एजेंसी, नई दिल्ली/सिंगापुर। Byju Raveendran jail news : शिक्षा तकनीक के क्षेत्र में कभी अग्रणी स्थान रखने वाली कंपनी बायजूज़ के मुख्य प्रवर्तक बायजू रवींद्रन की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। सिंगापुर के एक प्रतिष्ठित न्यायालय ने मांगी गई बेहद महत्वपूर्ण जानकारियां और दस्तावेज समय पर उपलब्ध न कराने के कारण उन्हें अदालत की अवमानना का दोषी ठहराया है। इस गंभीर मामले में अदालत ने रवींद्रन को छह महीने के कारावास की कड़ी सजा सुनाई है। हालांकि, इस न्यायिक फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए रवींद्रन ने स्पष्ट किया है कि यह पूरा मामला केवल तकनीकी और कानूनी प्रक्रियाओं से संबंधित है और उन्होंने किसी भी तरह का कोई अनुचित या गैर-कानूनी कार्य नहीं किया है। उन्होंने यह भी कहा कि वे इस न्यायिक निर्णय के विरुद्ध ऊपरी अदालत में याचिका दायर करेंगे। इस अदालती आदेश को कभी देश के सबसे मूल्यवान और बड़े नए उद्यम (स्टार्टअप) के रूप में पहचान बनाने वाली इस कंपनी के मुख्य संचालक के लिए अब तक का सबसे बड़ा और तगड़ा कानूनी झटका माना जा रहा है।
वित्तीय संकट और कानूनी विवादों के भंवर में फंसी कंपनी
विगत कुछ समय से यह पूरी कंपनी बेहद नाजुक दौर से गुजर रही है। विशेष रूप से वैश्विक महामारी के दौर की समाप्ति के बाद से कंपनी के मुख्य व्यवसाय में भारी गिरावट दर्ज की गई थी। इसके बाद से ही कंपनी को अपने बड़े निवेशकों के साथ गंभीर मतभेदों, विदेशी ऋणदाताओं से जुड़े मुकदमों और दैनिक कामकाज को सुचारू रूप से जारी रखने के लिए भारी संघर्ष करना पड़ रहा है। इसी सिलसिले में विदेशी अदालत ने रवींद्रन को न्यायिक अधिकारियों के समक्ष तत्काल आत्मसमर्पण करने का आदेश जारी किया है। इसके अतिरिक्त, उन्हें कानूनी कार्यवाहियों के खर्च के रूप में लगभग नब्बे हजार सिंगापुर डॉलर (जो कि करीब सत्तर हजार पांच सौ अमेरिकी डॉलर के बराबर है) की भारी राशि सरकारी खजाने में जमा कराने का निर्देश दिया गया है। साथ ही, उन्हें सिंगापुर में पंजीकृत ‘बीअर इन्वेस्टको पीटीई’ नामक एक निवेश कंपनी में अपनी व्यक्तिगत हिस्सेदारी और शेयरधारिता से संबंधित सभी महत्वपूर्ण कागजात अदालत के सामने प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।
विदेशी निवेशकों के साथ जारी है कानूनी जंग
उल्लेखनीय है कि जिस ‘बीअर इन्वेस्टको पीटीई’ कंपनी से जुड़े दस्तावेज मांगे गए हैं, उसकी इस शिक्षा तकनीक समूह से संबद्ध एक अन्य मुख्य इकाई में बड़ी हिस्सेदारी रही है। इस अदालती आदेश के जारी होने के समय बायजू रवींद्रन स्वयं सिंगापुर देश में उपस्थित थे या नहीं, इस बात की पूरी तरह से पुष्टि नहीं हो सकी है। उनके कानूनी सलाहकारों और वकीलों के दल ने मीडिया को बताया कि वे इस दंडात्मक फैसले के खिलाफ तुरंत पुनर्विचार याचिका दायर करने की योजना बना रहे हैं और अदालत से इस आदेश पर कुछ समय के लिए अंतरिम रोक लगाने का विशेष अनुरोध भी करेंगे। जानकारी के अनुसार, यह पूरा मुकदमा कतर देश की एक बड़ी निवेश संस्था (कतर इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी) की सहायक इकाई द्वारा न्यायालय में दायर किया गया था। इस विदेशी संस्था ने उस कठिन समय में इस भारतीय उद्यम में भारी निवेश किया था, जब कंपनी बड़े पैमाने पर अपने कर्मचारियों को काम से निकाल रही थी और अत्यधिक आर्थिक दबाव का सामना कर रही थी।
वैश्विक स्तर पर ऋणदाताओं के साथ उलझा मामला
अदालत की अवमानना का यह नया मामला इस उद्यमी के खिलाफ चल रहे कई बड़े अंतरराष्ट्रीय कानूनी विवादों की श्रृंखला में एक और बड़ी कड़ी है। इन विवादों में अमेरिका की अदालतों में चल रहे वे मुकदमे भी शामिल हैं, जहाँ बड़े विदेशी ऋणदाता और वित्तीय संस्थान लगभग एक अरब दो सौ करोड़ अमेरिकी डॉलर के दीर्घकालिक सावधि ऋण (टर्म लोन) से हुए अपने भारी नुकसान की वसूली के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। इस ताजा अदालती फैसले के सार्वजनिक होने के बाद रवींद्रन ने अपना पक्ष रखते हुए एक आधिकारिक वक्तव्य जारी किया है। उन्होंने अपने बयान में दावा किया कि प्रमुख ऋणदाताओं और निवेशकों के साथ चल रही उनकी समझौता वार्ता अब बिल्कुल आखिरी दौर में पहुंच चुकी थी। उन्होंने इस नए अदालती कदम को बिना वजह विवाद को तूल देने वाली कार्रवाई बताया। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस पूरी बातचीत में शामिल सभी पक्षों ने इस बात को स्वीकार किया है कि उनके या कंपनी के अन्य सह-संस्थापकों द्वारा कोई भी गलत या अनैतिक कार्य नहीं किया गया है।
ये भी पढ़े : दलाई लामा के उत्तराधिकार मामले में चीन की भारत को नसीहत, तिब्बत मुद्दे को बताया अपना आंतरिक विषय
ताज़ा अपडेट और ब्रेकिंग न्यूज़ के लिए हमारे फेसबुक पेज से जुड़ें और STPV.live के साथ अपडेट रहें


