एजेंसी, दिल्ली। Raja Randhir Singh death : देश के जाने-माने खेल प्रशासक और एशियाई खेलों में निशानेबाजी की स्पर्धा में भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाने वाले राजा रणधीर सिंह का बुधवार को देहांत हो गया। वे 79 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से उम्र से संबंधित विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे थे। कई दिनों तक अस्पताल में उपचाराधीन रहने के बाद उन्होंने अपने पैतृक निवास पर अंतिम सांस ली। उनके परिवार में उनकी धर्मपत्नी विनीता और तीन पुत्रियां महिमा, सुनैना और राजेश्वरी हैं। उनकी बेटी राजेश्वरी भी निशानेबाजी के खेल में सक्रिय हैं। खराब स्वास्थ्य के चलते ही उन्होंने हाल ही में एशियाई ओलंपिक परिषद के सर्वोच्च पद (अध्यक्ष) से अपना त्यागपत्र दे दिया था। उन्हें साल 2024 में चार वर्षों के लिए इस पद पर चुना गया था, जबकि इससे पहले वे साल 1991 से लेकर 2015 तक इस प्रतिष्ठित खेल संस्था में मुख्य सचिव के तौर पर अपनी सेवाएं दे चुके थे। भारतीय राष्ट्रीय राइफल संघ के सचिव राजीव भाटिया ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए इस दुखद समाचार की पुष्टि की।
With profound grief, we mourn the passing of our revered uncle, Raja Randhir Singh Ji — a five‑time Olympian, Asian Games gold medallist, and one of India’s most distinguished sportsmen and administrators.
His journey from the shooting ranges to the global Olympic stage was… pic.twitter.com/TG3jgortsE
— Kanak Vardhan Singh Deo (Modiji Ka Parivar) (@KVSinghDeo1) May 27, 2026
अर्जुन पुरस्कार और खेल जगत में अमूल्य योगदान
राजीव भाटिया ने अपने शोक संदेश में कहा कि राजा रणधीर सिंह एक विशिष्ट ओलंपियन और अर्जुन पुरस्कार विजेता होने के साथ-साथ भारत, एशिया और अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के सबसे सम्मानित खेल प्रशासकों में से एक थे। उन्होंने निशानेबाजी के खेल और ओलंपिक आंदोलन को आगे बढ़ाने तथा उसके विकास में अपना अमूल्य योगदान दिया था। राष्ट्रीय राइफल संघ और पूरा खेल जगत इस अपूरणीय क्षति पर गहरा शोक व्यक्त करता है और शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी संवेदना प्रकट करता है। रणधीर सिंह का खेल करियर बेहद शानदार रहा, जिसमें उन्होंने पांच बार ओलंपिक खेलों में देश का प्रतिनिधित्व किया। साल 1978 में बैंकॉक में आयोजित हुए एशियाई खेलों में उन्होंने ट्रैप निशानेबाजी में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीता था, जिसके बाद साल 1979 में उन्हें देश के प्रतिष्ठित खेल सम्मान अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उन्होंने साल 1964 के तोक्यो (अतिरिक्त खिलाड़ी के तौर पर), 1968 के mexico, 1972 के म्यूनिख, 1976 के मॉन्ट्रियल, 1980 के मॉस्को और 1984 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक खेलों में हिस्सा लिया था।
खेल प्रशासन में निभाया महत्वपूर्ण उत्तरदायित्व
खेल के मैदान की तरह ही उनका प्रशासनिक करियर भी उपलब्धियों से भरा रहा। उन्होंने साल 1987 से लेकर 2010 तक भारतीय ओलंपिक संघ में मुख्य सचिव के रूप में अपनी सेवाएं दीं। इसके अलावा साल 2001 से 2014 तक उन्होंने अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति में अलग-अलग महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। साल 2003 में वे दो वर्षों के लिए विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी में अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति के प्रतिनिधि भी मनोनीत किए गए थे। पटियाला के पूर्व महाराजा और दिग्गज क्रिकेटर भूपिंदर सिंह के वंशज राजा रणधीर सिंह को भारतीय खेल संगठनों के भीतर आपसी सहमति बनाने की उनकी अद्भुत क्षमता के लिए हमेशा याद किया जाता रहेगा।
बेटी ने आगे बढ़ाई पिता की खेल विरासत
राजा रणधीर सिंह की छोटी बेटी राजेश्वरी ने अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए निशानेबाजी की इस पारिवारिक विरासत को पूरी गरिमा के साथ आगे बढ़ाया है। वे भी अपने पिता की तरह एक कुशल ट्रैप निशानेबाज हैं। राजेश्वरी ने साल 2016 में आयोजित हुई एशियाई चैंपियनशिप में देश के लिए स्वर्ण पदक जीता था और इसके बाद साल 2022 के एशियाई खेलों में भी वे रजत पदक जीतने में सफल रही थीं। उनका पूरा परिवार खेल और देश सेवा के प्रति समर्पित रहा है।
ताज़ा अपडेट और ब्रेकिंग न्यूज़ के लिए हमारे फेसबुक पेज से जुड़ें और STPV.live के साथ अपडेट रहें


