एजेंसी, धार। Bhojshala ASI Order : मध्यप्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद के बीच हिंदू पक्ष को बड़ी राहत मिली है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के बाद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने नया निर्देश जारी करते हुए हिंदुओं को मां वाग्देवी यानी मां सरस्वती की पूजा-अर्चना के लिए परिसर में बिना किसी रोक-टोक प्रवेश की अनुमति दे दी है। एएसआई ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा है कि हाईकोर्ट ने भोजशाला को संरक्षित स्मारक के साथ-साथ देवी वाग्देवी का मंदिर भी माना है। इसके बाद अब हिंदू समुदाय को यहां नियमित रूप से पूजा करने का अधिकार मिल गया है।
STORY | Hindu groups hold ‘Mahavijay Mahotsav’ at Bhojshala in MP after ASI nod
Hindu groups organised a “victory celebration” at the historic Bhojshala complex in Madhya Pradesh’s Dhar district on Tuesday, days after the ASI granted the community unrestricted access to the… pic.twitter.com/KaPgJcMnNJ
— Press Trust of India (@PTI_News) May 19, 2026
हाईकोर्ट के फैसले के बाद जारी हुआ आदेश
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की ओर से 16 मई को जारी आदेश में कहा गया कि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 15 मई को दिए फैसले में भोजशाला के ऐतिहासिक और धार्मिक स्वरूप को स्वीकार किया है। अदालत ने माना कि यह स्थल प्राचीन संस्कृत शिक्षा केंद्र और देवी सरस्वती के मंदिर के रूप में जाना जाता रहा है। आदेश में कहा गया कि ऐतिहासिक दस्तावेज, साहित्य और स्थापत्य साक्ष्य इस बात की पुष्टि करते हैं कि भोजशाला का संबंध परमार वंश के राजा भोज से रहा है और यहां सरस्वती मंदिर मौजूद था। एएसआई के शोध में भी इन तथ्यों को समर्थन मिला है।
2003 का पुराना आदेश रद्द
एएसआई ने अपने नए आदेश में वर्ष 2003 में जारी पुराने निर्देश को भी निरस्त कर दिया है। उस आदेश में हिंदुओं के पूजा अधिकारों पर कई तरह की सीमाएं लगाई गई थीं, जबकि परिसर में मुस्लिम पक्ष को नमाज की अनुमति दी गई थी। अब नए निर्देश के तहत हिंदू समुदाय को भोजशाला परिसर में पूजा-अर्चना और धार्मिक गतिविधियां करने की पूरी अनुमति दे दी गई है। आदेश में साफ कहा गया है कि श्रद्धालुओं को बिना किसी बाधा के प्रवेश मिलेगा।
लंबे समय से विवादों में रही भोजशाला
धार की भोजशाला कई वर्षों से धार्मिक और कानूनी विवाद का केंद्र रही है। हिंदू पक्ष इसे मां वाग्देवी का मंदिर और संस्कृत शिक्षा का प्राचीन केंद्र मानता रहा है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता रहा है। इस विवाद को लेकर अदालतों में लंबे समय से सुनवाई चल रही थी। पुरातात्विक सर्वेक्षण और ऐतिहासिक दस्तावेजों को लेकर भी दोनों पक्षों के बीच बहस होती रही।
राजा भोज से जुड़ा है ऐतिहासिक महत्व
इतिहासकारों के अनुसार भोजशाला का संबंध परमार वंश के प्रसिद्ध राजा भोज से माना जाता है। कहा जाता है कि यहां संस्कृत शिक्षा और विद्या का बड़ा केंद्र हुआ करता था। कई प्राचीन शिलालेख और स्थापत्य अवशेष भी इस दावे को मजबूत करते हैं। हाईकोर्ट ने भी अपने फैसले में इन ऐतिहासिक तथ्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि उपलब्ध साक्ष्य भोजशाला के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व की पुष्टि करते हैं।
हिंदू संगठनों में खुशी का माहौल
हाईकोर्ट और एएसआई के आदेश के बाद हिंदू संगठनों और श्रद्धालुओं में खुशी का माहौल है। कई संगठनों ने इसे ऐतिहासिक फैसला बताते हुए स्वागत किया है। उनका कहना है कि वर्षों की कानूनी लड़ाई के बाद अब श्रद्धालुओं को बिना किसी रोक के पूजा करने का अधिकार मिला है। वहीं प्रशासन की ओर से कहा गया है कि परिसर में शांति और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक इंतजाम किए जाएंगे। भोजशाला परिसर में आने वाले दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है।
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