Pune Toxic Liquor Case

पुणे में विषैली शराब का कहर : मौत का आंकड़ा 15 तक पहुंचा, मुख्यमंत्री ने दिए कड़े जांच के आदेश, 8 हिरासत में

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एजेंसी, पुणे। Pune Toxic Liquor Case : महाराष्ट्र के पुणे शहर और उसके आस-पास के इलाकों से एक बेहद ही दर्दनाक और सनसनीखेज खबर सामने आई है। यहां पिछले चौबीस घंटों के भीतर कथित तौर पर जहरीली शराब पीने के कारण कुल पंद्रह लोगों की असमय और दर्दनाक मौत हो गई है। इस सामूहिक मौत के बाद पूरे प्रशासनिक और पुलिस अमले में भयंकर हड़कंप मच गया है। यह बेहद दुखद घटना पुणे के हडपसर, फुगेवाड़ी, दापोडी और पिंपरी जैसे घने रिहायशी और श्रमिक बहुल इलाकों में घटित हुई है। इस भीषण त्रासदी की जानकारी मिलते ही राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए तुरंत एक उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच के कड़े आदेश जारी कर दिए हैं। शासन ने साफ किया है कि इस लापरवाही के पीछे जो भी लोग जिम्मेदार होंगे, उन्हें कतई बख्शा नहीं जाएगा।

पुलिस और आबकारी विभाग का साझा एक्शन, अवैध धंधेबाजों सहित आठ लोग शिकंजे में

इतने बड़े पैमाने पर लोगों की जान जाने के बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन और राज्य आबकारी विभाग पूरी तरह से कड़े एक्शन मोड में आ गया है। दोनों विभागों की टीमों ने मिलकर देर रात कई संदिग्ध ठिकानों पर एक साथ संयुक्त छापेमारी की बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। इस कड़े ऑपरेशन के तहत अब तक कुल आठ संदिग्ध लोगों को हिरासत में ले लिया गया है, जिनसे गुप्त स्थानों पर बेहद कड़ाई के साथ पूछताछ की जा रही. है। पकड़े गए इन आरोपियों में क्षेत्र का एक बेहद नामी और बड़ा अवैध शराब कारोबारी भी शामिल है, जो लंबे समय से चोरी-छिपे इस जानलेवा धंधे को संचालित कर रहा था। पुलिस ने उस अवैध निर्माण स्थल को भी पूरी तरह से सील कर दिया है, जहां पर इस जानलेवा और जहरीले पेय पदार्थ को तैयार किया जाता था।

रसायनों के जानलेवा मिश्रण की आशंका, मेथेनॉल के प्रयोग से बिगड़ी स्थिति

शुरुआती फॉरेंसिक जांच और चिकित्सा अधिकारियों से प्राप्त कूटनीतिक जानकारियों के अनुसार, शुरुआती पड़ताल में यह बात खुलकर सामने आई है कि पकड़ी गई शराब को बेहद नशीला और तीखा बनाने के चक्कर में उसमें मेथेनॉल जैसे बेहद खतरनाक और जानलेवा रसायन का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया हो सकता है। यह केमिकल इंसानी शरीर के भीतर जाते ही एक बेहद तीखे जहर में बदल जाता है, जिससे शरीर के मुख्य अंग काम करना बंद कर देते हैं। इस वैज्ञानिक खुलासे के बाद पुलिस की टीमें अब उन तमाम कड़ियों और मुख्य सप्लायरों को ढूंढने में जुट गई हैं, जो इस तरह के प्रतिबंधित और जानलेवा रसायनों को अवैध शराब बनाने वालों तक आसानी से पहुंचा रहे थे।

स्थानीय जनता में भारी आक्रोश, पुलिस व्यवस्था पर खड़े हुए गंभीर सवाल

इस दर्दनाक हादसे के बाद पुणे के आम नागरिकों और मृतकों के परिजनों के भीतर स्थानीय प्रशासन और आबकारी विभाग के खिलाफ भारी गुस्सा और गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। स्थानीय नागरिकों ने पुलिस पर सीधे तौर पर गंभीर आरोप उठाते हुए कहा है कि क्षेत्र में लंबे समय से प्रतिबंधित हाथ भट्टी की अवैध और जहरीली शराब खुलेआम बेची जा रही थी, लेकिन बार-बार शिकायत करने के बाद भी जिम्मेदार अधिकारियों ने इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। इसी लापरवाही के कारण आज पंद्रह घरों के चिराग पूरी तरह से बुझ गए हैं। इस पूरे मामले को लेकर विपक्षी दलों ने भी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तथा पूर्व महापौर योगेश बहल ने इस पूरी त्रासदी पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए मांग की है कि मामले की पूरी तरह से निष्पक्ष जांच कराई जाए और पर्दे के पीछे छिपे असली दोषियों पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।

मौत के कारणों पर पुलिस का विरोधाभासी बयान, गहनता से जारी है पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार

दूसरी तरफ, इस पूरे मामले को लेकर पिंपरी-चिंचवड़ पुलिस प्रशासन की तरफ से एक बेहद ही रक्षात्मक और विरोधाभासी बयान भी सामने आया है। स्थानीय पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती जांच में शुरुआती तौर पर केवल पांच लोगों की मौत ही पूरी तरह से संदेहास्पद लग रही है, जबकि अन्य लोगों की मौत के पीछे कुछ अलग-अलग बीमारियां या अन्य व्यक्तिगत कारण भी हो सकते हैं। हालांकि, पुलिस ने खुद इस बात को भी पूरी तरह स्वीकार किया है कि जितने भी मरीजों और मृतकों को अस्पताल लाया गया था, उन सभी ने मौत से ठीक पहले तेज सिरदर्द, धुंधला दिखने और भयंकर चक्कर आने की गंभीर शिकायत की थी। ये सभी लक्षण चिकित्सा विज्ञान में सीधे तौर पर जहरीली शराब के सेवन की तरफ ही बड़ा इशारा करते हैं। फिलहाल पुलिस विभाग सभी मृतकों की विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विसरा जांच के नतीजों का बेहद बेसब्री से इंतजार कर रहा है ताकि मौत की असली वजहों को पूरी कानूनी पारदर्शिता के साथ देश के सामने रखा जा सके।

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