India Satellite

अंतरिक्ष से चीन और पाकिस्तान की हर नापाक चाल पर भारत रखेगा पैनी नजर, सरकार ने 52 सैटेलाइट्स के महाप्रोजेक्ट को दी हरी झंडी

देश/प्रदेश नई दिल्ली राष्ट्रीय

एजेंसी, नई दिल्ली। India Satellite : देश की सीमाओं की सुरक्षा और सैन्य ताकत को अंतरिक्ष में एक नई तथा अभूतपूर्व मजबूती देने के लिए भारत सरकार ने एक बहुत ही बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने रक्षा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाली ‘स्पेस बेस्ड सर्विलांस फेज-III’ यानी अंतरिक्ष आधारित निगरानी परियोजना के तीसरे चरण को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। इस महाप्रोजेक्ट के अंतर्गत अंतरिक्ष में कुल 52 अत्याधुनिक सैटेलाइटों (उपग्रहों) का एक विशाल और अभेद्य नेटवर्क तैयार किया जाएगा। इस बेहद रणनीतिक योजना का मुख्य उद्देश्य भारत के दो पड़ोसी देशों, चीन और पाकिस्तान की तरफ से मिलने वाली किसी भी प्रकार की सैन्य चुनौती या सुरक्षा खतरे पर हर पल नजर रखना है। यह आधुनिक नेटवर्क भारत की स्थलीय सीमाओं के साथ-साथ विशाल समुद्री क्षेत्रों की भी चौबीसों घंटे निगरानी करेगा और देश के सैन्य संचार तंत्र को पूरी तरह से सुरक्षित और अचूक बनाएगा। सरकार ने इस पूरे नेटवर्क को साल 2025 से लेकर 2029 के बीच अलग-अलग चरणों में अंतरिक्ष में पूरी तरह स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

इस बेहद महत्वाकांक्षी परियोजना की सबसे उल्लेखनीय और आधुनिक विशेषता यह है कि कुल 52 सैटेलाइटों में से 31 सैटेलाइटों का निर्माण, विकास और संचालन देश की निजी कंपनियों द्वारा किया जाएगा। यह कदम भारत सरकार की नई स्पेस पॉलिसी 2026 यानी अंतरिक्ष नीति के तहत देश के प्राइवेट सेक्टर को रणनीतिक रूप से बढ़ावा देने की नीति को साफ तौर पर दर्शाता है। भारत के रक्षा विशेषज्ञों और सरकार का यह साफ मानना है कि भविष्य में लड़े जाने वाले किसी भी युद्ध में अंतरिक्ष आधारित अत्याधुनिक तकनीक ही सबसे बड़ी और निर्णायक भूमिका निभाएगी, और यही वजह है कि भारत इस क्षेत्र में अपनी पकड़ को समय रहते बेहद मजबूत कर रहा है।

अंतरिक्ष को माना गया युद्ध का नया और आधुनिक मोर्चा

भारत की यह नई और व्यापक अंतरिक्ष घेराबंदी पूरी तरह से साल 2025 में कोलकाता में घोषित की गई जॉइंट मिलिट्री स्पेस डॉक्ट्रिन यानी संयुक्त सैन्य अंतरिक्ष सिद्धांत पर आधारित है। इस नई सैन्य नीति के तहत देश के इतिहास में पहली बार आधिकारिक और औपचारिक रूप से अंतरिक्ष को युद्ध रणनीति का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और अनिवार्य हिस्सा माना गया है। रक्षा दस्तावेजों में अब अंतरिक्ष को एक “प्रतिस्पर्धी युद्धक्षेत्र” के रूप में पूरी तरह स्वीकार किया जा चुका है, जहां बढ़त बनाए रखना देश की संप्रभुता के लिए बेहद जरूरी है।

सुरक्षा रणनीति के तहत भारत का यह नया अंतरिक्ष ढांचा पृथ्वी की निचली कक्षा यानी लो-अर्थ ऑर्बिट (एलईओ) में स्थापित किया जा रहा है। इसमें बड़े और भारी सैटेलाइटों के बजाय कई सारे छोटे, बेहद हल्के और अत्यंत तेज गति से काम करने वाले सैटेलाइटों का एक जाल बुना जाएगा। रक्षा वैज्ञानिकों के अनुसार, पुराने और बड़े सैटेलाइटों की तुलना में यह नई प्रणाली सामरिक रूप से बहुत अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद मानी जाती है। इसकी मुख्य वजह यह है कि यदि भविष्य में युद्ध के दौरान दुश्मन देश किसी एक या दो सैटेलाइटों पर हमला करके उन्हें नष्ट भी कर देता है, तब भी भारत का पूरा सर्विलांस नेटवर्क प्रभावित नहीं होगा और बाकी के सैटेलाइट्स बिना रुके देश की निगरानी का काम लगातार जारी रखेंगे।

