NEET UG Exam

नीट पेपर को लेकर युद्ध स्तर पर तैयारी : प्रधानमंत्री कार्यालय रखेगा पैनी नजर, वायु सेना के जरिए पहुंचाए जाएंगे प्रश्न पत्र

देश/प्रदेश नई दिल्ली राष्ट्रीय

एजेंसी, नई दिल्ली। NEET UG Exam Security : विवादों और प्रश्न पत्र लीक होने के गंभीर आरोपों के बाद अब केंद्र सरकार चिकित्सा प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी) को लेकर पूरी तरह से सतर्क हो चुकी है। तीन मई को आयोजित की गई परीक्षा के रद्द होने के बाद देश भर के तेईस लाख से ज्यादा छात्र-छात्राओं के भविष्य पर बड़े सवाल खड़े हो गए थे। अब आगामी इक्कीस जून को होने वाली दोबारा परीक्षा को पूरी तरह से सुरक्षित, निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए सरकार ने युद्ध स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी हैं। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि इस बार पूरी परीक्षा प्रक्रिया की कमान सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय ने अपने हाथों में ले ली है और प्रश्न पत्रों की अभेद्य सुरक्षा के लिए भारतीय वायु सेना की विशेष मदद लेने पर भी बेहद गंभीरता से विचार किया जा रहा है।

डाक व्यवस्था के बजाय वायु सेना संभालेगी प्रश्न पत्रों के परिवहन का जिम्मा

आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, केंद्रीय शिक्षा मंत्री और रक्षा मंत्री के बीच हुई एक अत्यंत उच्च स्तरीय बैठक में इस विशेष योजना का खाका तैयार किया गया। इस महत्वपूर्ण बैठक में भारतीय वायु सेना के कई वरिष्ठ और उच्च अधिकारी भी विशेष रूप से मौजूद थे। नई योजना के अनुसार, प्रश्न पत्रों को छपाई कारखाने से सीधे देश भर के चिन्हित परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने के लिए वायु सेना के विमानों और सुरक्षा तंत्र की मदद ली जा सकती है। सरकार का स्पष्ट मानना है कि आगामी समय में मानसून की बारिश और खराब मौसम की आशंकाओं के बीच इन अत्यंत संवेदनशील और गोपनीय दस्तावेजों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए वायु सेना से ज्यादा भरोसेमंद और कोई दूसरा विकल्प नहीं हो सकता। ज्ञात हो कि इससे पहले तक परीक्षा के प्रश्न पत्र सामान्य डाक व्यवस्था या निजी कूरियर के जरिए भेजे जाते थे, जिसमें कई स्तरों पर मानवीय हस्तक्षेप की गुंजाइश बनी रहती थी।

छपाई कारखाने से शुरू हुई थी गड़बड़ी, जांच में सामने आए कई चौंकाने वाले तथ्य

चिकित्सा प्रवेश परीक्षा आज भी देश में पूरी तरह से पेन और पेपर यानी लिखित माध्यम से आयोजित की जाती है, जबकि इंजीनियरिंग की मुख्य परीक्षाएं पूरी तरह से कंप्यूटर आधारित प्रणाली पर चलती हैं। जांच एजेंसियों द्वारा की गई शुरुआती पड़ताल में यह बात सामने आई है कि तीन मई को हुई परीक्षा का प्रश्न पत्र महाराष्ट्र के नासिक में स्थित एक छपाई कारखाने से लीक होना शुरू हुआ था। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की गहन तफ्तीश में यह भी पता चला है कि परीक्षा आयोजित करने वाली राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनटीए) के ही एक कथित अंदरूनी स्रोत के जरिए यह गोपनीय दस्तावेज बाहर भेजा गया था। वर्तमान में इस राष्ट्रीय एजेंसी के पास अपना खुद का बहुत सीमित स्थायी स्टाफ है और इसका एक बहुत बड़ा हिस्सा बाहरी स्रोतों से नियुक्त किए गए कर्मचारियों पर निर्भर है। संसद में दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इस एजेंसी में बड़ी संख्या में संविदा और आउटसोर्स कर्मचारी काम कर रहे हैं, जिसके कारण सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगने का खतरा हमेशा बना रहता है।

नई कूटनीति पर विपक्ष ने उठाए सवाल, व्यवस्था की विफलता का लगाया आरोप

इस पूरे विवाद के बाद सरकार ने सुरक्षा के मोर्चे पर ‘शून्य विश्वास और निरंतर निरीक्षण’ की बेहद सख्त नीति अपनाने का फैसला किया है। हालांकि, परीक्षा के आयोजन में सीधे देश की वायु सेना को शामिल करने के इस नए प्रस्ताव पर देश के भीतर एक नई राजनीतिक बहस भी छिड़ गई है। शिक्षा क्षेत्र के कई बड़े विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा कदम उठाना कहीं न कहीं देश की नागरिक सुरक्षा प्रणालियों पर से सरकार के घटते भरोसे को साफ तौर पर दर्शाता है। इसके साथ ही, कई पूर्व सैन्य अधिकारियों और विपक्षी दलों के नेताओं ने इसे पूरी प्रशासनिक व्यवस्था की एक बड़ी विफलता करार दिया है। इसके विपरीत, सरकार का इस मुद्दे पर बेहद मजबूत तर्क है कि इस समय देश के लाखों युवाओं के मन में परीक्षा की विश्वसनीयता और निष्पक्षता को दोबारा बहाल करना ही प्रशासन की सबसे सर्वोच्च प्राथमिकता है। ऐसे में इस बार की यह प्रवेश परीक्षा केवल एक सामान्य परीक्षा नहीं, बल्कि देश के पूरे परीक्षा तंत्र की साख और प्रतिष्ठा को बचाने की एक बहुत बड़ी चुनौती बन चुकी है।

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