और अन्य सभी प्रकार की मदद के लिए भारत की सभी सुरक्षा और प्रशासनिक एजेंसियां आपस में मिलकर दिन-रात काम कर रही थीं।

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