खराब मौसम और अंधेरी रात में भी दुश्मन पर रहेगी पैनी नजर

अंतरिक्ष में भेजे जाने वाले इन सभी नए सैटेलाइटों को दुनिया की सबसे आधुनिक जासूसी तकनीकों से लैस किया जा रहा है। इनमें उच्च क्षमता वाले सिंथेटिक अपर्चर रडार (एसएआर) और बहुत ही बारीक तस्वीरें लेने वाले हाई-रिजॉल्यूशन ऑप्टिकल सेंसर लगाए जाएंगे। इस आधुनिक तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि घने बादलों, बेहद खराब मौसम, भयंकर धुंध या फिर कड़ाके की अंधेरी रात में भी दुश्मन की हर एक छोटी से छोटी हरकत और गतिविधियों पर बिल्कुल साफ नजर रखी जा सकेगी।

इसके साथ ही, इस नेटवर्क में शामिल विशेष और सुरक्षित कम्युनिकेशन सिस्टम भारतीय सेना के कमांड-एंड-कंट्रोल नेटवर्क को पहले से कहीं ज्यादा अभेद्य और मजबूत बना देंगे, जिससे युद्ध जैसी स्थिति में खुफिया जानकारियों का आदान-प्रदान बिना किसी बाधा के तुरंत किया जा सकेगा। इस प्रोजेक्ट के तहत कुछ ऐसे विशेष सैटेलाइट भी अंतरिक्ष की कक्षा में तैनात किए जा रहे हैं जिनका मुख्य काम केवल अंतरिक्ष के भीतर ही दूसरे दुश्मन देशों के सैटेलाइटों की चाल और उनकी संदिग्ध गतिविधियों की टोह लेना होगा।

जवाबी काउंटर-स्पेस क्षमताएं विकसित करने में जुटा भारत

अंतरराष्ट्रीय रक्षा रिपोर्टों से छनकर आ रही जानकारियों के मुताबिक, भारत अब खुद को केवल सीमाओं की जासूसी और निगरानी करने तक ही सीमित नहीं रखना चाहता है। भारतीय रक्षा वैज्ञानिक अब इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर यानी इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और संभावित काउंटर-स्पेस क्षमताओं को बहुत तेजी से विकसित करने पर दिन-रात काम कर रहे हैं। इस उन्नत तकनीक के जरिए युद्ध के समय दुश्मन देश के पूरे सैटेलाइट संचार तंत्र को जाम या पूरी तरह बाधित किया जा सकेगा, जिससे उनकी सेनाएं पंगु हो जाएंगी। यह तकनीक अंतरिक्ष में भारत की संपत्तियों को सुरक्षा कवच प्रदान करने में भी पूरी तरह सहायक सिद्ध होगी।

अमेरिका और ब्रिटेन की आधुनिक सैन्य राह पर चला भारत

वर्तमान समय में दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश जैसे अमेरिका और ब्रिटेन भी अब अंतरिक्ष में अपने पुराने और बड़े उपग्रहों को बदलकर इसी तरह के छोटे और चारों तरफ फैले हुए वितरित सैटेलाइट नेटवर्क की तकनीक को बहुत तेजी से अपना रहे हैं। इन विकसित देशों द्वारा अपनी रणनीति बदलने की सबसे मुख्य वजह दुनिया भर में तेजी से बढ़ते एंटी-सैटेलाइट हथियारों (सैटेलाइट मार गिराने वाली मिसाइलों) का गंभीर खतरा है। भारत ने भी दुनिया के इन आधुनिक सैन्य अनुभवों और युद्धों से बहुत बड़ी सीख लेते हुए अपने अंतरिक्ष ढांचे को अत्यधिक लचीला, चालाक और मजबूत बनाने का यह दूरदर्शी फैसला किया है।

वैश्विक सामरिक विशेषज्ञों का यह स्पष्ट रूप से मानना है कि आने वाले आधुनिक युग में युद्ध केवल जमीन की सीमाओं, गहरे समुद्रों और खुले आसमान तक ही सीमित नहीं रहने वाले हैं। अब भविष्य के युद्धों का फैसला अंतरिक्ष की ऊंचाइयों और साइबर जगत के डिजिटल गलियारों से ही तय होगा। ऐसे में भारत सरकार द्वारा हरी झंडी दिखाया गया यह 52-सैटेलाइटों का महानेटवर्क देश की संपूर्ण सुरक्षा व्यवस्था को एक नया और अभेद्य सुरक्षा चक्र प्रदान करेगा, जिससे हमारी सीमाओं पर चौबीसों घंटे बिना पलक झपकाए कड़ी निगरानी रखी जा सकेगी।

ये भी पढ़े : अहमदाबाद में अवैध घुसपैठ के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों का बड़ा एक्शन : 166 बांग्लादेशी नागरिकों समेत 300 से अधिक संदिग्ध हिरासत में

ताज़ा अपडेट और ब्रेकिंग न्यूज़ के लिए हमारे फेसबुक पेज से जुड़ें और STPV.live के साथ अपडेट रहें

Leave a Reply